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Chandigarh News: भाजपा की मान मनौव्वल बेकार, जारी है विज की तकरार
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खुद को बता रहे पार्टी का सच्चा सिपाही, मनोहर पर साध रहे लगातार निशाना
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अपनी बेबाकी के लिए मशहूर हरियाणा के पूर्व गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज नए मंत्रिमंडल के गठन के बाद से ही मुखर हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की मान मनौव्वल के बावजूद विज के तेवर बरकरार हैं। विज एक के बाद एक लगातार तीर छोड़ रहे हैं। खासकर उनके निशाने पर मनोहर लाल हैं। खुद को पार्टी का सच्चा सिपाही बताते हुए वह पार्टी की भक्ति कर रहे हैं, लेकिन न तो सरकार में शामिल हो रहे हैं और न पार्टी की बैठकों में शिरकत कर रहे हैं। विज की नाराजगी और उनके बयानों से भाजपा प्रदेश संगठन व हाईकमान भी असहज हो रहा है।
हरियाणा में 12 मार्च को मनोहर लाल के विधायक दल की बैठक बुलाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से ही विज नाराज हैं। इसके बाद से विज लगातार मनोहर लाल पर तीर छोड़ रहे हैं। अपने ताजा बयान में विज ने कहा कि उन्होंने कभी कुछ बनने की सोची नहीं। मैंने कभी मंत्री बनने की भी नहीं सोची, लेकिन 2014 और 2019 में भाजपा की सरकार बनने पर लोग पसंद का विभाग लेने के लिए एक-एक महीने तक दिल्ली बैठे रहे। मनोहर लाल के अनिल विज नाराज होते रहते हैं के बयान पर उन्होंने कहा कि मुझे शीर्ष नेतृत्व खूब समझता है। मनोहर लाल के अपने दायरे हैं। उनके अपने जानकारी देने वाले लोग हैं, वे उनको क्या जानकारी देते हैं, क्या नहीं, मुझे मालूम नहीं। वो क्या कहते हैं, किस आधार पर कहते हैं, मुझे मालूम नहीं।
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मनोहर के बाद भाजपा के बड़े नेता हैं विज
मनोहर लाल के बाद भाजपा विज भाजपा के दूसरे बड़े नेता हैं। विज का अंबाला में खासा प्रभाव है। वह छह बार से यहां से विधायक हैं। दूसरा प्रदेशभर में भी विज के भाजपा के अलावा समर्थक हैं। सरकार के मंत्रियों में विज ही पहले और आखिरी ऐसे मंत्री हैं, जिन्होंने अंबाला ही नहीं प्रदेशभर के लोगों के लिए खुले दरबार लगाए। उनके दरबारों में खासी भीड़ उमड़ती थी और उन शिकायतों पर विज ने पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई भी की है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अपनी बेबाकी के लिए मशहूर हरियाणा के पूर्व गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज नए मंत्रिमंडल के गठन के बाद से ही मुखर हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की मान मनौव्वल के बावजूद विज के तेवर बरकरार हैं। विज एक के बाद एक लगातार तीर छोड़ रहे हैं। खासकर उनके निशाने पर मनोहर लाल हैं। खुद को पार्टी का सच्चा सिपाही बताते हुए वह पार्टी की भक्ति कर रहे हैं, लेकिन न तो सरकार में शामिल हो रहे हैं और न पार्टी की बैठकों में शिरकत कर रहे हैं। विज की नाराजगी और उनके बयानों से भाजपा प्रदेश संगठन व हाईकमान भी असहज हो रहा है।
हरियाणा में 12 मार्च को मनोहर लाल के विधायक दल की बैठक बुलाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से ही विज नाराज हैं। इसके बाद से विज लगातार मनोहर लाल पर तीर छोड़ रहे हैं। अपने ताजा बयान में विज ने कहा कि उन्होंने कभी कुछ बनने की सोची नहीं। मैंने कभी मंत्री बनने की भी नहीं सोची, लेकिन 2014 और 2019 में भाजपा की सरकार बनने पर लोग पसंद का विभाग लेने के लिए एक-एक महीने तक दिल्ली बैठे रहे। मनोहर लाल के अनिल विज नाराज होते रहते हैं के बयान पर उन्होंने कहा कि मुझे शीर्ष नेतृत्व खूब समझता है। मनोहर लाल के अपने दायरे हैं। उनके अपने जानकारी देने वाले लोग हैं, वे उनको क्या जानकारी देते हैं, क्या नहीं, मुझे मालूम नहीं। वो क्या कहते हैं, किस आधार पर कहते हैं, मुझे मालूम नहीं।
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मनोहर के बाद भाजपा के बड़े नेता हैं विज
मनोहर लाल के बाद भाजपा विज भाजपा के दूसरे बड़े नेता हैं। विज का अंबाला में खासा प्रभाव है। वह छह बार से यहां से विधायक हैं। दूसरा प्रदेशभर में भी विज के भाजपा के अलावा समर्थक हैं। सरकार के मंत्रियों में विज ही पहले और आखिरी ऐसे मंत्री हैं, जिन्होंने अंबाला ही नहीं प्रदेशभर के लोगों के लिए खुले दरबार लगाए। उनके दरबारों में खासी भीड़ उमड़ती थी और उन शिकायतों पर विज ने पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई भी की है।
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