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शहर के आधे उद्योगों को मिलने वाला है बड़ा फायदा, जानिए कैसे!
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 05 May 2016 01:53 AM IST
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शहर की तकरीबन आधे उद्योगों को अब हर साल पर्यावरण संबंधी कंसेंट लेने की झंझट से मुक्ति मिलने वाली है। इन इंडस्ट्रीज को दोबारा कंसेंट लेने की जरूरत होगी और न ही हर साल फीस चुकानी होगी। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों पर यूटी प्रशासन पर्यावरण की दृष्टि से सभी इंडस्ट्रीज को री-केटेगराइज करने जा रहा है। नए दिशा-निर्देशों के हिसाब से चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (सीपीसीसी) इंडस्ट्रीज का सर्वे भी कर चुकी है।
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आगामी दिनों में होने वाली जनरल बॉडी की मीटिंग में नई केटेगरी को हरी झंडी मिल जाएगी। रेड, आरेंज, ग्रीन के बाद अब व्हाइट केटेगरी भी बनाई गई है। व्हाइट केटेगरी की किसी भी इंडस्ट्री को एक बार कंसेंट लेने केबाद दोबारा इसकी जरूरत नहीं होगी। चंडीगढ़ में 2900 के लगभग इंडस्ट्री यूनिट हैं। मानकों के हिसाब से 1400 के करीबइंडस्ट्री यूनिट व्हाइट केटेगरी में आ जाएंगी। कुछ पहले से ही ग्रीन के टेगरी में हैं।
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केटेगरी तय करने के मानक
इंडस्ट्री की केटेगरी को तय करने केलिए केंद्र सरकार ने मानक बनाए हैं। इंडस्ट्री में कितने पानी की खपत होती है। इंडस्ट्री से कितना प्रदूषण उत्पन्न होता है। प्रदूषण कितना घातक है। इस तरह के अलग-अलग मानकों पर परखने के बाद ही इंडस्ट्री की केटेगरी तय होगी। चंडीगढ़ में बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज की बजाए छोटी ज्यादा हैं। जिस कारण यहां पानी की खपत कम ही होती है और प्रदूषण भी कम उत्पन्न होता है। जिस कारण अधिकतर व्हाइट केटेगरी में आ जाएंगी।
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प्रशासन को होगा करोड़ों का राजस्व घाटा
सभी इंडस्ट्रीज को हर साल सीपीसीसी से कंसेंट लेनी होती है। अपने कैपिटल के हिसाब से प्रतिवर्ष फीस भी चुकानी होती है। व्हाइट केटेगरी में आने के बाद इंडस्ट्री इस फीस से बच जाएगी। इंडस्ट्री को जहां लाभ होगा वहीं प्रशासन को प्रतिवर्ष मिलने वाले राजस्व का घाटा होगा।