लापरवाही की हद : थैलेसीमिया से पीड़ित 11 साल के बच्चे को चढ़ा दिया एचआईवी संक्रमित खून
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बठिंडा सिविल अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक कर्मियों ने एक बार फिर थैलेसीमिया पीड़ित ग्यारह वर्षीय बच्चे को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ा दिया। पीड़ित बच्चे के परिजनों ने सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉक्टर मनिंदरपाल सिंह को शिकायत देकर आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने पर स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर डॉक्टर मनजीत सिंह को जांच के आदेश दिए हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले भी जुलाई में महिला और अक्तूबर में बच्चे को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले सामने आ चुके हैं। अब तीसरा मामला सामने आने से अस्पताल प्रशासन और सरकार पर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। वहीं परिवार ने इस मामले की डीसी से भी शिकायत की है।
थाना कैंट के तहत आते एक गांव निवासी दिहाड़ीदार व्यक्ति का ग्यारह वर्षीय बच्चा जन्म के एक वर्ष बाद थैलेसीमिया से पीड़ित है। उसे हर पंद्रह दिन बाद रक्त चढ़वाने के लिए ब्लड बैंक से रक्त लेते थे। इस बार सात नवंबर को जब पीड़ित बच्चे के परिजनों ने ब्लड बैंक से रक्त लेकर उसे चढ़वाया तो नौ नवंबर को पता चला कि जो रक्त उनके बच्चे को चढ़ाया गया है, वह एचआईवी संक्रमित है।
इसका पता लगते ही पीड़ित बच्चे के पिता ने बुधवार को सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉक्टर मनिंदरपाल सिंह को लिखित शिकायत दी। जिसके बाद एसएमओ ने जांच के लिए डॉक्टर गुरमेल सिंह, डॉक्टर सतीश और डॉक्टर मनिंदरपाल कौर की एक कमेटी गठित कर दी। एसएमओ की ओर से गठित कमेटी ने गुरुवार को पूरा दिन जांच की और मामले से जुडे़ ब्लड बैंक कर्मियों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा कमेटी ने पीड़ित परिवार को भी बुलाया था लेकिन गुरुवार देर शाम तक परिजनों के बयान दर्ज नहीं किए गए।
पीड़ित परिवार को जाने की जल्दी थी
एसएमओ डॉक्टर मनिंदरपाल सिंह का कहना है कि पीड़ित परिवार को जाने की जल्दी थी, जिस कारण उनके बयान दर्ज नहीं किए गए। बच्चे के परिजनों को शुक्रवार को फिर बुलाया है। सिविल सर्जन डॉक्टर अमरीक सिंह संधू का कहना था कि पूरे मामले की जांच के लिए तीन डॉक्टरों की कमेटी गठित की गई है। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री बलवीर सिंह सिद्धू ने कहा कि जांच के आदेश दे दिए हैं। किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
जिगर के टुकड़े से जरूरी कुछ नहीं
वहीं इस संबंध में पीड़ित बच्चे के पिता ने आरोप लगाया कि ब्लड बैंक कर्मियों की लापरवाही के कारण बच्चा एचआईवी संक्रमित हुआ है। जब उसे पता चला तो उसने नौ नवंबर को ही एसएमओ डॉक्टर मनिंदरपाल सिंह को लिखित शिकायत दी। जिसके बाद बुधवार को सिविल अस्पताल से फोन आया कि गुरुवार को वह बयान दर्ज करवाने आएं।
बच्चे के पिता का आरोप है कि गुरुवार को जब वह सिविल अस्पताल में बयान दर्ज करवाने पहुंचा तो दो घंटे तक बाहर बैठाए रखा और किसी ने बयान दर्ज करने को नहीं बुलाया। जिसके बाद वह मायूस होकर लौट गया। उन्हें घर जाने की कोई जल्दी नहीं थी। अपने जिगर के टुकड़े से जरूरी कुछ नहीं है।
डॉक्टर समेत दो हो चुके हैं बर्खास्त
बता दें कि एक अक्तूबर को भी ब्लड बैंक के स्टाफ की आपसी रंजिश के कारण थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया था। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी डॉक्टर समेत दो को बर्खास्त कर दिया था। जबकि सीनियर लैब टेक्नीशियन को सस्पेंड कर केस दर्ज किया है।