ओवरलोड वाहनों से लंबे समय से वसूली कर रहा था गिरोह, पांच हजार ट्रकों से होती थी 120 करोड़ की वसूली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ओवरलोड वाहनों से वसूली मामले में रोहतक एसआईटी की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पिछले लंबे समय से ओवरलोड वाहनों से रोहतक, नारनौल, झज्जर, भिवानी, सोनीपत, चरखी दादरी के आरटीए स्टाफ और दलालों की साठगांठ से वसूली की जा रही थी। जानकारी के अनुसार, प्रदेश भर के पांच हजार ओवरलोड वाहनों से प्रतिदिन चार करोड़ जबकि प्रतिमाह 120 करोड़ रुपये की वसूली होती थी।
हर महीने 20-20 करोड़ रुपये एक आरटीए कार्यालय पहुंचाए जाते थे। वसूली की रकम अधिकारियों तक पहुंचाने की मुख्य जिम्मेदारी रोहतक के आरटीए विभाग में तैनात राजेश, चरखी दादरी के सहायक सचिव मनीष मदान को सौंपी गई थी। इस खुलासे के बाद एसआईटी संबंधित जिलों के तत्कालीन डीसी और आरटीए की भूमिका की भी जांच कर रही है। उधर, ओवरलोड वाहनों से अवैध वसूली मामले में छह जिलों के उच्चाधिकारियों के नाम आने के बाद से विभागीय अधिकारियों में हड़कंप है।
एसआईटी सूत्रों के अनुसार, हालांकि गिरफ्तार आरोपी चरखी दादरी के आरटीए कार्यालय में तैनात सहायक सचिव मनीष मदान,क्लर्क अमित कुमार ने खुलासा किया था कि मात्र सात माह से ही ओवरलोड वाहनों से वसूली की जा रही है। मगर एसआईटी की जांच में सामने आया है कि वसूली करने वाला गिरोह लंबे समय से सक्रिय है। रोहतक एसआईटी द्वारा कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में भी दलाल से लेकर ट्रांसपोर्टरों का कबूलनामा दर्ज है।
क्लर्क ने सहायक सचिव को दिए थे 8 लाख
चार्जशीट के अनुसार, चरखी दादरी के आरटीए कार्यालय में क्लर्क अमित कुमार ने बताया कि वह झज्जर के रविंद्र और रोहतक के डेयरी मोहल्ले के रहने वाले सुरेंद्र राठी के माध्यम से वाहन चालकों से वसूली गई रकम को डीसी और एडीसी चरखी दादरी को देता था। आठ लाख रुपये 17 मई को ही सहायक सचिव मनीष मदान को दिए थे।
दलाल ने सेक्रेटरी और क्लर्क को दिए थे 20 लाख
चार्जशीट के अनुसार, डेयरी मोहल्ले का रहने वाला सुरेंद्र राठी दलाल का काम करता था। वह वाहनों के चालक और मालिक से लिए गए रुपयों को रोहतक के आरटीए विभाग के टीएसआई राजेश कुमार और सोनीपत में सोनू तथा चरखी दादरी में सहायक सचिव मनीष मदान को पहुंचाता था। उनसे 20 लाख रुपये 17 मई को अमित और मनीष को दिए थे।
दस हजार रुपये प्रति गाड़ी लेते थे : ट्रांसपोर्टर
चार्जशीट में असरौली निवासी ट्रांसपोर्टर श्यामबीर ने बताया है कि उसके दो ट्रक चलते थे। ट्रकों में अटेला से डस्ट भरकर दिल्ली ले जाया जाता था। रुपये नहीं देने पर दो बार उसकी गाड़ियों का आरटीए विभाग ने चालान कर दिया। इसके बाद उसकी बिल्लू से सेटिंग हो गई। बिल्लू उससे आठ हजार के बजाए प्रति गाड़ी दस हजार रुपये लेता था।
डीसी तक रुपये पहुंचाने के मिलते थे 15 हजार
दुजाना के रहने वाले सुरेश ने बताया है कि वह वर्तमान में झज्जर के सेक्टर 6 में रहता है। वह झज्जर और चरखी दादरी के डीसी का पीए रहा है। मनीष मदान ने उसे तत्कालीन डीसी चरखी दादरी को रुपये पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। हर माह वह डीसी और आरटीए को रुपयों का पैकेट पहुंचाता था। इसके लिए उसे 15 हजार रुपये मिलते थे।
वसूली में लिप्त अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी। एसआईटी जांच कर रही है। रोहतक के आरटीए विभाग में तैनात टीएसआई राजेश की गिरफ्तारी के बाद कई और खुलासे होंगे। जल्द ही फरार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। - राहुल शर्मा, एसपी रोहतक।
यह है मामला
वसूली मामले में चरखी दादरी के तत्कालीन आरटीए के सहायक सचिव मनीष मदान और एक क्लर्क को रोहतक पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनके पास से वसूली के 62 लाख रुपये बरामद हुए थे। इससे पहले रोहतक पुलिस ने ओवरलोड वाहनों को निकलवाने की साठगांठ कराने वाले दो दलालों को भी गिरफ्तार किया था।
वहीं, तत्कालीन आरटीए सहायक सचिव व क्लर्क के अलावा डीसी चरखी दादरी के पीए सुरेश कुमार को भी एसआईटी ने झज्जर स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। डीसी के पीए से बरामद मोबाइल को जांच के लिए गुरुग्राम भेजा गया है।