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हरियाणा: रेमडेसिविर के बाद ब्लैक फंगस के इंजेक्शन की कालाबाजारी, दो हजार रुपये कीमत...छह हजार में मिल रहा

Thu, 13 May 2021 09:36 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Thu, 13 May 2021 09:36 PM IST
सार

पीजीआईएमएस रोहतक का ईएनटी विभाग कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के लिए ब्लैक फंगस से लड़ रहा है। यहां वार्ड में फिलहाल 6 मरीज उपचाराधीन हैं। इसमें से दो मरीजों के ऑपरेशन के लिए कोरोना रिपोर्ट का इंतजार है। ईएनटी विभाग की विभिन्न यूनिटों की टीमें मरीजों का उपचार कर उन्हें ब्लैक फंगस से बचाने का प्रयास कर रही है।

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Black marketing of black fungus injection start in Haryana
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना से लोगों को अभी छुटकारा भी नहीं मिला था कि ब्लैक फंगस ने आफत खड़ी कर दी है। संक्रमण से ठीक होने के बाद मरीज ब्लैक फंगस का शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर मरीजों को बचाने के लिए इंजेक्शन मंगवा रहे हैं लेकिन ये इंजेक्शन बाजार में दोगुना से अधिक कीमत में मिल रहे हैं। इस इंजेक्शन का नाम 'लीपोजोमल एम्फोटेरिसिन-बी' है। ऐसे में मरीजों के साथ परिजनों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है।

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पीजीआईएमएस रोहतक का ईएनटी विभाग कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के लिए ब्लैक फंगस से लड़ रहा है। यहां वार्ड में फिलहाल 6 मरीज उपचाराधीन हैं। इसमें से दो मरीजों के ऑपरेशन के लिए कोरोना रिपोर्ट का इंतजार है। ईएनटी विभाग की विभिन्न यूनिटों की टीमें मरीजों का उपचार कर उन्हें ब्लैक फंगस से बचाने का प्रयास कर रही है। विभाग के प्रोफेसर डॉ. रमन वडेरा ने बताया कि यदि मरीज समय पर आ जाए तो उसे अधिक समस्या होने से बचाया जा सकता है। विभाग मरीज की जरूरत के हिसाब से उपचार कर रहा है और ऑपरेशन भी कर रहा है।
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मरीजों के परिजनों से बातचीत
मां को पहले कोरोना हुआ था, अब ठीक हैं लेकिन ब्लैक फंगस हो गया है। 15 दिन पहले मां की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी। शुगर की समस्या पहले से थी, जब आंखों पर सूजन आई तो सिटी स्कैन जांच करवाई। इसके बाद बीमारी का पता चला। अब मां का ऑपरेशन होना है। - प्रवीण, डिजाइन इंजीनियर।

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मरीज की हालत ठीक नहीं हैं, उसकी आंखें नहीं खुल रही हैं। पहले कोरोना हुआ था। ठीक होने पर समस्या हुई तो निजी अस्पताल में जांच कराई तो पता चला कि ब्लैक फंगस है। वहां इएनटी के डॉक्टर से 50 हजार में ऑपरेशन करने की बात हुई लेकिन उनके व्यवहार के चलते ऑपरेशन नहीं कराया। पीजीआईएमएस के डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया और नाक से फंगस निकाला। अब समस्या है कि मरीज को पैरालाइज की शिकायत हो गई है। मरीज को दिन में पांच इंजेक्शन लगते हैं, इनकी कीमत सवा दो हजार है। लेकिन बाजार में मिलता छह हजार रुपये में है। 50 हजार रुपये के इंजेक्शन लगवा चुका हूं। - सतीश पहलवान, जसिया।

ब्लैक फंगस पहले ईएनटी विभाग के पास आता है। यह बीमारी शुगर, कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों को होने की संभावना रहती है। यह सामान्य बीमारी नहीं है, इस समय कोरोना के चलते इस पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। जब ब्लैक फंगस नाक व आंख को क्षतिग्रस्त करता हुआ दिमाग तक पहुंचता है तब मरीज के जीवन को खतरा हो जाता है। नेत्र विभाग में पिछले दो दिनों तक ऐसा कोई केस नहीं आया है। - डॉ. जितेंद्र फौगाट, एसोसिएट प्रोफेसर, नेत्र विभाग, पीजीआईएमएस।

इंजेक्शन की कमी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि केमिस्ट इसे ब्लैक करें। यदि किसी को एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचा है तो उसकी शिकायत हमें दें। हम नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करेंगे। - मंदीप मान, ड्रग कंट्रोलर।

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