10 सितंबर को पिपली में भाकियू की रैली, सरकार अलर्ट, प्रदेशाध्यक्ष के घर लगा नोटिस

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 08 Sep 2020 12:58 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो।
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

सार

  • 10 सितंबर को कृषि अध्यादेशों के खिलाफ पिपली में होनी है भाकियू की रैली
  • अन्नदाता जागरूकता अभियान के तहत दिया जा रहा किसानों को रैली का निमंत्रण

विस्तार

केंद्र के कृषि अध्यादेशों के खिलाफ गांवों में अन्नदाता जागरूकता अभियान के तहत किसानों को लामबंद किया जा रहा है। इसी कड़ी में हरियाणा के पिपली में भारतीय किसान यूनियन ने 10 सितंबर को रैली का आह्वान किया है। इसके लिए सभी गांवों में किसानों को विरोध रैली में पहुंचने का निमंत्रण दिया जा रहा है। किसानों की इसी प्रस्तावित रैली को लेकर सरकार भी अलर्ट हो गई है।
विज्ञापन

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसानों को उद्यमी बनाने के नाम पर बहकाया जा रहा है। कृषि के संदर्भ में जो अध्यादेश लाए जा रहे हैं, वे किसान हित में नहीं, बल्कि पूंजीपतियों के हित में हैं। उनके अनुसार इन अध्यादेशों से किसान और किसानी बहुत ज्यादा प्रभावित होगी। इसी के विरोध स्वरूप पिपली में 10 सितंबर को किसानों की रैली का एलान किया गया है।
भाकियू अध्यक्ष ने बताया कि सभी गांवों में किसानों को रैली में पहुंचने का निमंत्रण दिया जा रहा है। मगर इस रैली को असफल करने के प्रयास भी शुरू हो गए हैं। उन्होंने बताया कि उनके घर पर नोटिस चस्पा कर दिया गया है। जिसमें स्थानीय प्रशासन ने रैली के आयोजन पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।

व्यापार मंडल करेगा किसान बचाओ, मंडी बचाओ रैली का समर्थन
चंडीगढ़-हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल 10 सितंबर को पिपली में प्रस्तावित किसानों की 'किसान बचाओ-मंडी बचाओ' रैली को समर्थन देगा। व्यापारियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि सरकार नई नीति बनाकर तुरंत प्रभाव से कृषि संबंधी तीनों अध्यादेशों को वापस ले। प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कहा कि केंद्र के तीनों अध्यादेश पूरी तरह से किसान, आढ़ती और मजदूर विरोधी हैं। 

अध्यादेश के हिसाब से कंपनियां एडवांस में ही किसान की फसल खेतों में ही खरीद करने की नियम बनाने व मंडियों में फसल बिकने पर मार्केट फीस लगाने व मंडियों के बाहर फसल बिकने पर मार्केट फीस माफ करने के कानून से तो किसान को अपनी फसल के पूरे दाम नहीं मिलेंगे और मंडियों में फसल नहीं बिकेगी तो मंडियां बंद हो जाएंगी। उनके अनुसार किसानों के इस आंदोलन में व्यापारी वर्ग भी कंधे से कंधा मिलाकर उनके साथ खड़ा है।

यह भी देखें: हमारे चैनल को सब्सक्राइब भी करें-

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X