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Hindi News ›   Chandigarh ›   Breaking in security of Snehalaya ... 13 children abscond in four years

चंडीगढ़ः कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी से लैस स्नेहालय की सुरक्षा में सेंध, चार साल में 13 बच्चे फरार

Wed, 04 Mar 2020 11:45 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमित गुप्ता, चंडीगढ़
अमित गुप्ता, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 04 Mar 2020 11:45 AM IST
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Breaking in security of Snehalaya ... 13 children abscond in four years
स्नेहालय, चंडीगढ़ - फोटो : अमर उजाला
मलोया स्थित स्नेहालय से बच्चे लगातार फरार हो रहे हैं। आलम यह है कि चार साल में 13 बच्चे दीवार फांदकर भागे हैं, जिनमें से मात्र 4 को ही पुलिस तलाश सकी है। 9 बच्चों का अभी तक कोई सुराग नहीं लग सका है। बच्चों के फरार होने से स्नेहालय की सुरक्षा व्यवस्था सवालों में आ गई है। दूसरी ओर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी का कहना है कि स्नेहालय में ज्यादा अनुशासन के कारण बच्चे भागते हैं।
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मलोया में जून 2009 से स्नेहालय स्थापित है। कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी से लैस स्नेहालय में इस समय करीब 125 बच्चे हैं। यहां ज्यादातर उन बच्चों को रखा जाता है, जो बाल मजदूरी, घर छोड़कर भागने वाले, कम उम्र में शादी, बेसहारा या दिव्यांग होते हैं। स्नेहालय की टीम इन बच्चों की काउंसलिंग कर उन्हें परिवार से मिलाती है।
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सुरक्षा के लिहाज से यहां सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। बिल्डिंग के चारों ओर सात फीट ऊंची दीवार है। इसके ऊपर कंटीले तार लगे हुए हैं। हर आने जाने वाले पर पूरी नजर रखी जाती है। इतनी व्यवस्था के बावजूद यहां से बच्चों का फरार हो जाना कई सवाल खड़े करता है।
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जून 2015 से अब तक 13 बच्चों के भागने पर मलोया थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया है। बाद में पुलिस की मदद से चार बच्चों को तलाश लिया गया। हालांकि बच्चों के भागने का सिलसिला थमा नहीं है। 22 फरवरी को ही चार बच्चे यहां से फरार हुए थे।

बच्चों की होती है काउंसलिंग

स्नेहालय में रोजाना करीब से 10 से 15 नए मामले सामने आते हैं। इसके बाद इन बच्चों की काउंसलिंग कार्रवाई जाती है। मकसद होता है परिवारों से मिलवाना। कुछ बच्चों को तो घर का पता तक नहीं मालूम होता है। इनकी काउंसलिंग में ज्यादा परेशानी होती है। अगर कोई परिवार बच्चे का लालन पालन नहीं कर सकता तो ऐसे बच्चे को 18 वर्ष की उम्र तक स्नेहालय में रखा जाता है।

दीवार छोटी होने से बच्चे आसानी से होते हैं फरार
ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि स्नेहालय की दीवार ज्यादा छोटी होने के कारण बच्चे आसानी से फरार होते हैं। हालांकि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी का कहना है कि स्नेहालय जेल या बंदीगृह नहीं है और न ही बच्चे कोई न्यायिक हिरासत में हैं। बच्चे विभिन्न प्रकार की विषमता और अभाव के कारण में यहां आए हैं। घर जैसा वातावरण और पर्याप्त सुरक्षा यहां दी जाती है।

कब कब लापता हुए स्नेहालय से बच्चे
1- 22 फरवरी 2020 को चार बच्चे लापता
2. नवंबर 2019 को एक बच्चा
3. सितंबर 2016 को चार बच्चे लापता
4. जून 2015 को दो बच्चे लापता
5. जुलाई 2015 को एक बच्चा लापता
6. नवंबर 2015 को एक किशोर लापता

अनुशासन नहीं सह पाते बच्चे
स्नेहालय में बच्चों का शारीरिक, मानसिक, शैक्षिक स्तर पर पूरा ख्याल रखा जाता है। जबकि बच्चे अनुशासन नापसंद करते हैं, यहां समयबद्ध रूप से उठना, पढ़ना, खेलना, खाना सभी की सीमा तय की गई है। यही वजह हो सकती है कि बच्चे यहां से भागने की कोशिश करते हैं।
- संगीता वर्धन, चेयरपर्सन, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, चंडीगढ़
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