फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Blind IAS officer transferred for second time in 24 hours

Chandigarh News: नेत्रहीन आईएएस अधिकारी का 24 घंटे में दूसरी बार तबादला, अब पुडा के सीए बने अंकुरजीत

Wed, 25 Sep 2024 10:40 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 25 Sep 2024 10:40 PM IST
विज्ञापन
Blind IAS officer transferred for second time in 24 hours
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

जालंधर। जालंधर में सहायक कमिश्नर तैनात होने वाले नेत्रहीन आईएएस अंकुर का तबादला 24 घंटे के भीतर निगम से पुडा में कर दिया गया है। बुधवार सुबह उन्होंने नगर निगम में जॉइन किया ही था कि कुछ देर बार उनका तबादला बतौर सीए पुडा कर दिया गया।
अंकुर देख नहीं सकते। वे जब स्कूल में थे, तब उनकी आंखों की रोशनी बचपन में धीरे-धीरे खोने लगी थी और आखिरकार एक वक्त ऐसा आया कि उन्हें दिखना बंद हो गया। इन हालातों में भी उन्होंने धैर्य नहीं खोयाद्ध वे परिस्थतियों से लड़ते रहे। इसका नतीजा है कि आज उन्होंने देश की सबसे प्रतिष्ठित और मुश्किल सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर ली। अंकुर ने साल 2017 में सिविल सेवा की परीक्षा में 414 रैंक हासिल की है।
विज्ञापन

जिंदगी में हार न मानने वाले कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो पहले ही प्रयास में और बेहद कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर लेते हैं। इन्हीं होनहारों में से एक हैं अंकुरजीत सिंह, जिसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाकर एक मिसाल पेश की है। अंकुरजीत सिंह हरियाणा के यमुनानगर के गांव रसूलपुर के निवासी हैं। यहां के सरकारी स्कूल से उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई अंकुरजीत ने जिला मुख्यालय के स्कूल से की। रोजाना स्कूल जाने के लिए अंकुरजीत करीब 40 किमी का सफर तय करते थे। अंकुरजीत बचपन से ही पढ़ाई में काफी मेधावी थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

मां बोलकर करवाती थीं पढ़ाई
अंकुरजीत की मम्मी का कहना है कि जब उन्हें अपने बच्चे की समस्या का पता चला तो जो भी वह स्कूल से पढ़कर आता था तो रात को उसे पढ़कर सुनाती थी। इस तरह से वे सुनकर पढ़ाई करता था। अंकुर की दसवीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से ही हुई है। जब गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे खेलते और मस्ती करते थे, तब अंकुरजीत मां के मदद से सारी किताबें पहले ही पढ़ लेते थे।
शिक्षिका ने किया प्रेरित
अंकुर ने बताया कि मेरी 12वीं की परीक्षा के दौरान कुछ लोग हमारे स्कूल आए और उन्होंने देश की इन परीक्षाओं के बारे में बताया। मेरी एक शिक्षिका ने मुझे आईआईटी में दाखिले के लिए मोटिवेट किया, जिसके बाद मैंने उन्हें मना कर दिया। हालांकि, उनकी कोशिश के बाद मैं मान गया कि मैं जेईई की तैयारी करूंगा। अंकुरजीत जब 12वीं में पढ़ते थे तो उनकी टीचर ने भी कहा कि तुम आईआईटी का फॉर्म क्यों नहीं भर लेते। अंकुरजीत ने फॉर्म भरा और उनका एडमिशन आईआईटी रुड़की में हो गया था। अंकुरजीत के आईआईटी में कई दोस्त यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे,इसलिए उन्होंने भी तैयारी शुरू कर दी।

स्क्रीन रीडर की मदद से पढ़ने लगे किताबें
अंकुरजीत बताते हैं कि आईआईटी ने उन्हें टेक्नॉलॉजी के काफी करीब ला दिया था। जहां कहीं उन्हें पढ़ने-समझने में समस्या होती थी तो वह स्क्रीन रीडर की मदद से किताबें पढ़ने लगे। इसके अलावा भी अगर वे कहीं फंसते थे तो वे दोस्तों से मदद लेते थे। अंकुरजीत की मेहनत रंग लाई और साल 2017 में उन्हें सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता मिल गई। बीटेक की पढ़ाई के दौरान भी अंकुर ने यूपीएससी की परीक्षा दी थी लेकिन तब वे इस परीक्षा को क्रैक नहीं कर पाए थे, लेकिन उन्होंने दूसरे प्रयास में ही एग्जाम में 414वीं रैंक हासिल कर ली।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed