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हरियाणा: इधर गठबंधन टूटा, उधर सियासी समीकरण बदले

Fri, 29 Aug 2014 12:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 29 Aug 2014 12:53 PM IST
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Break Up of BJP-HJC Political Coalition

हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी और हरियाणा जनहित कांग्रेस की तीन साल पुरानी सियासी दोस्ती टूटने के साथ ही प्रदेश के राजनीतिक समीकरण के भी बदलने के आसार हैं।

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अब तक प्रदेश में तिकोने संघर्ष के आसार बन रहे थे लेकिन गठबंधन टूटने के साथ ही अब महा गठबंधन बनने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

हजकां का गठबंधन फिलहाल विनोद शर्मा की जनचेतना पार्टी से हुआ है, लेकिन भविष्य में अन्य दलों के साथ गठबंधन से इनकार नहीं किया जा सकता।

कुलदीप ने नहीं किया रणनीति का खुलासा

Break Up of BJP-HJC Political Coalition

कुलदीप बिश्नोई ने भविष्य की रणनीति का अभी खुलासा नहीं किया है। लेकिन प्रदेश में इस बार बसपा भी अरविंद शर्मा के नेतृत्व में सक्रिय है।

हालांकि बसपा ने ब्राह्मण चेहरे के तौर पर अरविंद शर्मा को मैदान में सीएम के रूप में प्रोजेक्ट किया है और कुलदीप स्वयं को सीएम के रूप में प्रोजेक्ट कर चल रहे हैं।

साथ ही कुलदीप के साथ ब्राह्मण चेहरे के तौर पर विनोद शर्मा भी शामिल हैं। अगर दोनों दलों की बातचीत होती है तो बसपा के साथ तालमेल कितना संभव होगा यह देखने वाली बात होगी।

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लिखित होने के बावजूद नहीं चला समझौता

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हरियाणा की सियासत में पहली बार ऐसा देखने को मिला जब दो दलों में लिखित समझौता हुआ। इस समझौते पर भाजपा नेताओं के साथ कुलदीप बिश्नोई के भी हस्ताक्षर हैं।

कुलदीप को डर था कि भाजपा मुकर न जाए, इसीलिए लिखित में किया था समझौता, लेकिन लिखित में होने के बावजूद लंबा नहीं चला।

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गठबंधन टूटने के कारणों को खारिज किया विज ने

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भारतीय जनता पार्टी और हरियाणा जनहित कांग्रेस का गठबंधन टूटने के साथ ही दोनों दलों आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई ने गठबंधन टूटने के जो कारण बताए हैं भाजपा विधायक दल के नेता अनिल विज ने उन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। हालांकि अनिज विज शुरुआती दौर से इस गठबंधन के खिलाफ रहे हैं।

उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि भाजपा श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शों पर चलेगी। पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के सिद्धांतों पर नहीं। गठबंधन पर कोई भी बयान देने से बचती रही हजकां ने वीरवार को भाजपा के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।

कुलदीप बिश्नोई ने यहां तक कह दिया कि भाजपा धोखेबाज पार्टी है। वहीं, भाजपा ने सियासी दांव खेलते हुए गठबंधन टूटने का ठीकरा भी कुलदीप के सिर फोड़ दिया है। भाजपा का कहना है कि प्रदेश की जनता को नहीं मालूम कि कुलदीप अमित शाह से मिलने का समय लेने के बाद एक दम से गठबंधन तोड़ने की घोषणा कर देंगे।

बिश्‍नाई के 4 आरोप, विज के 4 पलटवार

Break Up of BJP-HJC Political Coalition

कुलदीप: भाजपा का इतिहास धोखे का है। पार्टी इससे पहले चौधरी देवीलाल, बंसीलाल और ओम प्रकाश चौटाला के साथ धोखा कर चुकी है।
विज: हरियाणा में कोई भी दल भाजपा के सहयोग के बिना बिना सरकार नहीं बना सकता था। सरकार बनाने के बाद जिन दलों ने हमारे साथ धोखा किया हमने उनका साथ नहीं दिया।

कुलदीपः कुलदीप बिश्नोई को भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली रैली में नहीं बुलाया। गठबंधन धर्म के नाते कुलदीप इस रैली में प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा से फोन पर बात करके गए। रामबिलास ने आश्वासन दिया कि वे रैली में पहुंचे उन्हें पूरा सम्मान दिया जाएगा। लेकिन रैली में मोदी ने मंच से उनका नाम तक नहीं लिया और उनकी कुर्सी भी सबसे किनारे लगाई गई।
विजः कुलदीप बिश्नोई झूठ बोल रहे हैं। मोदी जी की रैली में कैप्टन अभिमन्यु ने मेरे सामने कहा था कि कुलदीप मंच से बोलें। लेकिन कुलदीप ने यह कह कर मना कर दिया कि मोदी जी के सामने नहीं बोलेंगे। उसके बाद तो मुझे खुद भी बोलने का मौका नहीं मिला

कुलदीपः
हिसार में हजकां के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में गठबंधन धर्म के नाते हजकां ने भाजपा के केंद्रीय नेता अरुण जेटली को बुलाया। प्रचार रथ में भाजपा के अधिक फोटो और हजकां के कम फोटो लगाए
विज: अनिल विज का कहना है कि हजकां की रैली में कुलदीप ने अपनी जरूरत के तौर पर हमारे नेताआें को बुलाया था। लोकसभा चुनाव में कुलदीप हमारे बुलाने के बावजूद भाजपा के किसी मंच पर नहीं आए।

कुलदीपः हजकां सोनीपत सीट पर अपना प्रत्याशी उतारना चाहती थी। बात करने पर सुषमा ने कहा कि सोनीपत हम किसी और को दे चुके हैं। हजकां को यह सीट छोड़नी पड़ेगी।
विजः पार्टी फोरम पर हुई बातों का तो पता रहता है लेकिन सुषमा जी और कुलदीप जी के बीच क्या बात हुई उस पर मैं कैसे टिप्पणी कर सकता हूं

कुलदीप बिश्नोई ने ये अन्य 4 आरोप भी लगाए

Break Up of BJP-HJC Political Coalition

कुलदीपः करनाल सीट पर देने पर भाजपा ने हामी भर दी थी। विनोद शर्मा का नाम आने पर सुषमा स्वराज ने आपत्ति जता दी। इसके बाद चंद्रमोहन को उतारा तो भाजपा सीट को छोड़ना का दबाव बनाकर सिरसा सीट दी।
विजः कुलदीप की विनोद शर्मा केसाथ पहले ही सांठगांठ चल रही थी। लोकसभा चुनाव के बाद कुलदीप ने स्वयं अपने आप को एनडीए से अलग कर लिया। चुनाव के बाद कुलदीप ने भाजपा की प्रचार सामग्री अपने कार्यक्रमों से हटवा दी थी।

कुलदीपः भाजपा की मांग के बाद करनाल सीट से चंद्रमोहन को कुलदीप ने नाम वापस लेने के लिए कहा। उसके बाद सिरसा सीट से डा. सुशील इंदौरा को उतारा तो राजनाथ सिंह ने कहा कि सिरसा से सुनीता दुग्गल को टिकट दे दी जाए। इस बात पर मैने इनकार कर दिया।
विजः यह पहले ही तय था कि लोकसभा चुनाव में कुलदीप के परिवार से एक ही व्यक्ति लड़ेगा। ऐसे में चंद्रमोहन को खड़ा ही नहीं किया जाना चाहिए था। दूसरी बात यह भी है कि चंद्रमोहन हमें स्वीकार नहीं थे।

कुलदीपः
लोकसभा चुनाव के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल दुष्यंत के प्रचार के लिए पहुंचे। उन्होंने जनसभा कर कहा कि 16 मई को मतगणना का रिजल्ट निकलेगा और मैं 17 मई को दुष्यंत को मंत्री बनवा दूंगा।
विजः
बादल ने अकेले कुलदीप के खिलाफ प्रचार नहीं किया उन्होंने भाजपा के खिलाफ भी प्रचार किया। हमने ऐतराज जताया था, लेकिन बादल साहब ने कहा कि इनेलो से हमारा पुराना नाता है।

कुलदीपः
कोआर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन धर्मपाल मलिक ने कमेटी की मीटिंग बुलाने के लिए कहा। मीटिंग में हजकां के सभी सदस्य पहुंचे लेकिन भाजपा से सिर्फ दो नेता पहुंचे।
विजः कमेटी की छह माह तक धर्मपाल मलिक ने कोई बैठक नहीं बुलाई। जबकि तय हुआ था कि हर माह बैठक होगी। बैठक की मुझे कोई सूचना नहीं आई। ऐसे ही अन्य नेताओं को नहीं आई होगी।

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