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खेती पर संकट : डीएपी के लिए घमासान, पांच जिलों में स्टाॅक खत्म, जींद में थाने में बंटी खाद

Mon, 11 Nov 2024 10:13 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 11 Nov 2024 10:13 AM IST
सार

हरियाणा में किसानों को डीएपी खाद के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि प्रदेश के कई जिलों में खाद का स्टॉक ही खत्म हो गया है। खाद के लिए मारामारी इतनी हो रही है कि पुलिस स्टेशन में कड़ी सुरक्षा के बीच खाद को बांटा जा रहा है। 

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DAP stock out in five districts fertilizer distributed in police station in Jind
DAP - Etah - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में डीएपी खाद को लेकर पूरे प्रदेश में घमासान मचा है। हिसार, भिवानी, चरखीदादरी, फतेहाबाद और नारनौल में डीएपी का स्टाॅक खत्म हो गया है। हालत ये कि बिक्री केंद्रों और सहकारी समितियों पर सुबह से ही किसान लाइनों में लग जाते हैं। जींद में खाद थाने में बांटनी पड़ी। हालांकि, सरकार का दावा है कि स्टाॅक में 25 हजार टन खाद का स्टाॅक है, लेकिन जिलों से स्टाॅक खत्म होने की रिपोर्ट आ रही है।

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ऐसे में अगर केंद्र से इसी गति से खाद आपूर्ति हुई तो इस बार गेहूं की बिजाई प्रभावित हो सकती है। या फिर इस बार पछेती बिजाई अधिक हो सकती है। उधर, डीएपी की कमी को लेकर कांग्रेस राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। सुरजेवाला ने कहा कि किसान परेशान है और भाजपा सरकार अनजान है। इसके पलवार में सीएम के प्रेस सचिव प्रवीण आत्रे ने कहा कि सुरजेवाला केवल बयानवीर हैं और उन्हें आंकड़ों की समझ नहीं है।
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सरकार के ही आंकड़ों की बात करें तो अभी तक 1.54 लाख टन खाद की आपूर्ति की जा चुकी है, बावजूद इसके किसानों की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। एक सीजन में डीएपी खाद की खपत ढाई लाख टन तक जाती है, ऐसे में सीधे तौर पर 1 लाख टन तक की खाद की कमी अभी भी बरकरार है और गेहूं की बिजाई अपने जोर पर है। केंद्र से हरियाणा को नवंबर के लिए 1.10 लाख एमटी डीएपी खाद आवंटित किया है। पहले सप्ताह में 41600 एमटी, दूसरे सप्ताह में 40 हजार एमटी और तीसरे सप्ताह में 24 हजार एमटी आना है। लेकिन शे्डयूल के अनुसार खाद कम आ रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है औसतन 15 नवंबर तक गेहूं की बिजाई की जाती है, लेकिन पछेती बिजाई दिसंबर माह तक चलती है। क्योंकि किसानों खाद नहीं मिल पा रहा है तो ऐसे में बिजाई कम होने की आशंका होने लगी है।

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एक दर्जन जिलों में डीएपी का स्टाक नहीं : सुरजेवाला
रणदीप सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को ‘टेली प्रॉम्पटर’ मुख्यमंत्री की संज्ञा देते हुए कहा कि वह किसानों को खाद देने की बजाए जुमले दे रहे हैं। सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल करते हुए पूछा कि विधानसभा चुनाव से पहले सार्वजनिक तौर से वादा कर 8 अक्तूबर से 3100 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी पर धान खरीदने का वादा किया था, लेकिन खरीद क्यों नहीं की गई। दूसरा, डीएपी खाद की कमी से किसान आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन सीएम को किसानों के लिए फुर्सत नहीं है। सुरजेवाला ने कहा कि जिलों में डीएपी उपलब्ध ही नहीं है, फिर भी सीएम झूठ बोल रहे हैं कि स्टाॅक प्रर्याप्त है। सुरजेवाला ने कहा कि प्रदेश में 25 लाख हेक्टेयर यानी 62 लाख एकड़ में गेहूं की फसल बीजी जानी है। अभी तक केवल 1 लाख एकड़ में ही गेहूं की बिजाई हो पाई है।

एसी कमरों में बैठकर बयानवीर न बनें सुरजेवाला : आत्रेय
मुख्यमंत्री के प्रेस सचिव प्रवीन आत्रेय ने सुरजेवाला के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि एसी कमरों में बैठकर सुरजेवाला बयानवीर न बनें, मंडियों में जाकर सरकार द्वारा फसल खरीद के प्रबंध देखें। मुख्यमंत्री ने पद संभालते ही पहला कार्य किसानों को कम वर्षा के कारण हुए नुक़सान की भरपाई के लिए 2000 रुपये प्रति एकड़ का बोनस देकर किया। साढ़े 50 लाख टन से ज्यादा धान खरीदा गया और 11000 करोड़ से अधिक का पैसा किसानों को ट्रांसफ़र हुआ। 9 नंवबर तक 154000 एमटी खाद किसानों को उपलब्ध कराया गया। आत्रेय ने अपील की किसान कम उर्वरक का इस्तेमाल करें।
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