अध्यापकों के आंदोलन में पहुंचे भगवंत मान और हरपाल चीमा, खैरा को लेकर कर दिया बड़ा ऐलान
आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने कहा कि बागी नेता सुखपाल सिंह खैरा ग्रुप के साथ तालमेल जारी है और जल्द ही वह दोबारा पार्टी के अधीन काम करेंगे। मान ने कहा कि इससे पहले पटियाला से सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी और सुच्चा सिंह छोटेपुर समेत अन्य रूठे पार्टी नेताओं के साथ पहले दौर की बातचीत हो चुकी है और यह बातचीत का दौर जल्द ही सिरे चढ़ जाएगा।
वह सोमवार को पटियाला में साझा अध्यापक मोर्चे की अगुवाई में चल रहे अध्यापकों के आंदोलन में समर्थन देने पहुंचे थे। मान ने कहा कि लोकसभा चुनाव में पार्टी के सारे लीडर इकट्ठे होकर काम करेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बरगाड़ी मामले को लेकर इसके बाद भी अगर कोई प्रोग्राम बनाया जाएगा, तो उसमें भी आप बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेगी।
उन्होंने कहा कि इस मामले पर कांग्रेस सरकार ढीली पड़ गई है। इसलिए अकाली दल के हौसले बुलंद हो रहे हैं। मान ने कहा कि कांग्रेसियों को रैलियां करने के बजाय काम करना चाहिए। रैलियां करने का फर्ज विरोधी पार्टियों का है। वहीं नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि अध्यापक धरनों पर बैठे हैं, वहीं उनकी मांगों को मानने के बजाय शिक्षा मंत्री का यह कहना है कि धरनाकारी अध्यापकों के खिलाफ केस दर्ज किए जाएंगे।
यह निंदनीय है। इससे साबित होता है कि शिक्षा मंत्री को शिक्षा लेने की जरूरत है। उन्होंने इस मौके पर पार्टी की तरफ से श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि जल्द ही सारी पार्टी एक मंच पर इकट्ठे नजर आएगी।
आंदोलनकारी अध्यापकों ने बैरंग लौटाए भगवंत मान और हरपाल चीमा
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के गृह जिला पटियाला में साझा अध्यापक मोर्चा पंजाब की अगुवाई में अध्यापकों का मरणव्रत और धरना-प्रदर्शन सोमवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। इन आंदोलनकारी अध्यापकों के समर्थन में सोमवार को धरनास्थल पर नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा और सांसद भगवंत मान पहुंचे लेकिन अध्यापकों ने इनका विरोध किया। जिस कारण दोनों को लौटना पड़ा।
अध्यापकों ने कहा कि आप की ओर से अध्यापकों को दिए समर्थन का मोर्चा स्वागत करता है, लेकिन मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने का दम अध्यापक रखते हैं। वह अपने आंदोलन का सियासीकरण नहीं होने देंगे। अध्यापकों की ओर से भगवंत मान व हरपाल चीमा को धरने में बैठने भी नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर आप को अध्यापकों के साथ हमदर्दी है, तो पार्टी अपने स्तर पर राज्यपाल और कैप्टन सरकार के साथ सीधी टक्कर लेकर अध्यापक वर्ग की मांगों के बारे में जवाब मांगें। मोर्चे ने ऐलान किया कि जब तक अध्यापकों की मांगें नहीं मानी जाती, आंदोलन जारी रहेगा।