{"_id":"5a57c54b4f1c1bf3188b4748","slug":"bjp-leader-harmohan-dhawan-wrote-a-letter-to-pm-modi-and-amit-shah","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एक बार फिर 'बागी' हुए हरमोहन धवन, पीएम मोदी-शाह को लिखा लेटर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक बार फिर 'बागी' हुए हरमोहन धवन, पीएम मोदी-शाह को लिखा लेटर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 12 Jan 2018 09:35 AM IST
विज्ञापन
हरमोहन धवन
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा में बगावत थमने का नाम नहीं ले रही। मेयर चुनाव के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन ने पार्टी प्रभारी प्रभात झा एक पत्र लिखा है। इससे पार्टी में घमासान मच गया है।
इस चिट्ठी की प्रति भाजपा के केंद्रीय नेताओं को भी भेजी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पत्र में लिखा है कि मेरी पहचान भाजपा से नहीं, जनता से है। अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत मिलने के बाद धवन ने प्रभात झा को पार्टी से निकालने तक की चुनौती दे डाली है। दूसरी ओर, पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि अगर पार्टी उन्हें निकालने से मजबूत होती है तो बड़ी खुशी होगी।
नगर निगम चुनाव में बगावत के बाद से नई-नई कहानियां सामने आने लगी हैं। चुनाव से पहले पहाड़ों पर जाने की प्लानिंग और फिर विपक्षी दल कांग्रेस से मिलकर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को हराने की योजना। हरमोहन धवन ने प्रभात झा को लिखे पत्र में प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन के खिलाफ जमकर जहर उगला है। चिट्ठी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल, सांसद किरण खेर, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और संगठन मंत्री दिनेश कुमार को भी भेजी है।
विज्ञापन
कभी भी हो सकते हैं पार्टी से बाहर
पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन की चिट्ठी से पार्टी हाईकमान काफी नाराज है। पार्टी कभी भी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा सकती है। क्योंकि भाजपा में ऐसी बातें बर्दाश्त नहीं की जातीं।
विज्ञापन
इस चिट्ठी की प्रति भाजपा के केंद्रीय नेताओं को भी भेजी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पत्र में लिखा है कि मेरी पहचान भाजपा से नहीं, जनता से है। अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत मिलने के बाद धवन ने प्रभात झा को पार्टी से निकालने तक की चुनौती दे डाली है। दूसरी ओर, पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि अगर पार्टी उन्हें निकालने से मजबूत होती है तो बड़ी खुशी होगी।
विज्ञापन
नगर निगम चुनाव में बगावत के बाद से नई-नई कहानियां सामने आने लगी हैं। चुनाव से पहले पहाड़ों पर जाने की प्लानिंग और फिर विपक्षी दल कांग्रेस से मिलकर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को हराने की योजना। हरमोहन धवन ने प्रभात झा को लिखे पत्र में प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन के खिलाफ जमकर जहर उगला है। चिट्ठी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल, सांसद किरण खेर, पूर्व सांसद सत्यपाल जैन और संगठन मंत्री दिनेश कुमार को भी भेजी है।
विज्ञापन
कभी भी हो सकते हैं पार्टी से बाहर
पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन की चिट्ठी से पार्टी हाईकमान काफी नाराज है। पार्टी कभी भी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा सकती है। क्योंकि भाजपा में ऐसी बातें बर्दाश्त नहीं की जातीं।
चिट्ठी के अंश...
Harmohan Dhawan
चिट्ठी के अंश...
नमस्कार,
-मैंने आपका एक अखबार में दिया बयान पढ़ा है। इसमें मुझ पर कई टिप्पणियां और आरोप लगाए हैं। ये बिल्कुल ही निराधार हैं। झा साहब बहुत अच्छा होता अगर आप स्पष्टीकरण मांग लेते। संजय टंडन शुरू से ही पार्टी नेताओं को बदनाम कर उनके खिलाफ शिकायतें और षड्यंत्र रचते रहे हैं। कुछ उदाहरण दे रहा हूं...
पहला
2011 में कारपोरेशन चुनाव से पहले श्याम जाजू की अध्यक्षता में एक मीटिंग हुई थी। इसमे सर्वसम्मति से सभी वार्ड प्रत्याशियों का चयन हुआ। अगले दिन अखबारों में छपा, प्रत्याशियों ने खुशी में ढोल नगाड़े बजाए और लड्डू बांटे। दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि संजय टंडन ने बिना किसी को विश्वास में लिए मेरे पांच समर्थकों के टिकट काट दिए थे, नतीजा हम पार्टी चुनाव हार गए, लेकिन संजय टंडन पर कोई एक्शन नहीं लिया गया।
दूसरा
पूर्व सांसद सत्यपाल जैन की अनुपस्थिति में उनके दफ्तर से सारा सामान बाहर फेंक दिया गया। इसमें उनकी माता का फोटो भी था। सत्यपाल जैन ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन संजय टंडन पर कोई एक्शन नहीं लिया गया।
तीसरा
संजय टंडन ने अपने मीडिया प्रभारी से फेसबुक पर सांसद किरण खेर के खिलाफ एक पोस्ट डलवाई और उन्हें बदनाम करने की कोशिश हुई। इसे अखबार में भी छपवाया। बाद में फेसबुक से हटा भी दिया, लेकिन जो नुकसान होना था वह हुआ। आज तक कोई एक्शन नहीं हुआ।
चौथा
2015 में हीरा नेगी को मेयर के चुनाव के लिए खड़ा किया गया। हीरा नेगी को भी हरवाया गया, लेकिन आज तक संजय टंडन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पांचवां
- 2017 में वित्त एवं अनुबंध समिति के चुनाव में हीरा नेगी को बहुमत होने के बावजूद हरा दिया गया, लेकिन संजय टंडन पर एक्शन नहीं हुआ।
छठा
-जहां तक मेरे ऊपर नगर निगम चुनाव में पार्टी विरोधी काम करने का आरोप है। चुनाव से पहले कोई ऐसी मीटिंग नहीं बुलाई गई, जिसमें पार्टी नेताओं को विभिन्न वार्डों की जिम्मेदारी सौंपी गई हो। इसके बावजूद जहां कहीं बुलाया गया, वहां चुनाव प्रचार में गया और प्रत्याशियों की जीत हुई।
सातवां
2014 के लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ से टिकट मांगा था, लेकिन किरण खेर को मिली। इसका विरोध हुआ, मुझे भी दुख था, लेकिन किरण खेर की हर तरह से मदद की। इस बारे में अजय जामवाल और किरण खेर से पूछा जा सकता है कि किरण खेर को जिताने में किसका क्या रोल रहा।
आठवां
-पिछले दिनों हुए मेयर चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ किसके इशारे पर आशा जसवाल ने नामांकन किया। आठ जनवरी को तमाम समाचार पत्रों के हेडलाइन में माफीनामा छपा। इससे पार्टी की छवि धूमिल हुई।
नमस्कार,
-मैंने आपका एक अखबार में दिया बयान पढ़ा है। इसमें मुझ पर कई टिप्पणियां और आरोप लगाए हैं। ये बिल्कुल ही निराधार हैं। झा साहब बहुत अच्छा होता अगर आप स्पष्टीकरण मांग लेते। संजय टंडन शुरू से ही पार्टी नेताओं को बदनाम कर उनके खिलाफ शिकायतें और षड्यंत्र रचते रहे हैं। कुछ उदाहरण दे रहा हूं...
पहला
2011 में कारपोरेशन चुनाव से पहले श्याम जाजू की अध्यक्षता में एक मीटिंग हुई थी। इसमे सर्वसम्मति से सभी वार्ड प्रत्याशियों का चयन हुआ। अगले दिन अखबारों में छपा, प्रत्याशियों ने खुशी में ढोल नगाड़े बजाए और लड्डू बांटे। दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि संजय टंडन ने बिना किसी को विश्वास में लिए मेरे पांच समर्थकों के टिकट काट दिए थे, नतीजा हम पार्टी चुनाव हार गए, लेकिन संजय टंडन पर कोई एक्शन नहीं लिया गया।
दूसरा
पूर्व सांसद सत्यपाल जैन की अनुपस्थिति में उनके दफ्तर से सारा सामान बाहर फेंक दिया गया। इसमें उनकी माता का फोटो भी था। सत्यपाल जैन ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन संजय टंडन पर कोई एक्शन नहीं लिया गया।
तीसरा
संजय टंडन ने अपने मीडिया प्रभारी से फेसबुक पर सांसद किरण खेर के खिलाफ एक पोस्ट डलवाई और उन्हें बदनाम करने की कोशिश हुई। इसे अखबार में भी छपवाया। बाद में फेसबुक से हटा भी दिया, लेकिन जो नुकसान होना था वह हुआ। आज तक कोई एक्शन नहीं हुआ।
चौथा
2015 में हीरा नेगी को मेयर के चुनाव के लिए खड़ा किया गया। हीरा नेगी को भी हरवाया गया, लेकिन आज तक संजय टंडन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पांचवां
- 2017 में वित्त एवं अनुबंध समिति के चुनाव में हीरा नेगी को बहुमत होने के बावजूद हरा दिया गया, लेकिन संजय टंडन पर एक्शन नहीं हुआ।
छठा
-जहां तक मेरे ऊपर नगर निगम चुनाव में पार्टी विरोधी काम करने का आरोप है। चुनाव से पहले कोई ऐसी मीटिंग नहीं बुलाई गई, जिसमें पार्टी नेताओं को विभिन्न वार्डों की जिम्मेदारी सौंपी गई हो। इसके बावजूद जहां कहीं बुलाया गया, वहां चुनाव प्रचार में गया और प्रत्याशियों की जीत हुई।
सातवां
2014 के लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ से टिकट मांगा था, लेकिन किरण खेर को मिली। इसका विरोध हुआ, मुझे भी दुख था, लेकिन किरण खेर की हर तरह से मदद की। इस बारे में अजय जामवाल और किरण खेर से पूछा जा सकता है कि किरण खेर को जिताने में किसका क्या रोल रहा।
आठवां
-पिछले दिनों हुए मेयर चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ किसके इशारे पर आशा जसवाल ने नामांकन किया। आठ जनवरी को तमाम समाचार पत्रों के हेडलाइन में माफीनामा छपा। इससे पार्टी की छवि धूमिल हुई।
प्रभात झा जी कुछ और भी बता दूं...
Harmohan Dhawan
प्रभात झा जी कुछ और भी बता दूं...
मैं जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से प्रेरित होकर राजनीति में आया और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर के साथ जुड़ गया था। राजनीति में दो बातें सिखाई गई थीं। एक तो जब आप विपक्ष में रहें तो जनता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करें, दूसरी यह कि जब आप सत्ता में हों तो अपनी कलम की ताकत से जनहित में काम करें। इन दोनों ही कसौटियों पर खरा उतरा। विपक्ष में रहते हुए आम आदमी के साथ-साथ गरीबों के लिए संघर्ष करते हुए 10 बार जेल गया।
1989 में सत्ता में आया तब सांसद और मंत्री बनने के बाद गांवों, कालोनियों, व्यापारियों, कर्मचारियों के अलावा हर वर्ग के लिए विकास कार्य किया। खेद है कि 40 साल के राजनीतिक जीवन में ऐसी राजनीति कभी नहीं देखी। मान-सम्मान देना तो दूर पिछले एक साल से न कोर कमेटी की किसी बैठक और न ही पार्टी के दूसरे अन्य कार्यक्रमों की सूचना देकर अपमानित किया जा रहा है।- (हरमोहन धवन)
धवन साहब चिट्ठी में बम की भाषा बोलते हैं। मैं काम करके दिखाता हूं। यह चंडीगढ़ की जनता अच्छी तरह से जानती है कि किस व्यक्ति ने काम किया है। अपनी हरकतों के कारण ही वे सीनियर होते हुए पार्टी से दरकिनार होते जा रहे हैं।
-संजय टंडन, अध्यक्ष, भाजपा चंडीगढ़ प्रदेश
मैं जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से प्रेरित होकर राजनीति में आया और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर के साथ जुड़ गया था। राजनीति में दो बातें सिखाई गई थीं। एक तो जब आप विपक्ष में रहें तो जनता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करें, दूसरी यह कि जब आप सत्ता में हों तो अपनी कलम की ताकत से जनहित में काम करें। इन दोनों ही कसौटियों पर खरा उतरा। विपक्ष में रहते हुए आम आदमी के साथ-साथ गरीबों के लिए संघर्ष करते हुए 10 बार जेल गया।
1989 में सत्ता में आया तब सांसद और मंत्री बनने के बाद गांवों, कालोनियों, व्यापारियों, कर्मचारियों के अलावा हर वर्ग के लिए विकास कार्य किया। खेद है कि 40 साल के राजनीतिक जीवन में ऐसी राजनीति कभी नहीं देखी। मान-सम्मान देना तो दूर पिछले एक साल से न कोर कमेटी की किसी बैठक और न ही पार्टी के दूसरे अन्य कार्यक्रमों की सूचना देकर अपमानित किया जा रहा है।- (हरमोहन धवन)
धवन साहब चिट्ठी में बम की भाषा बोलते हैं। मैं काम करके दिखाता हूं। यह चंडीगढ़ की जनता अच्छी तरह से जानती है कि किस व्यक्ति ने काम किया है। अपनी हरकतों के कारण ही वे सीनियर होते हुए पार्टी से दरकिनार होते जा रहे हैं।
-संजय टंडन, अध्यक्ष, भाजपा चंडीगढ़ प्रदेश