Punjab BJP: सुनील जाखड़ को ही भाजपा ने क्यों सौंपी पंजाब की कमान? जानें- सियासी संदेश और कितना होगा फायदा
भाजपा अब सुनील जाखड़ को पंजाब में सारथी बना कांग्रेस के किले को ध्वस्त करना चाहती है। वहीं जाट और हिंदू मतदाताओं को भी लामबंद करने की योजना है।
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भाजपा लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी में जुट गई है। एक साल पहले कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले सुनील जाखड़ को पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। पंजाब में जाखड़ का अच्छा राजनीतिक तजुर्बा है। हिंदू और जाट समाज में उनकी अच्छी पकड़ है। सुनील जाखड़ के पास पंजाब की राजनीति में बेहतरीन अनुभव के साथ-साथ गांव और शहर में अच्छी पैठ भी है।
भाजपा में आने से पहले सुनील जाखड़ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष भी रह चुके हैं। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से उनकी अच्छी नजदीकी है। हर विधानसभा में उनका अपना एक काडर है। यही वजह है कि भाजपा अब उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को भुनाने की पूरी तैयारी में है। सुनील जाखड़ को ऐसे ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नहीं बना दिया गया है। इसका एक लंबा राजनीतिक संदेश है। भाजपा अब सुनील जाखड़ को पंजाब में सारथी बना कांग्रेस के किले को ध्वस्त करना चाहती है। वहीं जाट और हिंदू मतदाताओं को भी लामबंद करने की योजना है।
जाखड़ के कंधों पर पार्टी को मजबूत करने का दारोमदार
2022 में भाजपा ने अश्वनी शर्मा की अगुवाई में पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में भाजपा को सात फीसदी से कम वोट मिले थे। वहीं पार्टी महज दो सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी थी। तीन कृषि कानूनों और किसान आंदोलन के बाद पंजाब में भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा। पार्टी की छवि को भी गहरा झटका लगा है। अब बीजेपी सुनील जाखड़ के सहारे इस नुकसान की भरपाई करना चाहती है।
अच्छे वक्ता के रूप में जाखड़ की पहचान
अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद भाजपा अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी है। कांग्रेस के बाद आम आदमी पार्टी बीजेपी के सामने नई चुनौती बनकर उभरी है। ऐसे में पार्टी को एक बेहतरीन चेहरे की जरूरत थी। सुनील जाखड़ एक मंझे हुए राजनेता हैं। उनकी पहचान एक अच्छे वक्ता और तथ्यों के साथ अपनी बात रखने वाले राजनेताओं में होती है। जाखड़ के जरिये भाजपा किसानों की नाराजगी को भी खत्म करने की योजना बनाकर बैठी है।
यह है सुनील जाखड़ का राजनीतिक सफर
सुनील जाखड़ तीन बार विधायक और एक बार सांसद भी रह चुके हैं। वह पहली बार 2002 में अबोहर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे। जहां एक दर्जन गांवों में जाखड़ जाति की अच्छी खासी आबादी है। 2007 और 2012 में वह अबोहर से फिर विधानसभा चुनाव जीते। इसके बाद वह गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव जीतकर सांसद भी बने। सुनील जाखड़ 2017 से 2021 के बीच पंजाब में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष भी रहे हैं लेकिन 2022 विधानसभा चुनाव से छह महीने पहले उनकी जगह नवजोत सिंह सिद्धू को अध्यक्ष बना दिया गया था।