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हरियाणा: एक लाख हड़ताली कर्मचारियों को बड़ी राहत, सर्विस नहीं होगी ब्रेक
Fri, 12 Jun 2020 08:54 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 12 Jun 2020 08:54 PM IST
सार
- सरकार ने हड़ताल की अवधि को लीव ऑफ काइंड ड्यू माना
- मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी विभागाध्यक्षों को आगामी कार्रवाई का दिया निर्देश
- सीएम मनोहर लाल के साथ हुई कर्मचारियों की बैठक का दिखने लगा असर
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
हरियाणा सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। चार दिन की हड़ताल में शामिल लगभग एक लाख कर्मचारियों की सर्विस अब ब्रेक नहीं होगी। 2018 की तीन दिन व 2020 की एक दिन की हड़ताल की अवधि को सरकार ने लीव ऑफ काइंड ड्यू मान लिया है। सरकार ने सामूहिक लीव लेकर हड़ताल पर जाने को अवैध करार देते हुए छुट्टी की बजाय अनुपस्थिति दर्ज करने का निर्णय पूर्व में लिया था। जिसका कर्मचारियों ने कड़ा विरोध किया था।
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सीएम मनोहर लाल के अलावा प्रशासनिक स्तर पर भी वार्ता हुई। बीते दिनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी इस मुद्दे को सर्व कर्मचारी संघ, महासंघ व अन्य संगठनों ने उठाया था। जिस पर सीएम ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था। सीएम के साथ बातचीत का असर एक माह के भीतर ही सामने आ गया है।
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शुक्रवार को मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, आयुक्तों, सचिवों, विभागाध्यक्ष, मंडलायुक्त, डीसी, बोर्ड, निगमों व उपक्रमों के प्रबंध निदेशकों, मुख्य प्रशासकों और निदेशक सूचना व जनसंपर्क विभाग को रोडवेज हड़ताल में 26, 30-31 अक्टूबर, 2018 व 8 जनवरी 2020 की राष्ट्रीय हड़ताल में कर्मचारियों की अनुपस्थिति को लीव ऑफ काइंड ड्यू मानने के निर्देश दिए हैं।
उन्हें इस आधार पर चार दिन की अनुपस्थिति की जगह छुट्टी दर्ज करनी होगी। मुख्य सचिव कार्यालय ने इस मामले में उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं ताकि कर्मचारियों को देय लाभ मिल सकें और उनकी एसीआर भी प्रभावित न हो। चूंकि, 2018 व जनवरी 2020 की सामूहिक लीव अभी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, जिससे अनेक लाभ कर्मचारियों के रुके हुए हैं।
सर्व कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुभाष लांबा, महासचिव सतीश सेठी, सरबत पुनिया, कर्मचारी महासंघ के नेता वीरेंद्र धनखड़, इंद्र सिंह बधाना आदि ने इस फैसले के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने हड़ताल के दौरान के सभी मुकदमे वापस लेने और कच्चे कर्मचारियों की भी लीव पास कर वेतन देने की मांग की है।