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बर्ड वाचर: जब चाना ने जाना क्या है चिड़ियों का चहचहाना
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 06 Feb 2017 02:36 PM IST
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आठवीं क्लास से बर्ड वॉचिंग कर रहे अमनदीप
- फोटो : अमर उजाला
बर्ड वाचिंग का जुनून सिर चढ़कर बोलता है। इंजीनियरिंग के छात्र अमनदीप सिंह चाना को देखकर यही लगता है। वह आठवीं क्लास से ही बर्ड वाचिंग कर रहे हैं। अब तक 300 से ज्यादा पक्षियों की अलग-अलग प्रजाति को देख चुके हैं। पहले बाइनाकुलर का इस्तेमाल थे, अब कैमरे का। पंजाब यूनिवर्सिटी से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे अमनदीप चंडीगढ़ बर्ड क्लब के सबसे छोटे सदस्य हैं। उनके इस जुनून के क्लब के सभी सदस्य कायल हैं।
क्लास टीचर ले जाती थी बर्ड वॉचिंग पर
अमनदीप सिंह बताते हैं, स्कूल के वक्त उनकी क्लास टीचर सरबजीत हुआ करती थीं। वह शहर की जानी-मानीपर्यावरणविद् हैं। वह अपने साथ स्कूली बच्चों को लेक, रेगुलेटरी एंड, नेचर पार्क लेकर जाती थीं। इससे धीरे-धीरे बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ी। पहले कबूतर, गौरेया और मोर के बारे में ही पता था, जैसे-जैसे बाहर निकलने लगे तो पता लगा कि पक्षियों की तो अपनी एक दुनिया है और इतनी खूबसूरत होती है। उसके बाद से बर्ड वाचिंग में दिलचस्पी जागी।
टयूशन की कमाई से खरीदा कैमरा
अमनदीप ने बताया कि जब पक्षियों के प्रति उसकी दिलचस्पी बढ़ी तो उन्होंने बर्ड वाचिंग करने वाले साथियों से बाइनाकुलर लेकर पक्षियों को देखना शुरू किया। जब वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगे तो उससे मिलने वाली फीस से अपने लिए एक कैमरा खरीदा है। उसके बाद से बर्ड्स के फोटो का कलेक्शन संभालकर रख रहे हैं। वे चंडीगढ़ के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी बर्ड वांचिग के लिए जाते हैं।
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क्लास टीचर ले जाती थी बर्ड वॉचिंग पर
अमनदीप सिंह बताते हैं, स्कूल के वक्त उनकी क्लास टीचर सरबजीत हुआ करती थीं। वह शहर की जानी-मानीपर्यावरणविद् हैं। वह अपने साथ स्कूली बच्चों को लेक, रेगुलेटरी एंड, नेचर पार्क लेकर जाती थीं। इससे धीरे-धीरे बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ी। पहले कबूतर, गौरेया और मोर के बारे में ही पता था, जैसे-जैसे बाहर निकलने लगे तो पता लगा कि पक्षियों की तो अपनी एक दुनिया है और इतनी खूबसूरत होती है। उसके बाद से बर्ड वाचिंग में दिलचस्पी जागी।
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टयूशन की कमाई से खरीदा कैमरा
अमनदीप ने बताया कि जब पक्षियों के प्रति उसकी दिलचस्पी बढ़ी तो उन्होंने बर्ड वाचिंग करने वाले साथियों से बाइनाकुलर लेकर पक्षियों को देखना शुरू किया। जब वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगे तो उससे मिलने वाली फीस से अपने लिए एक कैमरा खरीदा है। उसके बाद से बर्ड्स के फोटो का कलेक्शन संभालकर रख रहे हैं। वे चंडीगढ़ के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी बर्ड वांचिग के लिए जाते हैं।
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300 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां देख चुके
आठवीं क्लास से बर्ड वॉचिंग कर रहे अमनदीप
- फोटो : अमर उजाला
घर वालों में भी बढ़ गई संवदेनशीलता
बर्ड वाचिंग के प्रति लगाव का न सिर्फ अमनदीप के जीवन पर प्रभाव पड़ा है, बल्कि उसके परिवार वाले भी पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हो गए हैं। उसने बताया कि उसके घर पर पक्षियों के पीने के लिए पानी और दाना रखा जाता है। सोसाइटी पर लोग पहले पेड़ काट देते थे, लेकिन अब उन्हें भी रोक दिया गया है। पेड़ बढ़ने से पक्षियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।
चंडीगढ़ प्रशासन की बेरुखी से मायूस
अमनदीप कहते हैं कि चंडीगढ़ में कई पक्षी हैं, लेकिन कभी प्रशासन की ओर से उनकी गिनती के लिए इनिशिएटिव नहीं लिया जाता, जबकि पंजाब की ओर से हर साल बर्ड्स की गिनती होती है। चंडीगढ़ के बर्ड वॉचर को बुलाया जाता है। हम सभी उनकी गिनती करते हैं, लेकिन चंडीगढ़ में ऐसा नहीं होता। इसके अलावा ऐसा कोई कार्यक्रम भी नहीं होता है, जिससे शहरवासियों में पक्षियों के प्रति लगाव बढ़ सके।
अमनदीप बर्ड वाचिंग के लिए बहुत मेहनत करता है। पक्षियों को देखने के लिए वह अक्सर चंडीगढ़ के बाहर जाता रहता है। सबसे खास बात यह है कि वह युवा है और युवाओं को बर्ड वॉचिंग के लिए प्रेरित भी कर रहा है।
- प्रोफेसर एमएस शेखों, सीनियर बर्ड वॉचर व एचओडी भूगोल डीएवी कॉलेज सेक्टर-10
बर्ड वाचिंग के प्रति लगाव का न सिर्फ अमनदीप के जीवन पर प्रभाव पड़ा है, बल्कि उसके परिवार वाले भी पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हो गए हैं। उसने बताया कि उसके घर पर पक्षियों के पीने के लिए पानी और दाना रखा जाता है। सोसाइटी पर लोग पहले पेड़ काट देते थे, लेकिन अब उन्हें भी रोक दिया गया है। पेड़ बढ़ने से पक्षियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है।
चंडीगढ़ प्रशासन की बेरुखी से मायूस
अमनदीप कहते हैं कि चंडीगढ़ में कई पक्षी हैं, लेकिन कभी प्रशासन की ओर से उनकी गिनती के लिए इनिशिएटिव नहीं लिया जाता, जबकि पंजाब की ओर से हर साल बर्ड्स की गिनती होती है। चंडीगढ़ के बर्ड वॉचर को बुलाया जाता है। हम सभी उनकी गिनती करते हैं, लेकिन चंडीगढ़ में ऐसा नहीं होता। इसके अलावा ऐसा कोई कार्यक्रम भी नहीं होता है, जिससे शहरवासियों में पक्षियों के प्रति लगाव बढ़ सके।
अमनदीप बर्ड वाचिंग के लिए बहुत मेहनत करता है। पक्षियों को देखने के लिए वह अक्सर चंडीगढ़ के बाहर जाता रहता है। सबसे खास बात यह है कि वह युवा है और युवाओं को बर्ड वॉचिंग के लिए प्रेरित भी कर रहा है।
- प्रोफेसर एमएस शेखों, सीनियर बर्ड वॉचर व एचओडी भूगोल डीएवी कॉलेज सेक्टर-10