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छह में से एक व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 30 Oct 2013 09:10 AM IST
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ब्रेन स्ट्रोक लगातार अपनी पैठ बना रहा है। फोर्टिस अस्पताल के वास्कुलर सर्जरी के डॉ. रावुल जिंदल ने बताया कि हर छह में से एक व्यक्ति ब्रेन स्ट्रोक के चपेट में आएगा।
रोक का जोखिम पैदा करने वाले पहलुओं में हाई ब्लड प्रेशर सबसे अहम है। शोध इस बात के गवाह हैं कि 70 फीसदी मरीजों को स्ट्रोक का पता ही नहीं चल पाता और 30 फीसदी मरीज इस ओर ध्यान देने में देर कर चुके होते हैं।
स्ट्रोक की शिकायत के लिए स्मोकिंग, डायबिटीज, हाई कैलेस्ट्रॉल और एट्रियल फिब्रिलेशन आदि अन्य पहलुओं को भी जिम्मेदार ठहराते हुए डॉ. जिंदल ने कहा कि इन्हें नियंत्रित करना हमारे अपने हाथ में है।
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उन्होंने कहा, ‘इस तरह अपना बीपी, ब्लड शुगर और कैलेस्ट्रॉल आदि को नियमित रूप से जांचना शुरू करें। शारीरिक श्रम ज्यादा करें, अपने खानपान पर नजर रखें, सिगरेट, शराब के सेवन से बचें।
सबसे अहम यह कि स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना सीखे। स्ट्रोक की शिकायत होते ही तुरंत अपने न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। डॉ. जिंदल के मुताबिक, एंबोलिक स्ट्रोक की स्थिति में इलाज मुख्य रूप से दो तरह से किया जाता है।
एक ओपन सर्जरी (कैरोटिड एंडर्टिरेक्टोमी) या एंडोवास्कुलर रूट (कैट्रोरिड आर्टरी स्टंटिंग) से। इन दोनों ही तरीकों में वैसल को खोला जाता है और खून का संचार दुरुस्त किया जाता है और एंबोलाइजेशन से भी बचाव किया जाता है।
दोनों को ही लोकल एनेस्थिशिया के तहत अंजाम देना होता है और यदि इसे सही ढंग से किया गया हो तो इसकी सफलता दर भी बेहद अच्छी रहती है।
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रोक का जोखिम पैदा करने वाले पहलुओं में हाई ब्लड प्रेशर सबसे अहम है। शोध इस बात के गवाह हैं कि 70 फीसदी मरीजों को स्ट्रोक का पता ही नहीं चल पाता और 30 फीसदी मरीज इस ओर ध्यान देने में देर कर चुके होते हैं।
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स्ट्रोक की शिकायत के लिए स्मोकिंग, डायबिटीज, हाई कैलेस्ट्रॉल और एट्रियल फिब्रिलेशन आदि अन्य पहलुओं को भी जिम्मेदार ठहराते हुए डॉ. जिंदल ने कहा कि इन्हें नियंत्रित करना हमारे अपने हाथ में है।
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उन्होंने कहा, ‘इस तरह अपना बीपी, ब्लड शुगर और कैलेस्ट्रॉल आदि को नियमित रूप से जांचना शुरू करें। शारीरिक श्रम ज्यादा करें, अपने खानपान पर नजर रखें, सिगरेट, शराब के सेवन से बचें।
सबसे अहम यह कि स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना सीखे। स्ट्रोक की शिकायत होते ही तुरंत अपने न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। डॉ. जिंदल के मुताबिक, एंबोलिक स्ट्रोक की स्थिति में इलाज मुख्य रूप से दो तरह से किया जाता है।
एक ओपन सर्जरी (कैरोटिड एंडर्टिरेक्टोमी) या एंडोवास्कुलर रूट (कैट्रोरिड आर्टरी स्टंटिंग) से। इन दोनों ही तरीकों में वैसल को खोला जाता है और खून का संचार दुरुस्त किया जाता है और एंबोलाइजेशन से भी बचाव किया जाता है।
दोनों को ही लोकल एनेस्थिशिया के तहत अंजाम देना होता है और यदि इसे सही ढंग से किया गया हो तो इसकी सफलता दर भी बेहद अच्छी रहती है।