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Chandigarh News: शिअद के बिखराव पर भाजपा का कूटनीतिक दांव, हरप्रीत का पलटवार

Wed, 13 Aug 2025 10:03 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 13 Aug 2025 10:03 PM IST
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BJP's diplomatic bet on the disintegration of SAD, Harpreet's counter attack
अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल के बिखराव पर भाजपा ने कूटनीतिक दांव खेला है। साल 2027 में विधानसभा चुनाव से पहले सूबे में गठबंधन को लेकर क्या सियासी समीकरण बनेंगे, यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन भाजपा ने अकाली कार्यकर्ताओं से उसी पार्टी से जुड़ने का आह्वान किया है, जो अकाल तख्त के हुक्म से बनी है। भाजपा का इशारा शिअद से अलग नई गठित हुई पंथक पार्टी की ओर है।
दूसरी ओर, टकसाली अकाली भी नई पंथक पार्टी के साथ चलने की तैयारी कर रहे हैं। यही स्थिति रही तो आगामी विस चुनाव से पहले सियासी भंवर में फंसी शिअद के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
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दिल्ली में भाजपा के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा कहते हैं कि नई पंथक पार्टी श्री अकाल तख्त साहिब के हुक्म से ही बनी है और सिख समुदाय के लोगों के लिए तख्त का हर हुक्म मानना अनिवार्य होता है। लिहाजा अकाली कार्यकर्ताओं को भी नई गठित पंथक पार्टी से ही जुड़ना चाहिए। हालांकि भाजपा अभी पंजाब में किसी के साथ गठबंधन न करने की बात कह रही है।
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हम पंथक पार्टी के साथ चलेंगे : सुखदेव सिंह गोबिंदगढ़
वरिष्ठ टकसाली अकाली नेता सुखदेव सिंह गोबिंदगढ़ ने कहा कि वे और उनके सभी समर्थक उसी पंथक पार्टी के साथ चलेंगे, जिसका गठन श्री अकाल तख्त साहिब जी के हुक्म से हुआ है। हमारा पूरा समर्थन नई पार्टी को रहेगा। इस सियासी घटनाक्रम के बाद शिअद को अब आत्ममंथन की जरूरत है। वहीं शिअद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि जिन लोगों ने श्री अकाल तख्त साहिब की अगुवाई कर ली हो, उन्हें राजनीति शोभा नहीं देती।


जत्थेदार साहिबान पहले भी बन चुके शिअद के प्रधान : ज्ञानी हरप्रीत सिंह
पंथक पार्टी के नवनियुक्त प्रधान व पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के अनुसार श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार साहिबान पहले भी जत्थेदार की सेवाएं देने के बाद शिरोमणि अकाली दल के प्रधान बने हैं। जत्थेदार तेजा सिंह, गुरमुख सिंह, जत्थेदार उधम सिंह, जत्थेदार अत्तर सिंह व जत्थेदार मोहन सिंह इत्यादि ऐसे कई उदाहरण हैं, जिन्हें शिअद में अहम जिम्मेदारियां मिली थीं। यह कहना उचित नहीं है कि जत्थेदार साहिबानों का सियासत में कोई काम नहीं होता।
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