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हो जाएं सचेत... हाइपरटेंशन धीरे-धीरे ले जा रहा मौत के करीब
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चंडीगढ़। उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) जैसी घातक बीमारी चुपके-चुपके लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोगों को पता भी नहीं चल पा रहा कि वे कब इसके कारण मौत के करीब पहुंच जा रहे हैं। कोरोना महामारी के बीच अगर पिछले आंकड़ों पर गौर किया जाए तो पिछले दो वर्षों के दौरान कोविड से हुई मौतों में 95 प्रतिशत मरीज इस साइलेंट किलर से ग्रसित थे। विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी की जानकारी और बचाव के उपाय को लेकर व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है ताकि लोग स्थिति बेकाबू होने से पहले सचेत हो जाएं।
पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. सोनू गोयल ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-5 के आंकड़ों के मुताबिक शहर में राष्ट्रीय औसत की तुलना में उच्च रक्तचाप के केस अधिक हैं। एक सर्वे में एनएफएचएस-4 के निष्कर्षों की तुलना में बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) में भी वृद्धि देखी गई है। 2015-16 में शहर में महिलाओं व पुरुषों में उच्च रक्तचाप क्रमश: 25 और 30.6 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय औसत क्रमश: 21.3 और 24 प्रतिशत था। 2020-21 में जारी एनएफएचएस -5 के आंकड़ों से पता चलता है कि यह प्रतिशत बढ़कर क्रमश: 32 और 41.5 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यह स्थिति चिंताजनक है। उधर, विभाग के प्रमुख प्रो. जेएस ठाकुर का कहना है कि अगर बचाव के उपायों पर गंभीरता नहीं दिखाई गई तो आने वाले कुछ ही समय में स्थिति बेहद गंभीर होगी।
कोविड में टेलीमेडिसिन बनी वरदान
डॉ. सोनू गोयल ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान टेलीमेडिसिन से स्ट्रेंगथनिंग मैनेजमेंट ऑफ हाइपरटेंशन सर्विसेज प्रोजेक्ट से चंडीगढ़ से सटे क्षेत्रों और ग्रामीण पंजाब में अब तक 60 हजार मरीजों को लाभ हुआ है। एक साल पहले पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ विभाग ने यह परियोजना शुरू की थी। इस प्रोजेक्ट के जरिए गांव में उच्च रक्तचाप के बढ़ते मरीजों की संख्या पर काबू पाने के साथ ही उन्हें बचाव के तरीके बताना है।
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ये जानकारी जरूरी
- औसत रक्तचाप 85 से 135 के बीच रहना चाहिए। इससे अधिक होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
- ऐसे मरीज ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करवाएं और खानपान में खास ध्यान रखें।
-उच्च रक्तचाप के मरीज को धूम्रपान और शराब के सेवन से बचना चाहिए।
ये कारण हैं जिम्मेदार
मोटापा बढ़ना, मधुमेह, व्यायाम न करना, जेनेटिक, लगातार तनाव में रहना, धूम्रपान करना, थायराइड।
ये भी जान लें
सामान्य बीपी 120/80 से कम होना चाहिए। इससे ऊपर के स्टेज को प्री-हाइपरटेंशन कहते हैं। यदि बीपी 120 से 139, 80 से 89 के बीच है तो उस स्थिति में भी स्ट्रोक, किडनी, हृदयाघात, मधुमेह और आंखों की बीमारी बढ़ जाती है। 140/90 की स्थिति को हाइपरटेंशन कहते हैं, जो सबसे खतरनाक स्तर होता है।
बीपी की जांच जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार 40 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को ब्लड प्रेशर चेक करवाना चाहिए। यदि सामान्य आता है तो हर छह महीने में चेक करवाते रहना चाहिए। किसी मरीज में प्री-हाइपरटेंशन का स्तर आता है तो वह डॉक्टर से संपर्क करे और हर महीने चेकअप करवाए। बीपी चेक करने से आधा घंटा पहले चाय-कॉफी न पिएं और न धूम्रपान करें।
बचना है तो ये करें
-प्रतिदिन कम से कम 45 मिनट व्यायाम करें। इसमें ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, साइक्लिंग, स्वीमिंग, एरोबिक्स डांस आदि शामिल हैं। वॉक में एक मिनट में 40-50 कदम, ब्रिस्क वॉक में एक मिनट में 75-80 कदम और जॉगिंग में 150-160 कदम चलना चाहिए।
-यदि तेज नहीं चल पाते हैं तो रोजाना कम से कम पांच किलोमीटर चलें। दिल के मरीज हैं तो एक्सरसाइज से पहले डॉक्टर से संपर्क करें।
-नमक की मात्रा कम करनी होगी। सलाद पर नमक न डालें। पापड़ खाने से बचें। दिन भर में आधा चम्मच से ज्यादा नमक न खाएं।
- वजन को नियंत्रण में रखें। बार-बार वजन को चेक करवाते रहें।
- तनाव दूर करने के लिए अपने शौक को पूरा करने के लिए समय निकालें।
- फल और हाई-फाइबर वाली चीजें (गेहूं, ज्वार, बाजरा, जौ, दलिया, स्प्राउट्स, ओट्स, चना, दाल, ब्राउन राइस आदि) ज्यादा खाएं।
इससे कर लें तौबा
फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें (समोसा, टिक्की, ब्रेड पकौड़े आदि), कोल्डड्रिंक, मीठी चीजें, चावल, मैदा, सैचुरेटेड फैट (देसी घी, वनस्पति, मक्खन, नारियल तेल) पैक्ड फूड (सॉस, अचार, चिप्स, कुकीज) के अलावा अंडे का पीला भाग, रेड मीट और फुल क्रीम दूध के सेवन से बचें।
ये अनदेखी हो सकती है आपके लिए खतरनाक
बिना डॉक्टर की सलाह खुद दवा बंद कर देना। नार्मल बीपी आने पर कुछ लोग दोस्तों व परिजनों की सलाह पर दवा नहीं लेते जबकि यह स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है। इससे ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। फॉलोअप में मरीज नहीं आते। कई बार दवा कम करनी होती है तो कई बार दवा बढ़ानी होती है इसलिए जरूरी है कि ब्लड प्रेशर होने पर डॉक्टर के संपर्क में रहे और चेकअप कराते रहें, ताकि स्थिति गंभीर होने की नौबत ही न आए।
नोट- यह जानकारी हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर आहूजा ने दी।
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पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. सोनू गोयल ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-5 के आंकड़ों के मुताबिक शहर में राष्ट्रीय औसत की तुलना में उच्च रक्तचाप के केस अधिक हैं। एक सर्वे में एनएफएचएस-4 के निष्कर्षों की तुलना में बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) में भी वृद्धि देखी गई है। 2015-16 में शहर में महिलाओं व पुरुषों में उच्च रक्तचाप क्रमश: 25 और 30.6 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय औसत क्रमश: 21.3 और 24 प्रतिशत था। 2020-21 में जारी एनएफएचएस -5 के आंकड़ों से पता चलता है कि यह प्रतिशत बढ़कर क्रमश: 32 और 41.5 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यह स्थिति चिंताजनक है। उधर, विभाग के प्रमुख प्रो. जेएस ठाकुर का कहना है कि अगर बचाव के उपायों पर गंभीरता नहीं दिखाई गई तो आने वाले कुछ ही समय में स्थिति बेहद गंभीर होगी।
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कोविड में टेलीमेडिसिन बनी वरदान
डॉ. सोनू गोयल ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान टेलीमेडिसिन से स्ट्रेंगथनिंग मैनेजमेंट ऑफ हाइपरटेंशन सर्विसेज प्रोजेक्ट से चंडीगढ़ से सटे क्षेत्रों और ग्रामीण पंजाब में अब तक 60 हजार मरीजों को लाभ हुआ है। एक साल पहले पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ विभाग ने यह परियोजना शुरू की थी। इस प्रोजेक्ट के जरिए गांव में उच्च रक्तचाप के बढ़ते मरीजों की संख्या पर काबू पाने के साथ ही उन्हें बचाव के तरीके बताना है।
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ये जानकारी जरूरी
- औसत रक्तचाप 85 से 135 के बीच रहना चाहिए। इससे अधिक होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
- ऐसे मरीज ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करवाएं और खानपान में खास ध्यान रखें।
-उच्च रक्तचाप के मरीज को धूम्रपान और शराब के सेवन से बचना चाहिए।
ये कारण हैं जिम्मेदार
मोटापा बढ़ना, मधुमेह, व्यायाम न करना, जेनेटिक, लगातार तनाव में रहना, धूम्रपान करना, थायराइड।
ये भी जान लें
सामान्य बीपी 120/80 से कम होना चाहिए। इससे ऊपर के स्टेज को प्री-हाइपरटेंशन कहते हैं। यदि बीपी 120 से 139, 80 से 89 के बीच है तो उस स्थिति में भी स्ट्रोक, किडनी, हृदयाघात, मधुमेह और आंखों की बीमारी बढ़ जाती है। 140/90 की स्थिति को हाइपरटेंशन कहते हैं, जो सबसे खतरनाक स्तर होता है।
बीपी की जांच जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार 40 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को ब्लड प्रेशर चेक करवाना चाहिए। यदि सामान्य आता है तो हर छह महीने में चेक करवाते रहना चाहिए। किसी मरीज में प्री-हाइपरटेंशन का स्तर आता है तो वह डॉक्टर से संपर्क करे और हर महीने चेकअप करवाए। बीपी चेक करने से आधा घंटा पहले चाय-कॉफी न पिएं और न धूम्रपान करें।
बचना है तो ये करें
-प्रतिदिन कम से कम 45 मिनट व्यायाम करें। इसमें ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, साइक्लिंग, स्वीमिंग, एरोबिक्स डांस आदि शामिल हैं। वॉक में एक मिनट में 40-50 कदम, ब्रिस्क वॉक में एक मिनट में 75-80 कदम और जॉगिंग में 150-160 कदम चलना चाहिए।
-यदि तेज नहीं चल पाते हैं तो रोजाना कम से कम पांच किलोमीटर चलें। दिल के मरीज हैं तो एक्सरसाइज से पहले डॉक्टर से संपर्क करें।
-नमक की मात्रा कम करनी होगी। सलाद पर नमक न डालें। पापड़ खाने से बचें। दिन भर में आधा चम्मच से ज्यादा नमक न खाएं।
- वजन को नियंत्रण में रखें। बार-बार वजन को चेक करवाते रहें।
- तनाव दूर करने के लिए अपने शौक को पूरा करने के लिए समय निकालें।
- फल और हाई-फाइबर वाली चीजें (गेहूं, ज्वार, बाजरा, जौ, दलिया, स्प्राउट्स, ओट्स, चना, दाल, ब्राउन राइस आदि) ज्यादा खाएं।
इससे कर लें तौबा
फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें (समोसा, टिक्की, ब्रेड पकौड़े आदि), कोल्डड्रिंक, मीठी चीजें, चावल, मैदा, सैचुरेटेड फैट (देसी घी, वनस्पति, मक्खन, नारियल तेल) पैक्ड फूड (सॉस, अचार, चिप्स, कुकीज) के अलावा अंडे का पीला भाग, रेड मीट और फुल क्रीम दूध के सेवन से बचें।
ये अनदेखी हो सकती है आपके लिए खतरनाक
बिना डॉक्टर की सलाह खुद दवा बंद कर देना। नार्मल बीपी आने पर कुछ लोग दोस्तों व परिजनों की सलाह पर दवा नहीं लेते जबकि यह स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है। इससे ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। फॉलोअप में मरीज नहीं आते। कई बार दवा कम करनी होती है तो कई बार दवा बढ़ानी होती है इसलिए जरूरी है कि ब्लड प्रेशर होने पर डॉक्टर के संपर्क में रहे और चेकअप कराते रहें, ताकि स्थिति गंभीर होने की नौबत ही न आए।
नोट- यह जानकारी हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर आहूजा ने दी।