सुखना पर बर्ड फ्लू बना दुकानदारों का सिरदर्द
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बर्ड फ्लू कंफर्म होने के बाद सुखना लेक पर कारोबार बंद हुए पूरे 16 दिन बीत गए हैं। लेक पर सर्दियों का यह सीजन दुकानदारों के लिए जबरदस्त कमाई का था। हर दुकानदार अपना घाटा इसी महीने में पूरा करता था।
बर्ड फ्लू की घटना ने उन्हें खाली बैठने को मजबूर कर दिया है। कमाई न होने से दुकानदार टेंशन में हैं। इनमें से कई का तो ब्लड प्रेशर हाई हो गया है।
दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे हालात में उनकी मदद करनी चाहिए। उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए और एक महीने का किराया भी माफ होना चाहिए। कहीं सुनवाई न होने पर दुकानदारों ने सांसद किरण खेर व भाजपा नेता हरमोहन धवन से मदद की गुहार लगाई है।
16 दिन में ढाई लाख का नुकसान
बूथ नंबर चार के ऑनर संतोष शर्मा ने बताया कि 16 दिन में उन्हें ढाई लाख का नुकसान हो चुका है। उनके बूथ का किराया लगभग एक लाख 61 हजार रुपये है। बूथ में कई कर्मचारी भी हैं।
20 दिसंबर से लेकर 16 जनवरी तक सुखना पर कमाई का मौसम होता है। शिमला जाने वाले सभी पर्यटक चंडीगढ़ की सुखना को जरूर देखकर आते थे। इन महीनों में ही सबसे अधिक कमाई होती है।
कमाई न होने से पूरे साल का बजट गड़बड़ा गया है। दुकान में लगे कर्मचारियों को तनख्वाह भी देनी है। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो कर्मचारी छोड़कर जा सकते हैं।
बर्ड फ्लू ने पेट पर मारी लात
सुखना पर जंपिंग प्वाइंट चलाने वाले पवन ने बताया कि जुलाई से लेकर नवंबर तक लेक पर कमाई कम रहती है। दिसंबर आते ही दुकानदारों का चेहरा खिल जाता है। बर्ड फ्लू ने तो पेट पर लात मार दी है।
ऐसा लग रहा है कि बेरोजगार हो चुके हैं। अब तक यह भी पता नहीं कि लेक कब तक खुलेगी। हमें उम्मीद है कि चंडीगढ़ प्रशासन इस दिशा में कोई न कोई कदम जरूर उठाएगा।
एक दिन पहले खोली थी शॉप
सुखना पर स्थित शॉप नंबर सात व आठ के मालिक अवतार सिंह ने बताया कि उन्होंने 17 दिसंबर को ही शॉप खोली थी। इसका किराया तीन लाख 61 हजार रुपये है। शॉप चाट व गोल गप्पे की है।
इसके लिए काफी सारा सामान खरीदा लिया था। अब सारा सामान बर्बाद हो गया है। बर्ड फ्लू ने धंधा चौपट कर दिया है। इस बारे में प्रशासन को कोई राहत भरा कदम उठाना चाहिए।
सिटको ने खारिज की मांग
सुखना बंद होने के बाद दुकानदारों ने सिटको से एक महीने का किराया माफ करने की गुहार लगाई थी। सिटकों ने उनकी मांग खारिज कर दी थी। इसके बाद दुकानदारों ने सांसद किरण खेर व भाजपा नेता हरमोहन धवन से गुहार लगाई। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे मामले का कोई हल निकालेंगे।
18 दिसंबर को बंद हुई थी सुखना
सुखना लेक पर लगातार बतखों के मरने के बाद एक बतख का सैंपल भोपाल की लैब में भेजा गया था। वहां से आई रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। इसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लेक को सील कर दिया।
धारा 144 लागू कर दुकानें भी बंद कर दी गईं थीं। वैसे प्रशासन ने एक महीने तक सुखना बंद करने का ऑर्डर दिया था। लेकिन अधिकारियों ने बताया है कि अगर सभी रिपोर्ट निगेटिव आती है तो एक महीने से पहले भी सुखना खोली जा सकती है।
मरने से बची बतख को भी सुखना से उठाया
बर्ड फ्लू वायरस की पुष्टि के बाद सुखना लेक पर बची बतख को भी शनिवार को उठवा लिया गया। एक बतख में वायरस की पुष्टि होने के बाद 18 दिसंबर की रात को सुखना लेक पर 90 से ज्यादा बतखों को मार दिया गया था।
इनमें जीवित बची एक बतख अगले दिन टापू के पास दिखाई दी। दो दिन बाद एक और बतख वहां आ गई थी। शनिवार दोपहर 1अधिकारियों की टीम सुखना लेक पर पहुंची।
वाइल्ड लाइफ के दो कर्मचारियों को जैकेट पहनाकर बतख उठाने के लिए भेजा गया, मगर उन्हें एक ही बतख मिली, जिसे पकड़ कर अधिकारियों को सौंप दिया गया।
उस दौरान बताया गया कि वे एनिमल हसबेंडरी विभाग की ओर से आए हैं। बतख के सैंपल लेने हैं। उसके बाद वे वहां से चले गए, लेकिन जब विभाग से संपर्क किया गया तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि वे लोग वहां पर गए थे। चंडीगढ़ प्रशासन के चुपचाप चलाए गए अभियान से कुछ सवाल खड़े हो गए हैं।