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दृष्टिहीन युवक को क्लर्क पद के एग्जाम में बैठने से रोका, नोटिस जारी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 01 Jul 2016 12:30 AM IST
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हाईकोर्ट
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एक दृष्टिहीन आवेदक को क्लर्क पद के लिए हुई लिखित परीक्षा में बैठने से रोके जाने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन के साथ-साथ निदेशक हायर एजुकेशन और सोसाइटी फार सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट आफ स्टाफ इन द सबॉर्डिनेट कोर्ट्स (एसएसएससी) को चार जुलाई के लिए नोटिस जारी किया है।
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जस्टिस एम. जयपॉल की बेंच के समक्ष वीरवार को पेश दृष्टिहीन युवक सोमनाथ की याचिका में कहा गया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने हायर एजुकेशन विभाग के मार्फत अन्य विभागों में नियमित क्लर्क और स्टेनो टाइपिस्ट के पदों के लिए आवेदन मांगे थे। याचिकाकर्ता ने इन पदों के लिए विकलांग कोटे के तहत आवेदन किया था।
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गत 5 जून को एसएसएससी ने भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन किया। याचिकाकर्ता के वकील लवनीत ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि नियम के अनुसार लिखित परीक्षा के लिए दृष्टिहीन सोमनाथ को अपने साथ एक लेखक ले जाने की छूट है, जो परीक्षार्थी की ओर से बताए गए उत्तर पेपर पर लिखेगा। याचिका में बताया गया कि जब सोमनाथ परीक्षा देने पहुंचा तो उससे पूछा गया कि उसने दृष्टिहीन होने के नाते परीक्षा में लेखक ले जाने की आज्ञा पहले क्यों नहीं मांगी।
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इस पर सोमनाथ ने संबंधित अधिकारियों को बताया कि लेखक साथ ले जाने संबंधी पहले आज्ञा लिए जाने के बारे में न तो उसे बताया गया और न ही भर्ती संबंधी विज्ञापन में ऐसा कोई दिशानिर्देश लिखा गया था। बावजूद इसके अधिकारियों ने सोमनाथ को परीक्षा में बैठने से रोक दिया।
याची के वकील ने कोर्ट को बताया कि सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण विभाग की ओर से साल 2013 को जारी नियमों के अनुसार दृष्टिहीन परीक्षार्थी अपने साथ अपनी पसंद का लेखक परीक्षा में साथ ले जा सकता है या फिर वह परीक्षा केंद्र पहुंचकर अपने लिए लेखक की मांग कर सकता है, बशर्ते कि लेखक खुद उस परीक्षा को न दे रहा हो।
एडवोकेट लवनीत ठाकुर ने कोर्ट से कहा कि तय नियमों के बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन ने न तो याचिकाकर्ता को अपने लेखक के साथ परीक्षा में बैठने दिया और न ही अपनी ओर से उसे लेखक उपलब्ध करवाया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन और परीक्षा केंद्र के स्टाफ ने याची से अधिकारों का हनन करने के साथ ही उसे मिल रहे रोजगार के अवसर को भी छीन लिया है।