केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब विधानसभा में आज पेश होगा विधेयक
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पंजाब सरकार ने सोमवार को विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लाया जाने वाला विधेयक एक दिन टाल दिया। इस पर सदन में विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया। आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद वेल में धरना दिया।
वहीं, अकाली दल के सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से निकलकर पंजाब भवन पहुंच गए, जिसे कोरोना के चलते विधानसभा सत्र की एक्सटेंशन बनाया गया है। पंजाब भवन के भीतर जाने की अनुमति नहीं मिलने पर अकाली दल के विधायकों ने भवन के गेट पर धरना दिया और पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन मामूली कामकाज ही हुआ। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। इसमें दिवंगत शख्सियतों को श्रद्धांजलि दी गई। करीब 11:15 बजे कार्यवाही दोपहर 12.15 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि कृषि कानूनों के खिलाफ संबंधित बिल मंगलवार को लाया जाएगा।
इस पर विपक्ष की ओर से कहा गया कि यह सत्र कृषि कानूनों के संबंध में बुलाया गया है, इसलिए इसे पहले ही दिन पेश किया जाना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष और आप विधायक हरपाल सिंह चीमा ने विधानसभा में कृषि कानूनों से संबंधित विधेयक की प्रतियां सोमवार तक भी विधायकों के पास न पहुंचने का मुद्दा उठाया।
इसका जवाब देते हुए वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि समय रहते विधेयक की प्रतियां सभी विधायकों तक पहुंच जाएंगी। लेकिन विपक्षी सदस्यों ने इस पर एतराज जताया। इस पर विशेषाधिकार कमेटी की रिपोर्ट सदन पटल पर रखने के बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन मंगलवार सुबह 10 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। हालांकि तय कामकाज के अनुसार, सोमवार को प्रश्नकाल के अलावा विभिन्न बिलों को सदन में पेश कर उन पर बहस होनी थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सदन के भीतर से फेसबुक पर लाइव हुए विधायक अमन अरोड़ा
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद आम आदमी पार्टी के विधायकों ने वेल में धरना शुरू कर दिया। उनकी मांग थी कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के हित में पेश किए जाने वाले विधेयक का प्रारूप तो उन्हें तुरंत उपलब्ध कराया जाए ताकि उस पर विचार किया जा सके। विधायक अमन अरोड़ा ने सदन के भीतर से ही अपने फेसबुक अकाउंट पर लाइव होकर कहा कि इस सत्र से पहले दो दिन का सेमिनार बुलाया जाना चाहिए था। इसमें सभी विधायकों के साथ-साथ किसान संगठनों व कृषि विशेषज्ञों को बुलाया जाता। कांग्रेस सरकार किसानों को बचाने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं ला रही बल्कि अपनी डूबती नैया बचाने के लिए प्रस्ताव पेश किया जाना है।
केंद्र के इशारे पर काम कर रही कैप्टन सरकार : शिअद
पंजाब भवन पहुंचे अकाली दल के विधायकों ने कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव न पेश किए जाने का कड़ा विरोध किया। इस मौके पर धरने पर बैठे बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि कैप्टन सरकार इस मामले में केंद्र की मोदी सरकार से मिल गई है और उसके इशारे पर सारा ढोंग किया जा रहा है।
सरकार किसानों से धोखा कर रही है। वह एक महीने में भी प्रस्ताव का प्रारूप तैयार नहीं कर सकी। इससे साफ है कि फिक्स मैच खेला जा रहा है। कैप्टन सरकार आज भी हॉटलाइन पर मोदी सरकार के इशारे का इंतजार करती रही। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए बुलाए गए सत्र के पहले दिन किसान शब्द का जिक्र तक नहीं हुआ।
विधानसभा जा रहे एबीवीपी कार्यकर्ताओं से पुलिस की झड़प
पंजाब के कथित वजीफा घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करने जा रहे एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी झड़प हो गई। पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया। थाने में ले जाकर कुछ देर बाद सभी को छोड़ दिया गया। छात्र नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।