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Chandigarh News: बर्खास्त एचसीएस अनिल नागर को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, नियमित जमानत मंजूर

Thu, 21 Nov 2024 08:54 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 21 Nov 2024 08:54 PM IST
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Big relief to dismissed HCS Anil Nagar from High Court, regular bail granted.
जमानत पर रिहा करने की मांग को लेकर नागर ने दाखिल की थी याचिका
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हाईकोर्ट ने कहा-प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद, दोषी करार देने से पहले हिरासत ठीक नहीं


चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में बर्खास्त एचपीएस अधिकारी अनिल नागर को बड़ी राहत देते हुए उनकी नियमित जमानत को मंजूर कर लिया है। हाईकोर्ट ने कहा, पेश किए गए सबूत प्रथम दृष्टया उनकी इस मामले में संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं, लेकिन वह 10 माह से जेल में हैं और दोषी करार देने से पहले जेल में रखना ठीक नहीं है।

नागर को 18 नवंबर, 2021 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कथित रूप से धन स्वीकार करने और 26 सितंबर, 2021 को एचपीएससी की ओर से आयोजित डेंटल सर्जन के पद पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों के अंकों में हेराफेरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोपों के अनुसार ब्यूरो ने अनिल नागर और उनके साथी अश्विनी शर्मा से कुल 3,29,97,000 रुपये बरामद किए थे। यह राशि उम्मीदवारों से एचपीएससी परीक्षाओं में धोखाधड़ी से उत्तीर्ण कराने के लिए स्वीकार की गई थी। बाद में नागर को आपराधिक मामले में जमानत पर रिहा कर दिया गया था, लेकिन ईडी ने उन पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत भी मामला दर्ज कर लिया था।
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अनिल नागर ने एडवोकेट सजल बंसल के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि वह दिसंबर 2023 से जेल में बंद हैं। सह आरोपी अश्विनी कुमार को मिली जमानत को आधार बनाते हुए नागर ने समानता के आधार पर जमानत पर रिहाई की मांग की थी। नागर ने सबूतों की कमी और झूठे आरोप का भी आधार लिया था और तर्क दिया था कि उन्होंने कभी किसी से रिश्वत नहीं मांगी या स्वीकार नहीं की। उनके पास से कोई पैसा या अपराध की आय बरामद नहीं हुई और उनके घर से कथित तौर पर बरामद 12 लाख रुपये का किसी भी तरह की रिश्वत या अपराध की आय से कोई संबंध नहीं है। यह पैसा एक गुप्त निधि राशि थी, जिसे आने वाले सप्ताह में होने वाले साक्षात्कारों के लिए उनके घर में रखा गया था। यह पैसा एचपीएससी की ओर से बनाए गए गुप्त निधि खाते से निकाला गया था। जमानत का कड़ा विरोध करते हुए ईडी ने कहा था कि नागर अश्विनी शर्मा के साथ समानता के आधार पर जमानत के हकदार नहीं हैं, क्योंकि अनिल नागर की गिरफ्तारी के मामले में अनुपालन विधिवत किया था और उनके खिलाफ आरोप कहीं अधिक गंभीर हैं। ईडी के वकील ने आगे कहा कि नागर की गिरफ्तारी न तो दुर्भावनापूर्ण थी और न ही किसी प्रतिशोध की भावना से, उनकी गिरफ्तारी आवश्यक थी।
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