हरियाणा में सीएम के खिलाफ बगावत का बिगुल, अपने ही विधायकों ने खड़ी की मुश्किलें
हरियाणा भाजपा अपनी पूर्ण बहुमत की पहली सरकार के कार्यकाल में दूसरी बड़ी बगावत का सामना करने जा रही है। पहले भी अहीरवाल सहित जीटी रोड बेल्ट और केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र चौधरी के समर्थक भाजपा विधायकों ने ही सरकार के खिलाफ बगावती सुर अपनाए थे। इस बार भी अनदेखी को लेकर अहीरवाल से ही आवाज बुलंद हुई है।
पिछली बार असंतुष्ट विधायकों, जिन्हें बाद में सुधारक विधायक का नाम दिया गया, की अगुवाई गुरुग्राम से भाजपा विधायक उमेश अग्रवाल कर रहे थे। जबकि, सुधारक विधायकों के खेमे का चेयरमैन रेवाड़ी से विधायक रणधीर कापड़ीवास को बनाया गया था। उस समय असंतुष्ट भाजपा विधायकों उमेश अग्रवाल, रणधीर कापड़ीवास, मूल चंद शर्मा, नरेश कौशिक, प्रेमलता, सुखविंद्र मांढी, संतोष सारवान सहित लगभग डेढ़ दर्जन विधायकों ने काम न होने का मुद्दा उठाकर मोर्चा खोला था।
सुधारक विधायकों ने सीधे-सीधे सरकार यहां तक कि मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। सुधारक विधायकों ने खुलेआम बैठकें कर अपनी रणनीति को अंजाम दिया, जिसके बाद मामला भाजपा हाईकमान के पास पहुंचा। पार्टी प्रभारी डॉ. अनिल जैन ने मार्च 2017 में बगावती सुर बढ़ते देख दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में विधायक दल की बैठक बुलाई। जिसमें सुधारक विधायकों को सुना गया।
इसके बाद सीएम सहित मंत्रियों से भी बैठकों का दौर चला था। उसके बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हस्तक्षेप पर मामला शांत हुआ और सुधारक विधायकों के तेवर ढीले पड़ गए। उमेश अग्रवाल को प्रदेश भाजपा का मीडिया प्रभारी बना दिया। मगर, इस बार बगावती सुर अपनाने वाले विधायकों की बागडोर बिमला यादव ने संभाली है।
जिससे भाजपा की विपक्ष की घेरने की कोशिशें धरी की धरी रह जाने वाली हैं। निगम चुनावों में बंपर जीत के बाद उत्साह से लबरेज भाजपा जहां चुनावी माहौल बनाने में जुट गई थी, वहीं अब उसकी सारी ऊर्जा अपने कुनबे को संभालने में लगेगी। भाजपा सरकार अब विधानसभा में भी विपक्ष पर हमलावर नहीं हो पाएगी। कांग्रेस-इनेलो भी अब बगावत को लेकर भाजपा पर जवाबी हमला बोलने से गुरेज नहीं करेंगी।