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हरियाणाः 'जीपीएस इंडेक्सिंग के नाम पर बिजली निगम में 308 करोड़ रुपये का घोटाला'

Fri, 06 Dec 2019 01:41 AM IST
ajay kumar जितेंद्र नरवाल, अमर उजाला, पानीपत (हरियाणा)
जितेंद्र नरवाल, अमर उजाला, पानीपत (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Fri, 06 Dec 2019 01:41 AM IST
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Big allegation on Electricity corporation
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

बिजली निगम के उच्चाधिकारियों पर अब जीपीएस इंडेक्सिंग के नाम पर 308 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा है। हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री को भेजकर आरोपी अधिकारियों के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग की है। हालांकि आरोपी अधिकारी का दावा है कि भारत सरकार ने काम 100 प्रतिशत सही किया है। यह मामला ऊर्जा मंत्री के भी संज्ञान में है। 

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हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने सीएम और ऊर्जा मंत्री को भेजी शिकायत में जिक्र किया है कि बिजली निगम ने प्रदेश के लाइन लॉस को रोकने के लिए निगम ने जीपीएस इंडेक्सिंग डिफरेंशियल का काम जून 2018 में एचसीएल कंपनी को 260 करोड़ रुपये में दिया था। दिसंबर 2018 में पूरी पेमेंट रिलीज कर दी गई। 
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एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि काम पूरा न होने बावजूद निगम सीटीओ संदीप कपूर ने गलत तरीके से काम पूरा होने की रिपोर्ट बनाई, हस्ताक्षर किए व ठेका कंपनी को पेमेंट रिलीज करवा दी। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन कर एकमात्र कोटेशन पर और बिना ई-टेंडरिंग के माइक्रोटेक कंपनी को जून 2018 में 48 करोड़ रुपये का एएमसी टेंडर दे दिया।
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उसके बाद 110 करोड़ की बैंक गारंटी भी रिलीज करवा दी। नियमानुसार 2 लाख रुपये से ज्यादा किसी भी टेंडर के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अनिवार्य है। इस संबंध में निगम के सीएमडी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। 

ये होती है जीपीएस इंडेक्सिंग

बिजली चोरी व लाइन लॉस को रोकने के लिए अब तक मैनुअल इंडेक्सिंग होती थी, जिसके तहत बीते एक साल में करीब एक लाख बिजली चोरी व लॉइन लॉस के केस भी दर्ज किए गए, बावजूद इसके लॉइन लॉस या बिजली चोरी नहीं रुकी। असल जगह पर हो रही चोरी व लॉस को ढूंढने के लिए जीपीएस तकनीक से इंडेक्सिंग की जानी थी। जिससे हर बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर या बिजली मीटर पर चल रहे लाइन लॉस या बिजली चोरी का पता लगाया जा सके। 

भारत सरकार ने दी थी मंजूरी
मैंने अभी तक शिकायत संबंधी कोई पत्र नहीं देखा है। इसलिए इस बारे में कुछ नहीं कह सकता। यह प्रोजेक्ट भारत सरकार का था। भारत सरकार ने इसे बिना किसी आपत्ति के मंजूर किया है। इसमें राज्य सरकार का कुछ नहीं है, बल्कि भारत ने 100 प्रतिशत सही काम किया हुआ है। इसमें कोई खराबी नहीं बताई गई। हम प्रोजेक्टर में भी सभी राज्यों से अच्छी हालत में हैं।  संदीप कपूर, चीफ टेक्निकल ऑफिसर, बिजली निगम 
 
सीएमडी और सीटीओ की मिलीभगत से हुआ घोटाला : मलिक
इतना बड़ा घोटाला सीएमडी शत्रुजीत कपूर व सीटीओ संदीप कपूर की मिलीभगत से हुआ है। पहले 260 करोड़ रुपये का जीपीएस आधारित इंडेक्सिंग डिफरेंशियल के नाम पर घोटाला किया गया फिर इसके लिए 48 करोड़ रुपये की एएमसी भी दे दी गई। धरातल पर काम शुरू किए बिना काम पूरा दिखाकर कंपनी की पेमेंट करवा दी गई। - कृष्ण कुमार मलिक, जनरल सेक्रेटरी, एचपीईए  
 
जल्द करेंगे खुलासा
मामला संज्ञान में हैं। जल्दबाजी में कुछ कहना उचित नहीं होगा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों से बैठक कर बातचीत की जाएगी। अगर कहीं कोई गड़बड़ी हुई तो उसे सामने लाया जाएगा, दोषियों पर उचित कार्रवाई भी होगी। - रणजीत सिंह चौटाला, ऊर्जा मंत्री। 

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