सीआरपीएफ भर्ती फर्जीवाड़े में बड़ा खुलासाः 1000 से ज्यादा लोग शामिल, ऐसे दिलाई गई थी परीक्षा
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सीआरपीएफ भर्ती फर्जीवाड़े में बड़ा खुलासा हुआ है कि इस मामले में करीब 1000 से ज्यादा लोगों के शामिल होने की जानकारी पुलिस को मिली है। इनमें किसी ने परीक्षा में बैठने वाले को सीधे रुपये दिए तो किसी ने अन्य बिचौलियों के माध्यम से परीक्षा दिलाई है। पुलिस ने अब मामले में तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी चरखी दादरी के गांव अचीना टाल के रहने वाले दीपक व विनीत और गांव भागेश्वरी का रहने वाला जगबीर है।
इसमें दीपक और विनीत ने किसी अन्य से परीक्षा दिलवाई थी और जगबीर ने बिचौलिया बनकर दो दिन पहले गिरफ्तार झज्जर के गांव दुबलधन के देवेंद्र की परीक्षा किसी अन्य से दिलवाई थी। अब पुलिस आरोपियों के स्थान पर परीक्षा देने वालों का सुराग लगाएगी। 27 अगस्त को भर्ती बोर्ड के चेयरमैन और सीआरपीएफ चंडीगढ़ के द्वितीय कमांडेंट संजय कुमार ने राई थाने में शिकायत दी थी कि ग्रुप केंद्र खेवड़ा में सीआरपीएफ सिपाही भर्ती के लिए लिखित परीक्षा में कई अभ्यर्थियों ने दूसरे से परीक्षा दिलवाई थी।
बाद में वह फिजिकल देने खुद आ गए थे, जिस पर डीआईजी (भर्ती), नई दिल्ली की तरफ से पत्र मिला था कि जिन अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक हाजिरी मिलान नहीं कर रही है, उन्हें परीक्षा से हटा दिया जाए। इसके बाद राई पुलिस ने अंगूठे का मिलान नहीं होने पर चरखी दादरी के गांव पंडवान के अनिल कुमार, गांव रानीला के योगेश कुमार, पानीपत के गांव जलमाना के सच्चेंद्र और भिवानी के गांव खरक खुर्द निवासी सुरेश पर मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस मामले में गांव गंगाना के प्रदीप, चिढ़ाना के सोनू, गांव भावड़ निवासी मोनू और आजाद, गांव बिधलान के नितिन, झज्जर के गांव लडरावण के धीरज और दुबलधन के देवेंद्र को गिरफ्तार किया था।
देवेंद्र ने खुलासा किया था कि उसने संस्थान चलाने वाले जगबीर से परीक्षा पास कराने को छह लाख में सौदा किया था। साथ ही तीन लाख रुपये एडवांस दिए थे। अब पुलिस ने जगबीर को गिरफ्तार कर लिया है, जिसके बाद पता लगा कि उसने किसी अन्य से परीक्षा पास कराने का सौदा किया था। साथ ही देवेंद्र से मिले तीन लाख रुपये वह परीक्षा देने वाले को दे चुका है।
बाकी के तीन लाख रुपये में से उसे भी हिस्सा मिलना था। अब पुलिस परीक्षा देने वाले का पता लगाएगी। साथ ही एसआई रणबीर सिंह की टीम ने दूसरे से परीक्षा दिलवाने के आरोपी दीपक और विनीत को भी काबू कर लिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक ही व्यक्ति से चार-चार लाख रुपये में परीक्षा पास कराने का सौदा किया था।
किसी ने सीधे रुपये दिए तो किसी की बिचौलियों ने दिलाई परीक्षा
पुलिस जांच में मामले की परतें लगातार खुल रही हैं। मामले में 1000 से ज्यादा आरोपी हो गए है, जिनमें 417 आरोपी ऐसे मिले थे जिनके अंगूठे का मिलान नहीं होने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मामले में परीक्षार्थी और उनके स्थान पर परीक्षा देने वालों की संख्या मिलाकर 834 हो गई है।
साथ ही मामले में कई अन्य आरोपी ऐसे हैं, जिन्होंने बिचौलिया की भूमिका निभाई है। कई आरोपी परीक्षार्थियों के परिजन हैं, जिन्होंने परीक्षा दिलवाने के लिए सेटिंग की थी। पुलिस के अनुसार यह संख्या 1000 से पार हो जाएगी। कई आरोपियों ने परीक्षार्थियों से सीधे पैसे लिए है तो कई ने बिचौलिया बनकर पैसे कमाने के लिए अन्य से परीक्षा दिलवाई। सभी को पुलिस नामजद कर रही है।
सीआरपीएफ कर्मी और अधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच
पुलिस टीम मामले में सीआरपीएफ के कर्मियों और अधिकारियों की संलिप्तता का भी पता लगा रही है। पुलिस ने इस पहलु को भी जांच भी शामिल किया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में किसी की सीधी संलिप्तता नहीं मिली है। उसके बावजूद पुलिस इस मामले में बारीकी से जांच कर रही है।
सीआरपीएफ ग्रुप केंद्र में भर्ती परीक्षा पास कराने के लिए धोखाधड़ी करने के मामले में आरोपियों की संख्या करीब एक हजार है। इस मामले में लगातार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा रहा है और अब तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पता लगाया जाएगा कि इनके तार किसी गिरोह से तो नहीं जुड़े हुए हैं। अभी तक आरोपियों की संख्या लगातार इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि जितने भी आरोपी है, वह अन्य एक से दो आरोपियों तक जुड़े है। रणबीर सिंह, एसआई, थाना राई।