खुलासाः पाकिस्तान के नापाक इरादों का यह है नया हथियार, निशाने पर भारत का 'भविष्य'
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सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के चार सप्ताह में नशा खत्म करने का दावा जमीनी स्तर पर 113 सप्ताह बाद भी कागजी ही साबित हुआ है। नशा बिक रहा है, ओवरडोज से युवा मर रहे हैं। सवाल है कि आखिर नशा पहुंचता कैसे है और इसकी रीढ़ क्यों नहीं टूट पा रही। जो कारण सामने आ रहे हैं वे पाकिस्तान की ओर इशारा करते हैं।
आतंकवाद पर वैश्विक समुदाय में घिरने के बाद अब पाक नशे के जरिए भारत को खोखला करना चाहता है। नशे की समस्या को लेकर अमर उजाला संवाद में हुई चर्चा में इसकी तमाम वजह निकलकर सामने आईं। अफगानिस्तान लंबे समय तक विश्व की दो तत्कालीन महाशक्तियों के टकराव का केंद्र रहा। जिसका नतीजा अफगानिस्तान पर तालिबान के वर्चस्व के रूप में सामने आया।
तालिबान को पाकिस्तान का आश्रय मिला। तालिबान ने अपने आतंकी मंसूबों की पूर्ति के लिए अफगानिस्तान को नशे की पैदावार का केंद्र बना दिया। जिससे उनकी आर्थिक जरूरतें पूरी हो सके।
आतंकी संगठनों का संरक्षक होने के नाते पाकिस्तान उन्हें अपने मंसूबों के लिए भी इस्तेमाल करता है। कृषि व सैन्य सेवाओं में इस छोटे से राज्य की भागीदारी सर्वाधिक रही है। पंजाब में पाक प्रायोजित आतंकवाद की विफलता के बाद ही नशे ने यहां पैर पसारे।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल डायरेक्टर बीरेंद्र कुमार का भी कहना है कि पंजाब में नशे की गहरी जड़ों के पीछे ग्लोबल ड्रग्स माफिया और पाकिस्तान का हाथ है।
अफगानिस्तान में वित्त वर्ष 2015-16 की तुलना में 16-17 में अफीम की खेती 87 फीसदी बढ़ी। जो हर साल इसी क्रम में बढ़ रही है और भारत में इसकी खपत करवाने के लिए पाकिस्तान रास्ता देता है।
अब यूपी और राजस्थान होकर भेजा जा रहा नशा
हाल ही में नशे का टेरर एंगल भी सामने आया है। इसके बाद बॉर्डर पर सैन्य बलों के साथ इंटेलिजेंस एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है। पड़ताल में यह भी सामने आया कि अब ग्लोबल ड्रग माफिया ने पाकिस्तान के सहयोग से पंजाब तक नशा पहुंचाने के लिए नए रूट का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। अब अफ्रीकी देशों से नशे की खेप दिल्ली के रास्ते पंजाब पहुंच रही है। लेकिन इसका रूट हरियाणा न होकर पश्चिमी यूपी और राजस्थान को बनाया गया है।