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जाट आरक्षण को लेकर भाजपा सांसद की कड़ी चेतावनी

Mon, 06 Apr 2015 04:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 06 Apr 2015 04:46 PM IST
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bjp mp warns government against jat reservation

जाट आरक्षण का विरोध कर रहे कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद राजकुमार सैनी ने कहा है कि अगर जाट सरकार पर दबाव डालकर आरक्षण हासिल कर लेते हैं, तो इससे देश में विद्रोह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

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उन्होंने कहा कि जाट सिर्फ दबाव बनाना चाहते हैं, अगर ऐसा हुआ तो लोकतंत्र और कोर्ट के क्या मायने रह जाएंगे। सैनी ने इससे पहले चेतावनी दी थी कि यदि ओबीसी कोटे से जाटों को आरक्षण दिया गया तो वे सांसद पद से इस्तीफा दे देंगे।
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सैनी ने फोन पर हुई बातचीत में कहा कि सोनीपत के गोहाना में रविवार को पिछड़े वर्ग के एक समारोह में कई वक्ताओं ने भी कहा है कि आरक्षण के लिए जाट सरकार पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह नहीं भूलना चाहिए कि पिछड़े वर्ग के लोगों ने भी चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्थन दिया था।
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राजकुमार सैनी ने कहा कि बीपी मंडल समेत समय-समय पर गठित किए गए विभिन्न आयोगों ने भी कभी जाटों को शैक्षिक, राजनीतिक या आर्थिक पिछड़ेपन में ओबीसी के समकक्ष नहीं माना है।

उन्होंने कहा, ‘1990 के मध्य में हरियाणा में बंसीलाल सरकार के समय के दौरान भी, जब मुझे पिछड़े वर्ग के साथ अन्याय होता महसूस होता था, तो मैं आवाज उठाता था। मैं राजनीति में निजी स्वार्थ साधने के लिए नहीं आया हूं। सत्ता में बने रहने का मुझे कोई लालच नहीं है और मैं पिछड़े वर्ग के अधिकारों के लिए इस्तीफा दे सकता हूं।’

'ओबीसी को आरक्षण का लाभ ही क्या मिलेगा'

bjp mp warns government against jat reservation

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले महीने दिए अपने फैसले में नौ राज्यों में जाटों को ओबीसी की सूची से जोड़े जाने संबंधी अधिसूचना को रद्द करने का उल्लेख करते हुए सैनी ने कहा कि यदि निर्धारित कोटे में कमी की जा सकती है तो ओबीसी को आरक्षण का लाभ ही क्या मिलेगा।

उन्होंने कहा कि ऐसे तो कोई भी ओबीसी के आरक्षण को कम कर देगा। सैनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद जाट दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि एनडीए सरकार ने इस मामले में कहा है कि सरकार को संविधान के तहत यह अधिकार है कि वह जाटों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की मुख्य सूची में शामिल कर सकती है। साथ ही सरकार सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की भी समीक्षा कर सकती है, जिसमें जाटों को आरक्षण रद्द कर दिया गया है।

हाल ही में जाट प्रतिनिधिमंडल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के अगले ही दिन केंद्र सरकार ने इस मामले में अदालत का दरवाजा भी खटखटा दिया है। मोदी ने भी जाट नेताओं के भरोसा दिलाया है कि उनकी सरकार इस मसले का विधिसम्मत हल निकालेगी।

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