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कथक सम्राट बिरजू महाराज ने वर्ष 2011 में दी थी टैगोर थिएटर में प्रस्तुति
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चंडीगढ़। कथक सम्राट के निधन से ट्राइसिटी के कलाकार काफी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत के एक युग का अंत हो गया। बिरजू महाराज का चंडीगढ़ शहर से गहरा नाता था। वह कार्यक्रम के सिलसिले में कई बार यहां आए थे। प्राचीन कला केंद्र की सहनिर्माता और कथक नृत्यांगना डॉ. शोभा कौसर ने बताया कि सरल और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी कथक सम्राट बिरजू महाराज ने शहर में अंतिम प्रस्तुति अपनी टीम के साथ वर्ष 2011 में टैगोर थिएटर में दी थी। इससे पहले भी वे दो बार चंडीगढ़ में प्रस्तुति के लिए आए थे, लेकिन उनकी आखिरी याद हमारे पास वर्ष 2011 की है। उस समय कार्यक्रम केंद्र की ओर से ही आयोजित करवाया गया था। केंद्र की ओर से उन्हें एमएल कौसर अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
उन्होंने कहा कि शास्त्रीय नृत्य जगत के लिए उनका जाना बहुत बड़ी क्षति है, मैंने उनसे सीखा नहीं, क्योंकि हमारा घराना अलग था। लेकिन वो शास्त्रीय संगीत से जुड़े हर कलाकार के लिए प्रेरणा थे और हमेशा रहेंगे। डॉ. शोभा ने पुराने किस्से याद करते हुए बताया कि जब 2011 में उनकी प्रस्तुति थी तो चंडीगढ़ चीफ गेस्ट हाउस में उनके और टीम के लिए व्यवस्था की थी। लेकिन उस दौरान शहर में किसी मंत्री का दौरा भी था तो वहां थोड़ा मुश्किल आ गई थी। इसलिए हमने उन्हें घर बुला लिया। तब की याद है कि हर स्थिति में वे बहुत सरलता और सहजता से पेश आते थे।
दिल्ली साहित्य कला परिषद लाइब्रेरी में हुई मुलाकात
पंजाब यूनिवर्सिटी के शास्त्रीय संगीत के शिक्षक प्रो. अनिल ने बताया कि अपनी शोध के लिए वर्ष 2018 के आसपास साहित्य कला परिषद् दिल्ली के पुस्तकालय गया हुआ था। उसी दौरान बिरजू महाराज भी कोई मैगजीन लेने के लिए पुस्तकालय आए थे। उनके साथ अचानक हुई पहली और आखिरी मुलाकात थी। मैंने अपनी शोध को लेकर उनसे बात करने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने बड़ी सहजता से लगभग दस मिनट मुझसे चर्चा की और विस्तृत चर्चा के लिए घर पर आने का निमंत्रण दिया। वे बहुत ही सरल और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे।
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उन्होंने कहा कि शास्त्रीय नृत्य जगत के लिए उनका जाना बहुत बड़ी क्षति है, मैंने उनसे सीखा नहीं, क्योंकि हमारा घराना अलग था। लेकिन वो शास्त्रीय संगीत से जुड़े हर कलाकार के लिए प्रेरणा थे और हमेशा रहेंगे। डॉ. शोभा ने पुराने किस्से याद करते हुए बताया कि जब 2011 में उनकी प्रस्तुति थी तो चंडीगढ़ चीफ गेस्ट हाउस में उनके और टीम के लिए व्यवस्था की थी। लेकिन उस दौरान शहर में किसी मंत्री का दौरा भी था तो वहां थोड़ा मुश्किल आ गई थी। इसलिए हमने उन्हें घर बुला लिया। तब की याद है कि हर स्थिति में वे बहुत सरलता और सहजता से पेश आते थे।
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दिल्ली साहित्य कला परिषद लाइब्रेरी में हुई मुलाकात
पंजाब यूनिवर्सिटी के शास्त्रीय संगीत के शिक्षक प्रो. अनिल ने बताया कि अपनी शोध के लिए वर्ष 2018 के आसपास साहित्य कला परिषद् दिल्ली के पुस्तकालय गया हुआ था। उसी दौरान बिरजू महाराज भी कोई मैगजीन लेने के लिए पुस्तकालय आए थे। उनके साथ अचानक हुई पहली और आखिरी मुलाकात थी। मैंने अपनी शोध को लेकर उनसे बात करने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने बड़ी सहजता से लगभग दस मिनट मुझसे चर्चा की और विस्तृत चर्चा के लिए घर पर आने का निमंत्रण दिया। वे बहुत ही सरल और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे।
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