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RTI में गौशालाओं की खुली पोल, सिरसा जिले में सवा साल में 10,772 गोवंश की मौत

Fri, 24 Jan 2020 12:14 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 24 Jan 2020 12:14 AM IST
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Big reveals in RTI about the condition of cattle in Haryana's Sirsa District
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हरियाणा के सिरसा जिले की गोशालाओं में सवा साल में 10,772 गोवंश की मौत हुई है। यह आंकड़ा अप्रैल 2017 से जुलाई 2018 के बीच का है। हर माह औसतन 673 गोवंश ने दम तोड़ा। पानीपत के सूचना अधिकार प्रहरी पीपी कपूर की ओर से आरटीआई में मांगी गई जानकारी प्राप्त होने पर यह खुलासा हुआ है। कपूर ने बताया कि गौ सेवा आयोग से आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार सिरसा जिले की कुल 117 गोशालाओं में ये मौतें हुई हैं।

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सूचना अधिकार प्रहरी ने इतनी संख्या में गोवंश के मरने की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही हरियाणा गोसेवा आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। कपूर के अनुसार 5 सितंबर 2019 को गोसेवा आयोग में आरटीआई लगाकर प्रदेश की सभी गोशालाओं में मरे गोवंश की संख्या, लावारिस गोवंश की संख्या, जिला स्तरीय स्ट्रे कैटल फ्री कमेटियों के एक्शन प्लान, गो रक्षकों की कुल संख्या, शेष पकड़े जाने वाले आवारा पशुओं की संख्या की सूचना मांगी थी। लेकिन, आयोग ने बिना कोई ठोस सूचना दिए आवेदन पत्र को महानिदेशक पशुपालन, सभी अतिरिक्त उपायुक्तों, सभी शहरी स्थानीय निकायों को भेजकर अपना पल्ला झाड़ लिया। 
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सघन पशुधन विकास परियोजना सिरसा के उपनिदेशक ने 18 अक्टूबर 2019 को पत्र के जरिए जिला सिरसा की गोशालाओं में अप्रैल 2017 से जुलाई 2018 की अवधि में मरे गोवंश के आंकड़े उपलब्ध कराए थे। कपूर का कहना है कि सात अगस्त 2018 को सिटी मजिस्ट्रेट व 21 नवंबर 2018 को एडीसी सिरसा की अध्यक्षता में बेसहारा पशु कल्याण समिति की उच्च स्तरीय बैठकें भी हुईं, मगर दोनों बैठकों में बेसहारा गोवंश की मौत पर कोई चर्चा नहीं की गई। 
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पशुपालन एवं डेयरी विभाग पानीपत के उपनिदेशक ने सूचित किया है कि गोशाला प्रबंधकों के पास गोवंश की मौतों का कोई आंकड़ा नहीं है। कपूर ने सरकार से गोवंश के मरने की उच्च स्तरीय जांच व प्रदेश को लावारिस पशुओं से मुक्त कराने की मांग की है।

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