फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   BBMB Reduced Water Releasng from Bhakra Dam, Flood in Punjab Villages

बाढ़ से घिरे पंजाब के लोगों को भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड ने दी राहत, घटाई डैम से जल की निकासी

Thu, 22 Aug 2019 12:37 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 22 Aug 2019 12:37 PM IST
विज्ञापन
BBMB Reduced Water Releasng from Bhakra Dam, Flood in Punjab Villages
भाखड़ा बांध
बाढ़ से मुश्किल में घिरे पंजाब के लोगों को भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) ने बड़ी राहत दी है। बीबीएमबी ने मौसम केपूर्वानुमान को देखते हुए भाखड़ा से जल निकासी घटा दी है। अब स्लिप-वे से 41000 क्यूसेक की जगह सिर्फ 18500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा।
विज्ञापन


बीबीएमबी के चेयरमैन डीके शर्मा ने चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि 1988 में पंजाब में आई सबसे बड़ी बाढ़ से भी बड़ा खतरा टाला गया है। 17-18 अगस्त की रात मानसून और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण भाखड़ा बांध में इनफ्लो 311130 क्यूसेक बढ़ गया, जो 1988 से भी ज्यादा था। एकाएक इतने पानी को संभालना मुश्किल था। 19 अगस्त को जलस्तर 1681.33 फीट तक पहुंच गया। जो निर्धारित क्षमता 1680 फीट से ज्यादा था।
विज्ञापन


बांध की सुरक्षा को देखते हुए 19 अगस्त को शाम चार बजे 41000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। 16 अगस्त को जलस्तर 1674 फीट था, तभी से मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए 19000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। शर्मा ने कहा कि हिमाचल में 2011 के बाद यह दूसरी रिकॉर्ड बारिश थी। वहां 358 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई, जिससे खड्डों में बहुत ज्यादा पानी आ गया। अभी भाखड़ा का जलस्तर 1679.3 फीट है, इसे 1676 फीट तक लाया जाएगा। मेट के प्रमुख डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि दस सितंबर तक ज्यादा बारिश केआसार नहीं है। इसलिए फिलहाल खतरा नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सतलुज की निगरानी मुश्किल

डीके शर्मा ने कहा कि सतलुज की निगरानी बहुत मुश्किल है। क्योंकि इसका कैचमेंट एरिया 56500 वर्ग किलोमीटर है, जो पूरे पंजाब के क्षेत्रफल 50307 वर्ग किमी से ज्यादा है। इसमें से 34225 वर्ग किमी तिब्बत में पड़ता है। वहीं, पर्यावरण में बदलाव के कारण मौसम विभाग के लिए भी अब काफी समय पहले अनुमान लगाना मुश्किल है। इस बार भी 3-4 दिन पहले ही पता लगा था।

आईआईटी करेगा मौसम पर स्टडी
डीके शर्मा ने बताया कि बीबीएमबी में दो साल पहले क्लाइमेट चेंज सेल स्थापित किया गया था। जिसका मकसद आने वाले सालों में मौसम में आने वाले बदलवों को स्टडी करना था। अब तक सेल ने जो भी काम किया था वह आईआईटी रोपड़ को सौंप दिया है, आगे वह स्टडी करेंगे।

एक साल में इसके नतीजे आने की उम्मीद है। बीबीएमबी चेयरमैन ने कहा कि भाखड़ा में 1963 से अब तक 24 फीसदी सिल्ट आ गई है। आईआईटी रुड़की से पूछा गया है कि इसका क्या उपयोग हो सकता है। वे यह भी पता लगाएंगे कि कैचमेंट एरिया में कहां से सिल्ट आती है

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed