{"_id":"32063fd211d4de820ecf7557b976ceee","slug":"book-release-on-18th-century","type":"story","status":"publish","title_hn":"18वीं शताब्दी की हकीकत जानिए ‘शुभ करमन’ में ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
18वीं शताब्दी की हकीकत जानिए ‘शुभ करमन’ में
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Fri, 02 May 2014 10:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
18वीं शताब्दी में पंजाब में क्या-क्या घटा था। ऐसी ही कुछ सच्ची घटनाओं को काल्पनिक पात्रों के सहारे ही ‘शुभ करमन’ उपन्यास में पेश किया गया है। यह कहना है उपन्यास शुभ करमन के लेखक चरणदीप सिंह का।
विज्ञापन
वीरवार को प्रेस क्लब में महावीर चक्र विजेता बिग्रेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी, रवि तेजपाल सिंह तुलसी और प्रो. हरबंस लाल की मौजूदगी में उनके उपन्यास का विमोचन किया गया।
विज्ञापन
उपन्यासकार चरणदीप सिंह ने बताया कि वह पहले भी दो उपन्यास अंग्रेजी में लिख चुके हैं। इसमें ‘द राइटफुल ऑनर’ और ‘वी क्रिएट हिस्ट्री’ प्रमुख हैं। इस बार उनके दिल में आया कि मातृभाषा पंजाबी के लिए कुछ किया जाए। इसी सोच को लेकर उन्होंने ‘शुभ करमन’ को लिखने का फैसला लिया।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि वैसे तो देश में पंजाबी में लिखे गए उपन्यासों की मांग काफी कम है, लेकिन एनआरआई मार्केट में इनकी खूब मांग है। यूरोप, न्यूजीलैंड समेत कई देशों में लोग इनके माध्यम से मातृभाषा से जुड़े रहने की कोशिश करते हैं।
उपन्यासकार ने बताया कि वह जल्दी ही इस उपन्यास का ई संस्करण भी तैयार करने की योजना बना रहे हैं। ताकि लोग कंप्यूटर पर एक क्लिक में उपन्यास पढ़ पाए।
चरणदीप ने बताया कि वह भविष्य में पंजाबी की प्रमुख शख्सियतों की बायोग्राफी लिखने की योजना बना रहे हैं। साथ ही वह समाज के लिए बढ़िया कार्य करने वाले लोगों पर भी नॉवल लिखेंगे।