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जब श्ाहीद भगत सिंह की सोच का एक सफाई वाला मुरीद बन गया
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Sun, 13 Mar 2016 09:57 AM IST
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प्ले, ड्रामा, नाटक, थियेटर
- फोटो : अमर उजाला
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भगत सिंह की सोच इतनी उम्दा और साफ थी कि एक सफाई वाला भी उनका मुरीद बन गया था। यह कहानी देखने को मिली, छिप्पन तोन पहलन नाटक से। इसका मंचन सतिकार रंगमंच और द राइजिंग थियेटर ग्रुप के कलाकारों ने चंडीगढ़ पंजाब कला भवन में किया। नाटक का लेखन दविंदर दमन और निर्देशन जसबीर गिल ने किया है।
नाटक में कलाकारों ने क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और जेल में सफाई करने वाले कर्मचारी भोगा से समानता के व्यवहार को जीवंत किया गया है। नाटक में भगत सिंह को फांसी देने से पहले लाहौर जेल में बंद होने के समय व घटनाक्रम को बखूबी पेश किया गया। जेलर सफाई कर्मचारी भोगा को जेल की ठीक से सफाई करने के लिए कहता है।
सफाई कर्मचारी के पूछने पर जेलर बताता है कि यहां पर क्रांतिकारी भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को गिरफ्तार करके यहां लाया जा रहा है। कुछ समय बाद जेलर सभी को लेकर आता है और जेल में कैद कर देता है। वहीं जेल में भगत सिंह को सफाई कर्मचारी मिलता है और उसे कर्मचारी से लगाव हो जाता है।
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गरीब दलित होने पर भी भोगा सिंह भगत सिंह सहित सभी क्रांतिकारियों को रोटी खिलाता है। भगत सिंह चाहते थे कि देश में समानता हो सभी को सामना अधिकार मिले, इसके साथ ही वह चाहते थे कि अंग्रेज भारत को आजाद कर दें। लेकिन अंग्रेजों की नजर में भगत सिंह बगावत करने वाले खूंखार अपराधी थे।
इसी कारण भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी की सजा सुनाई जाती है। फांसी से पहले भगत सिंह को काफ ी समझाया भी जाता है लेकिन वह अपने इरादों पर डटे रहते हैं और हंसते-हंसते मौत को गले लगा लेते हैं। नाटक में भगत सिंह का किरदार सोनप्रीत ,मां की भूमिका सतिंदर कौर के अलावा जसबीर गिल,गुरफ तेह सिंह ने जोरदार अभिनय किया।
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नाटक में कलाकारों ने क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और जेल में सफाई करने वाले कर्मचारी भोगा से समानता के व्यवहार को जीवंत किया गया है। नाटक में भगत सिंह को फांसी देने से पहले लाहौर जेल में बंद होने के समय व घटनाक्रम को बखूबी पेश किया गया। जेलर सफाई कर्मचारी भोगा को जेल की ठीक से सफाई करने के लिए कहता है।
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सफाई कर्मचारी के पूछने पर जेलर बताता है कि यहां पर क्रांतिकारी भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को गिरफ्तार करके यहां लाया जा रहा है। कुछ समय बाद जेलर सभी को लेकर आता है और जेल में कैद कर देता है। वहीं जेल में भगत सिंह को सफाई कर्मचारी मिलता है और उसे कर्मचारी से लगाव हो जाता है।
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गरीब दलित होने पर भी भोगा सिंह भगत सिंह सहित सभी क्रांतिकारियों को रोटी खिलाता है। भगत सिंह चाहते थे कि देश में समानता हो सभी को सामना अधिकार मिले, इसके साथ ही वह चाहते थे कि अंग्रेज भारत को आजाद कर दें। लेकिन अंग्रेजों की नजर में भगत सिंह बगावत करने वाले खूंखार अपराधी थे।
इसी कारण भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी की सजा सुनाई जाती है। फांसी से पहले भगत सिंह को काफ ी समझाया भी जाता है लेकिन वह अपने इरादों पर डटे रहते हैं और हंसते-हंसते मौत को गले लगा लेते हैं। नाटक में भगत सिंह का किरदार सोनप्रीत ,मां की भूमिका सतिंदर कौर के अलावा जसबीर गिल,गुरफ तेह सिंह ने जोरदार अभिनय किया।