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भाईजान ने एलांते में लोगों संग देखा अपनी फिल्म का ट्रेलर
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एलांते मॉल में अपनी फिल्म की प्रमोशन के लिए पहुंचे सलमान खान।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। फिल्म बनते ही सबसे पहले पिता को दिखाता हूं, अगर प्रोडक्शन या एक्टिंग में कोई कमी हो तो वे उसकी सटीक समीक्षा करते हैं। उन्हीं की समीक्षा से पता चल जाता है कि फिल्म कितनी हिट होगी। परिवार का फीडबैक मेरे लिए बहुत जरूरी है। उनकी हरी झंडी के बाद ही फिल्म को रिलीज करता हूं। ये सब बातें शहर में मंगलवार को फिल्म अंतिम की प्रमोशन के लिए आए अभिनेता सलमान खान ने बातचीत में साझा कीं। सलमान खान ने एलांते मॉल में मौजूद लोगों के साथ फिल्म का ट्रेलर भी देखा और उनसे रिव्यू देने के लिए कहा।
फिल्म के बारे में सलमान ने बताया कि सरदार पुलिस वाले का किरदार निभाने में शुरुआत के पांच-छह दिन थोड़ी-सी मुश्किलें आई, क्योंकि हमारी पगड़ी हमारे मान-सम्मान से जुड़ा विषय होता है। इसलिए शूट के दौरान भी इसका पूरा ध्यान रखा जाता है। हालांकि हफ्ते के अंदर ही मैंने खुद से पगड़ी पहननी सीख ली थी। पगड़ी पहनने के बाद अपने आप ही एक रुतबा-सा महसूस होने लगता है और यह ही हमें फिल्म में भी चाहिए था। शुरुआत में योजना थी कि फिल्म की शूटिंग चंडीगढ़ इलाके के आसपास किसी गांव में की जाए, क्योंकि इसमें खेती-किसानी से जुड़े दृश्य और उनकी दिनचर्या को दिखाना था। उन दिनों में लॉकडाउन के कारण सफर पर लगी पाबंदी के कारण हमें महाराष्ट्र में ही यहां के जैसे मिलते जुलते गांव और खेत में ही फिल्म शूट करनी पड़ी।
थिएटर का आबाद होना जरूरी
कोरोना महामारी के दौर में सबसे ज्यादा समय थिएटर बंद रहे। इससे लाखों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ। थिएटर का आबाद होना जरूरी है, इससे बहुत-सी जनता जुड़ी हुई है। हालांकि अभी भी थिएटरों को पूरी तरह नहीं खोला गया है, जिससे नुकसान हो रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी फिल्में चल सकती है, लेकिन इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में वो ज्यादा मददगार नहीं होती, क्योंकि लॉकडाउन में फिल्मों के सबसे ज्यादा पाइरेटेड वर्जन लोगों ने देखे। लोगों ने ओटीटी के रिचार्ज न करवाकर पाइरेटेड वर्जन ही सोशल मीडिया पर देख लिए। इससे नुकसान मनोरंजक जगत से जुड़े कलाकारों और टीम को होता है। इसके अलावा थिएटर में कोई फिल्म या नाटक देखने का आनंद हाथ में पकड़े फोन में कभी नहीं मिल सकता।
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प्रशंसकों के साथ लोगों की जरूरत का भी रखता हूं ध्यान
सलमान ने बताया कि प्रशंसकों के साथ लोगों की जरूरतों का भी ध्यान रखता हूं। अस्तपाल और धार्मिक जगहों पर जाना पसंद नहीं करता, क्योंकि ऐसी जगहों पर जाने से लोगों का अपने जरूरी कामों से ध्यान हटकर मेरे ऊपर आ जाता है और मुश्किलें पैदा होती है।
मसाला, एक्शन, रोमांस और बन गई फिल्म
सलमान ने बताया कि फिल्मों में मसाला, एक्शन और रोमांस सभी का थोड़ा-थोड़ा मिक्सचर हो, तभी फिल्म पूरी होती है। मुझे देखना भी ऐसी ही फिल्में पसंद है। इतनी बार पुलिस का किरदार निभाने पर नए किरदार को एकदम अलग दिखाने की कोशिश रहती है। इसके साथ ही ध्यान रखा जाता है कि एक ईमानदार और समाज के लिए काम करने वाले पुलिस के किरदार को दिखाया जाए, जिससे आम जिंदगी में समाज में फैले भ्रष्टाचार को कम किया जा सके और लोग अच्छा करने की प्रेरणा लें।
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फिल्म के बारे में सलमान ने बताया कि सरदार पुलिस वाले का किरदार निभाने में शुरुआत के पांच-छह दिन थोड़ी-सी मुश्किलें आई, क्योंकि हमारी पगड़ी हमारे मान-सम्मान से जुड़ा विषय होता है। इसलिए शूट के दौरान भी इसका पूरा ध्यान रखा जाता है। हालांकि हफ्ते के अंदर ही मैंने खुद से पगड़ी पहननी सीख ली थी। पगड़ी पहनने के बाद अपने आप ही एक रुतबा-सा महसूस होने लगता है और यह ही हमें फिल्म में भी चाहिए था। शुरुआत में योजना थी कि फिल्म की शूटिंग चंडीगढ़ इलाके के आसपास किसी गांव में की जाए, क्योंकि इसमें खेती-किसानी से जुड़े दृश्य और उनकी दिनचर्या को दिखाना था। उन दिनों में लॉकडाउन के कारण सफर पर लगी पाबंदी के कारण हमें महाराष्ट्र में ही यहां के जैसे मिलते जुलते गांव और खेत में ही फिल्म शूट करनी पड़ी।
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थिएटर का आबाद होना जरूरी
कोरोना महामारी के दौर में सबसे ज्यादा समय थिएटर बंद रहे। इससे लाखों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ। थिएटर का आबाद होना जरूरी है, इससे बहुत-सी जनता जुड़ी हुई है। हालांकि अभी भी थिएटरों को पूरी तरह नहीं खोला गया है, जिससे नुकसान हो रहा है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी फिल्में चल सकती है, लेकिन इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में वो ज्यादा मददगार नहीं होती, क्योंकि लॉकडाउन में फिल्मों के सबसे ज्यादा पाइरेटेड वर्जन लोगों ने देखे। लोगों ने ओटीटी के रिचार्ज न करवाकर पाइरेटेड वर्जन ही सोशल मीडिया पर देख लिए। इससे नुकसान मनोरंजक जगत से जुड़े कलाकारों और टीम को होता है। इसके अलावा थिएटर में कोई फिल्म या नाटक देखने का आनंद हाथ में पकड़े फोन में कभी नहीं मिल सकता।
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प्रशंसकों के साथ लोगों की जरूरत का भी रखता हूं ध्यान
सलमान ने बताया कि प्रशंसकों के साथ लोगों की जरूरतों का भी ध्यान रखता हूं। अस्तपाल और धार्मिक जगहों पर जाना पसंद नहीं करता, क्योंकि ऐसी जगहों पर जाने से लोगों का अपने जरूरी कामों से ध्यान हटकर मेरे ऊपर आ जाता है और मुश्किलें पैदा होती है।
मसाला, एक्शन, रोमांस और बन गई फिल्म
सलमान ने बताया कि फिल्मों में मसाला, एक्शन और रोमांस सभी का थोड़ा-थोड़ा मिक्सचर हो, तभी फिल्म पूरी होती है। मुझे देखना भी ऐसी ही फिल्में पसंद है। इतनी बार पुलिस का किरदार निभाने पर नए किरदार को एकदम अलग दिखाने की कोशिश रहती है। इसके साथ ही ध्यान रखा जाता है कि एक ईमानदार और समाज के लिए काम करने वाले पुलिस के किरदार को दिखाया जाए, जिससे आम जिंदगी में समाज में फैले भ्रष्टाचार को कम किया जा सके और लोग अच्छा करने की प्रेरणा लें।