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जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र: ऑनलाइन 495 रुपये महंगा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Thu, 24 Dec 2015 12:33 PM IST
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नगर निगम ने जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र घर बैठे लेने के लिए आनलाइन सुविधा तो शुरू कर दी है, लेकिन इसका चार्ज 500 रुपये तय किया गया है जिस पर पूर्व मेयर एवं कांग्रेस पार्षद प्रदीप छाबड़ा ने सदन की बैठक में आपत्ति जताई।
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छाबड़ा ने कहा कि पहले मैनुअल तरीके से कार्यालय आकर प्रमाणपत्र की प्रति का शुल्क 5 रुपये था जो आनलाइन लेने पर 500 रुपये हो गया। यह राशि काफी ज्यादा है। पार्षदों ने इसका रेट कम करने का दबाव भी बनाया। इस पर ज्वाइंट कमिश्नर राजीव गुप्ता ने कहा कि जो 495 रुपये अतिरिक्त चार्ज लिया जा रहा है वह फैसिलिटेशन चार्ज है।
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कमिश्नर बी पुरुषार्था ने कहा कि सभी पहलुओं को चेक करके अगली बार यह प्रस्ताव सदन की बैठक में चर्चा के लिए लाया जाएगा।
ज्वाइंट कमिश्नर ने कहा कि इस समय शहर के तीनों सरकारी अस्पतालों में आनलाइन प्रमाणपत्र जारी करने की सुविधा दी गई है और 495 रुपये की अतिरिक्त राशि पर अतिरिक्त स्टाफ और कंप्यूटर व्यवस्था पर ही खर्च किया जाएगा। मालूम हो कि पिछले माह ही नगर निगम ने आनलाइन से आवेदन करके घर प्रमाणपत्र लेने की सुविधा शुरू की है। उन्होंने कहा कि अगर उस समय शुल्क कम करने की जरूरत महसूस होगी तो इसे कम भी कर दिया जाएगा।
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अब 56 हजार रुपये का लैपटाप मिलेगा पार्षदों को
अभी तक पार्षदों और ज्वाइंट स्तर के अधिकरियों को जो लैपटाप नगर निगम की ओर से उपलब्ध करवाया जाता था उसकी राशि की सीमा 44 हजार थी लेकिन सदन की बैठक ने अब यह तय किया है कि 56 हजार रुपये तक लैपटाप खरीदा जा सकता है। मालूम हो कि नगर निगम केसभी 35 पार्षदों को लैपटाप दिया गया है लेकिन इसका कोई भी फायदा शहरवासियों को नहीं मिला है।
सदन की बैठक में यह भी प्रस्ताव पास किया गया कि मेयर और कमिश्नर के लिए कोई भी राशि की सीमा तय नहीं है वह कितनी भी राशि का लैपटाप खरीद सकते हैं। बैठक में सेक्टर-38 के सामुदायिक केंद्र को तोड़कर फिर से नया बनाने का प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है। जिस पर नगर निगम का 4 करोड़ 76 लाख रुपये का खर्चा आ रहा है।
पब्लिक टायलेट का मामला गरमाया
सदन की बैठक में शहर में बने पब्लिक टायलेट की खस्ता हालत का मामला भी गरमाया। जिस पर कमिश्नर बी पुरुषार्था ने कहा कि पब्लिक टायलेट रखरखाव के लिए बैंकों को दिए जा रहे हैं।
लेकिन सभी पब्लिक टायलेट की हालत सुधार कर बैंकों को दिए जाएंगे। जबकि पूर्व मेयर सुभाष चावला ने कहा कि जब सेलवेल कंपनी को पब्लिक टायलेट दिए गए थे तो यह शर्त थी कि वह ठीक हालत में पब्लिक टायलेट वापस करेंगे लेकिन पिछले साल जब उन्होंने पब्लिक टायलेट वापस सौंपे तो उनकी हालत काफी खस्ता थी।
नगर निगम कमिश्नर ने बताया कि पब्लिक टायलेट की हालत सुधारने के लिए टैंडर अलाट कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पब्लिक टायलेट पर जो विज्ञापन की मंजूरी देने का अधिकार है वह नगर निगम केपास ही है।
पेड पार्किंग रेट बढ़ाने के मामले में मनोनीत पार्षदों में फूट
पेड पार्किग का रेट बढ़ाने के प्रस्ताव पर मनोनीत पार्षदों में फूट पड़ गई है जब पिछली बैठक के मिनट्स पास किए जा रहे थे तो मनोनीत पार्षद डीएस संधू और अरुणा गोयल ने कहा कि मिनट्स में लिखा है कि सभी मनोनीत पार्षद रेट बढ़ाने के पक्ष में हैं जबकि यह गलत है।
उन्होंने कहा कि जो दो मनोनीत पार्षदों ने समर्थन किया था उनका ही मिनट्स में नाम लिखा जाए। मालूम हो कि सदन की पिछली बैठक में मनोनीत पार्षद एमपी कोहली और बाबूलाल ने पेड पार्किंग का नोमिनल रेट बढ़ाने का समर्थन किया ता, जबकि कांग्रेस और भाजपा के विरोध के कारण यह प्रस्ताव पास नहीं हो सका। एमपी कोहली ने बुधवार को फिर से कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए पेड पार्किंग के रेट बढ़ने चाहिए।
डंपिंग ग्राउंड पंजाब में शिफ्ट होगा
शहर का डंपिंग ग्राउंड पंजाब में शिफ्ट होगा। ऐसे में डड्डूमाजरा के लोगों को लगातार आ रही दुर्गंध से निजात मिलेगी। नगर निगम कमिश्नर बी पुरुषार्था ने सदन में बताया कि डपिंग ग्राउंड के लिए जगह देने की बात पंजाब सरकार से चल रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों मिथेन गैस के कारण डपिंग ग्राउंड में आग लग गई थी जिसको दमकल विभाग ने 10 लाख लीटर पानी का प्रयोग करके बुझाया।
उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में डंपिंग ग्राउंड में बाउंड्री वाल की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव आया था लेकिन इस प्रस्ताव से न तो दुर्गंध की दिक्कत दूर होगी और न ही मक्खी, मच्छर की दिक्क्त दूर होगी ऐसे में इसके बारे में कुछ और ही सोचना होगा।
उप्पल सोसाइटी के प्रस्ताव पर नहीं हुई चर्चा
मनीमाजरा की उप्पल सोसाइटी पर उठे सवालों के प्रस्ताव पर सदन की बैठक में चर्चा नहीं हुई। अब नए साल में होने वाली बैठक में इस पर चर्चा होगी। इस साल की अंतिम बैठक में कोई हंगामा न हो इसलिए इस मामले को टाल दिया गया। मालूम हो उप्पल सोसाइटी को इस शर्त पर जमीन अलाट की गई थी कि वह 15 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस के फ्लैट का निर्माण करेगी जिसका निर्माण अभी तक नहीं हुआ है।