इस किताब में छिपे हैं अटल बिहारी के कई राज
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1947 में विभाजन का दर्द बयां करती अटल बिहारी बाजपेयी की कविता की कुछ पंक्तियां जब उनके ऊपर सर्वप्रथम शोध करने वाले डॉ. प्रीतम सिंह के मुख से निकली तो यहां वातावरण भारत रत्न की पुरानी स्मृतियों में खो गया। मौका था पुस्तक ‘अटल बिहारी बाजपेयी सृजन और मूल्यांकन’ के विमोचन का।
इसका विमोचन हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने बृहस्पतिवार को किया। डॉ. प्रीतम सिंह द्वारा लिखी गई इस पुस्तक का विमोचन बाजपेयी के जन्मदिवस पर कुरुक्षेत्र में विद्या भारती के संस्कृति भवन में हुआ।
विमोचन से पहले जब भारतरत्न अटल बिहारी बाजपेयी के कविता संग्रह में से कुछ पंक्तियां डॉ. प्रीतम सिंह ने सुनाई तो सभागार का माहौल पूर्व प्रधानमंत्री और उनके जीवन की पुरानी स्मृतियों में डूब गया।
डॉ. प्रीतम सिंह ने किया अटल के जीवन पर शोध
डॉ. प्रीतम सिंह वे पहले शख्स हैं, जिन्होंने बाजपेयी पर शोध करने की पहल की थी। पूरे देश की किसी यूनिवर्सिटी में यह पहला रजिस्ट्रेशन था, जिसे बाजपेयी के जीवन पर शोध के लिए कराया गया था।
पुस्तक के विमोचन के उपरांत डॉ. प्रीतम सिंह ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया उनके जीवन का आज महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि उनकी इच्छा थी कि वे उनके जन्मदिवस पर इस पुस्तक का विमोचन कराएं।
उन्होंने बताया कि इस शोध कार्य के लिए 1999 में कुमाऊं यूनिवर्सिटी नैनीताल ने उनका रजिस्ट्रेशन हुआ था, जबकि यह शोधकार्य 2002 में पूरा हुआ।
अटल पर पीएचडी करने वाले डॉ. प्रीतम सिंह के मुताबिक एक माह पहले उन्होंने उनके जीवन पर आधारित पुस्तक-सृजन और मूल्यांकन का कार्य शुरू किया।
पुस्तक के लेखक डॉ. प्रीतम सिंह का मानना है कि जिस शख्सियत पर उन्होंने इस पुस्तक की रचना की वे उनके ही नहीं, बल्कि करोड़ों देशवासियों के आदर्श हैं। उनके व्यक्तित्व में गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी का स्वरूप प्रतिबिंबित होता है।
अटल जी के ये राज छिपे हैं पुस्तक में
कवि अटल बिहारी बाजपेयी के जीवन एवं दर्शन की झलक इस पुस्तक में उनके जन्म स्थान और वंश परिचय से आगे बढ़ती हुई साहित्य, संवेदना, काव्य के शिल्प पक्ष का अध्ययन कराते हुए समापन की ओर बढ़ती है। कुल 275 पन्नों की इस पुस्तक के कई पृष्ठों पर डॉ. प्रीतम सिंह के शोध कार्य की झलक प्रस्तुत किए गए घटनाक्रमों के रूप में दिखाई देती है।
बाजरे का पुआ और कढ़ी के शौकीन हैं अटल
भारत रत्न बाजपेयी के जन्मदिवस पर सही मायने में डॉ. प्रीतम सिंह की पुस्तक के जरिये कई रोचक पहलू पाठकों के सामने होंगे। अटल की विदेश यात्राओं के साथ उनकी खाने के प्रति दीवानगी की तस्वीर सामने आ जाती है।
पुस्तक में उल्लेख है कि अटल को बाजरे का पुआ और गुझिया बहुत पसंद हैं। ग्वालियर का चूड़ा तो उन्हें इतना अच्छा लगता था कि जब भी वे ग्वालियर जाते तो ढेर सा चूड़ा खरीद लाते। खीर, कढ़ी, पनेछा और गलरा उनकी पसंद रहे हैं।
पीपल के पेड़ के नीचे बनने वाले मुंगौड़े खाने जरूर जाते
ग्वालियर के एमएलबी रोड पर पीपल के पेड़ के नीचे एक बुढ़िया स्वादिष्ट मुंगौड़े बनाया करती थी, जो अटल की खास पसंद रहे। अटल जब भी ग्वालियर जाते उस पेड़ के नीचे मुंगौड़े बनाने वाली बुढ़िया के मुंगौड़े खाए बिना नहीं लौटते।
पहला भाषण भूल गए थे...
अटल बिहारी बाजपेयी की जिस भाषण शैली की दुनिया कायल रही है, वही अटल अपने पहले भाषण में बीच में भूल गए थे। यह वाक्या वड़नगर के उस स्कूल के वार्षिकोत्सव में हुआ, जहां उनके पिता पंडित कृष्ण बिहारी बाजपेयी हेडमास्टर थे। बगैर तैयारी किए मंच पर पहुंचे अटल लड़खड़ा गए और भाषण बीच में ही बंद करना पड़ा।
भाजपा के चंडीगढ़ अध्यक्ष से साझा की अटल की यादें
भाजपा के सेक्टर-33 स्थित कार्यालय में वीरवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिवस मनाया गया। इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष संजय टंडन और सांसद किरण खेर विशेष रूप से उपस्थित थे।
टंडन ने कहा कि हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है कि वाजपेयी के 90वें जन्मदिवस पर केंद्र सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। वे एक अच्छे कवि, रचनाकर, कुशल राजनीतिज्ञ थे। वाजपेयी के प्रयासों से ही भाजपा को आज यह मुकाम हासिल हुआ है।
पुराने वक्त को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार सेक्टर-22 में वाजपेयी की रैली थी। उनका भाषण सुनने के लिए इतनी भीड़ इकट्ठा हो गई थी कि सड़कों पर जाम लग गया।
सांसद किरण खेर ने कहा कि वाजपेयी की स्वच्छ छवि का नतीजा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए देश के लिए जो भी निर्णय लिए, उनका विरोध पार्टी भी नहीं कर सकी।