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ऐतिहासिक 'बाबा गुरु नानक महल' को लेकर पाकिस्तान में लिया गया बड़ा फैसला, संरक्षण में लेंगे अब
Fri, 31 May 2019 09:41 AM IST
खुशबू गोयल
अशोक नीर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 31 May 2019 09:41 AM IST
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Guru Nanak Mahal In Pakistan
- फोटो : File Photo
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ऐतिहासिक 'बाबा गुरु नानक महल' में तोड़फोड़ के बाद पनपे विवाद को देखते हुए पाकिस्तान में एक बड़ा फैसला लिया गया है, जिसके तहत हवेली को संरक्षण में लिया जाएगा। पाकिस्तान के जिला नारोवाल के गावं बथान वाला स्थित ‘बाबा नानक महल’ को संरक्षण में लेने के आदेश जारी कर दिए हैं।
महल को गिराए जाने के बाद पैदा हुए विवाद के बाद स्थानीय प्रशासन ने पाकिस्तान एवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) को यह आदेश जारी किया। नारोवाल की सहायक आयुक्त महाम आसिफ मलिक का कहना है कि ईटीपीबी एक दो दिन में इस ऐतिहासिक इमारत को अपने संरक्षण में ले लेगी।
प्रशासन ने ईटीपीबी को निर्देश दिए हैं कि वह इस इमारत के ऐतिहासिक साक्ष्य प्राप्त करने के लिए पुरातत्व विभाग के साथ मिलकर काम करें। इमारत की पृष्ठभूमि यदि इतिहास से जुड़ी है, तो ईटीपीबी इसे संरक्षित कर सकती है।
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महल को गिराए जाने के बाद पैदा हुए विवाद के बाद स्थानीय प्रशासन ने पाकिस्तान एवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) को यह आदेश जारी किया। नारोवाल की सहायक आयुक्त महाम आसिफ मलिक का कहना है कि ईटीपीबी एक दो दिन में इस ऐतिहासिक इमारत को अपने संरक्षण में ले लेगी।
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प्रशासन ने ईटीपीबी को निर्देश दिए हैं कि वह इस इमारत के ऐतिहासिक साक्ष्य प्राप्त करने के लिए पुरातत्व विभाग के साथ मिलकर काम करें। इमारत की पृष्ठभूमि यदि इतिहास से जुड़ी है, तो ईटीपीबी इसे संरक्षित कर सकती है।
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जानकारी के अनुसार, महाम आसिफ मलिक ने स्पष्ट कर दिया है कि इस इमारत को गिराने वाले आरोपियों के विरुद्ध कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। इमारत को गिराए जाने के बाद गठित कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही करवाई करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
नारोवाल के डीसी डॉ. मुहम्मद वहीद असगर ने इमारत का दौरा किया था। डीसी के अनुसार, इस इमारत में न तो कोई गुरुद्वारा था और न इसका बाबा नानक या किसी अन्य धार्मिक शख्सियत के साथ कोई संबंध है। इमारत पुरानी थी, जो धीरे-धीरे गिर रही थी। इसलिए इमारत के मालिक दो भाइयों ने इसे गिरा दिया।
नारोवाल के डीसी डॉ. मुहम्मद वहीद असगर ने इमारत का दौरा किया था। डीसी के अनुसार, इस इमारत में न तो कोई गुरुद्वारा था और न इसका बाबा नानक या किसी अन्य धार्मिक शख्सियत के साथ कोई संबंध है। इमारत पुरानी थी, जो धीरे-धीरे गिर रही थी। इसलिए इमारत के मालिक दो भाइयों ने इसे गिरा दिया।