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बेखौफ आजादी की ओर से कार्यक्रम का आयोजन
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चंडीगढ़। बेखौफ आजादी की ओर से सेक्टर-35 के किसान भवन में शनिवार को जमीन और आत्मसम्मान के लिए महिलाओं का संघर्ष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत ‘बैखौफ आजाद होकर जीना है मुझे, बेखौफ आजाद होकर बोलना है मुझे गीत से हुई।
बेखौफ आजादी की सदस्य अर्पण ने बताया कि महिलाओं के संघर्ष की बात करना एक महत्वपूर्ण विषय है। हम कार्यक्रम के माध्यम से लोगों का ध्यान उन महिलाओं की ओर दिलाना चाहते है जो जमीन और आत्मसम्मान के लिए उत्पीड़न सहते हुए लगातार लड़ाई लड़ रहीं हैं। कार्यक्रम में भोपाल की लेखक और एक्टिविस्ट रिंचिन मुख्य वक्ता रहीं। उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार महिलाओं को आसानी से उनका अधिकार नहीं मिल पाता, उन्हें किस प्रकार अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि समाज में औरत को तब तक अच्छा माना जाता है जब तक वह चुप रहती है। जैसे ही वह अपने लिए लड़ती है तो उसके साथ रेप करके उसे दबा दिया जाता है। ऐसी कई महिलाओं का उन्होंने जिक्र किया। स्त्री जागृति मंच की अमन देओल ने कहा कि दलित औरतों की एक बड़ी आबादी स्कूल तक नहीं पहुंच पाती। 98 प्रतिशत महिलाओं को राजनीति की बिलकुल समझ नहीं है। अशिक्षित होने के कारण वह शोषण से बड़ा मुद्दा पेट की भूख को मानती हैं। महिलाओं को पैदा होते ही पराया धन मान लिया जाता है। शादी होने के बाद पराए घर की समझा जाता है। उन्होंने कहा कि महिला को अपने घर से लेकर समाज तक हमेशा संघर्ष करना पड़ता है।
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बेखौफ आजादी की सदस्य अर्पण ने बताया कि महिलाओं के संघर्ष की बात करना एक महत्वपूर्ण विषय है। हम कार्यक्रम के माध्यम से लोगों का ध्यान उन महिलाओं की ओर दिलाना चाहते है जो जमीन और आत्मसम्मान के लिए उत्पीड़न सहते हुए लगातार लड़ाई लड़ रहीं हैं। कार्यक्रम में भोपाल की लेखक और एक्टिविस्ट रिंचिन मुख्य वक्ता रहीं। उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार महिलाओं को आसानी से उनका अधिकार नहीं मिल पाता, उन्हें किस प्रकार अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि समाज में औरत को तब तक अच्छा माना जाता है जब तक वह चुप रहती है। जैसे ही वह अपने लिए लड़ती है तो उसके साथ रेप करके उसे दबा दिया जाता है। ऐसी कई महिलाओं का उन्होंने जिक्र किया। स्त्री जागृति मंच की अमन देओल ने कहा कि दलित औरतों की एक बड़ी आबादी स्कूल तक नहीं पहुंच पाती। 98 प्रतिशत महिलाओं को राजनीति की बिलकुल समझ नहीं है। अशिक्षित होने के कारण वह शोषण से बड़ा मुद्दा पेट की भूख को मानती हैं। महिलाओं को पैदा होते ही पराया धन मान लिया जाता है। शादी होने के बाद पराए घर की समझा जाता है। उन्होंने कहा कि महिला को अपने घर से लेकर समाज तक हमेशा संघर्ष करना पड़ता है।
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