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बेअंत सिंह के पोते को बनाया डीएसपी, पंजाब सरकार को नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 12 Oct 2017 10:09 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए पंजाब के पूर्व मुख्य मंत्री बेअंत सिंह के पोते गुरइकबाल सिंह को अनुकंपा के आधार पर डीएसपी पद पर नियुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब के गृह सचिव सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
तरनतारन के प्रवीण कुमार द्वारा एडवोकेट आरएस बैंस और एडवोकेट लवनीत ठाकुर के माध्यम से दायर याचिका में हाईकोर्ट को बताया कि सरकार ने बेअंत सिंह के पोते गुरइकबाल सिंह को डीएसपी पद पर नियुक्त करने के लिए नियमों का उलंघन किया है।
याची ने कहा कि इस पद पर नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु 28 वर्ष तय है लेकिन नियुक्ति के समय गुरइकबाल सिंह की आयु 28 वर्ष से अधिक हो चुकी थी। याची के दादा बेअंत सिंह की आतंकवाद के दौर में हत्या कर दी गई थी और इसी आधार पर गुरइकबाल सिंह को अनुकंपा के आधार पर डीएसपी बनाया गया।
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याची ने कहा कि एक तो हत्या के लगभग 20 वर्षों बाद यह नियुक्ति की गई वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी उल्लंघन किया गया है। आदेशों में यह साफ तय किया जा चुका है कि अनुकंपा के आधार पर सिर्फ वास्तविक पीड़ित परिवार के सदस्यों को ही नियुक्ति दी जा सकती है वह भी तब अगर परिवार और आश्रित की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं हो।
इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं है। परिवार के सदस्य सांसद और विधायक हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद मजबूत है। इतना ही नहीं इस नियुक्ति पर विभागीय आपत्ति भी दर्ज की गई थी। बावजूद इसके गुरइकबाल सिंह की इस पद पर नियुक्ति कर दी गई।
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तरनतारन के प्रवीण कुमार द्वारा एडवोकेट आरएस बैंस और एडवोकेट लवनीत ठाकुर के माध्यम से दायर याचिका में हाईकोर्ट को बताया कि सरकार ने बेअंत सिंह के पोते गुरइकबाल सिंह को डीएसपी पद पर नियुक्त करने के लिए नियमों का उलंघन किया है।
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याची ने कहा कि इस पद पर नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु 28 वर्ष तय है लेकिन नियुक्ति के समय गुरइकबाल सिंह की आयु 28 वर्ष से अधिक हो चुकी थी। याची के दादा बेअंत सिंह की आतंकवाद के दौर में हत्या कर दी गई थी और इसी आधार पर गुरइकबाल सिंह को अनुकंपा के आधार पर डीएसपी बनाया गया।
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याची ने कहा कि एक तो हत्या के लगभग 20 वर्षों बाद यह नियुक्ति की गई वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी उल्लंघन किया गया है। आदेशों में यह साफ तय किया जा चुका है कि अनुकंपा के आधार पर सिर्फ वास्तविक पीड़ित परिवार के सदस्यों को ही नियुक्ति दी जा सकती है वह भी तब अगर परिवार और आश्रित की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं हो।
इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं है। परिवार के सदस्य सांसद और विधायक हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद मजबूत है। इतना ही नहीं इस नियुक्ति पर विभागीय आपत्ति भी दर्ज की गई थी। बावजूद इसके गुरइकबाल सिंह की इस पद पर नियुक्ति कर दी गई।