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बठिंडा में होगा भाभी बनाम देवर का कड़ा मुकाबला
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 11 Mar 2014 09:57 AM IST
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बठिंडा की हाई प्रोफाइल सीट पर इस बार भाभी बनाम देवर के बीच जंग होने के आसार है। कई दिन से चल रहे सियासी जोड़तोड़ के बाद आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने बठिंडा सीट का सस्पेंस खत्म करने का फैसला किया है।
पार्टी ने पीपीपी प्रधान मनप्रीत बादल को बठिंडा सीट से समर्थन देने का फैसला कर लिया है। मंगलवार को दोनों पार्टियों के प्रमुख नेता सांझे तौर पर इसका ऐलान करेंगे। इस मौके राष्ट्रीय महासचिव शकील अहमद के भी मौजूद रहने की संभावना है।
बठिंडा सीट पर अकाली दल की मजबूत उम्मीदवार हरसिमरत कौर बादल के मुकाबले कांग्रेस के पास कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं था।
ऐसे में पार्टी ने मनप्रीत बादल से हाथ मिलाने का फैसला किया था। मकसद यह था कि मनप्रीत के चुनाव लड़ने से बादल परिवार इसी सीट पर बंध कर रह जाएगा।
वहीं, बाकी सीटों पर पीपीपी का वोट बैंक कांग्रेस के पक्ष में जाएगा। पर इसमें सबसे बड़ी अड़चन सांझा मोर्चा बन रही थी।
सांझा मोर्चा में पीपीपी के साझीदार सीपीआई, सीपीएम और अकाली दल लोंगोवाल, कांग्रेस के साथ आने को तैयार नहीं थे।
मनप्रीत को लड़ाने का फैसला कई दिन पहले होने के बाद भी इसका ऐलान नहीं हो पा रहा था। क्योंकि पीपीपी की सहयोगी पार्टियां अपना रुख स्पष्ट नहीं कर रही थी।
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उधर, मनप्रीत भी यह सस्पेंस जल्द खत्म करना चाहते थे। जिसके बाद सोमवार को कांग्रेस हाईकमान ने फैसला किया कि सीपीआई का इंतजार अब और नहीं किया जाए।
मनप्रीत को बिना देर किया चुनाव मैदान में उतारा जाए। सीपीआई अपना फैसला बाद में भी बता सकती है। उससे समझौते की उम्मीद में फिलहाल फरीदकोट सीट पर कोई फैसला नहीं किया जाएगा।
सीपीआई की गुटबाजी बनी अड़चन
कांग्रेस द्वारा सीटों के ऐलान में सीपीआई की गुटबाजी ही अड़चन बन गई है। कांग्रेस और सीपीआई के बीच फरीदकोट सीट पर समझौते की बात काफी आगे तक बढ़ चुकी थी।
यह भी तय हो गया था कि सीपीआई जीती तो सांसद यूपीए नहीं, तीसरे फ्रंट में होगा। पर सीपीआई प्रदेश नेतृत्व के दो गुट इसे लेकर आमने-सामने आ गए हैं।
दोनों ही गुट अपने अलग-अलग प्रत्याशी लड़ाना चाहते हैं। एक गुट का कहना है कि कांग्रेस के समर्थन से फरीदकोट सीट पर चुनाव लड़ना चाहिए।
दूसरे गुट का मानना है कि कांग्रेस के साथ समझौता घातक हो सकता है। पार्टी को अकेले ही तीन सीटों फरीदकोट, फिरोजपुर और अमृतसर पर चुनाव लड़ना चाहिए।
अब बात सीपीआई के राष्ट्रीय नेतृत्व के पाले में हैं, जो बारह मार्च को बैठक कर इस पर फैसला लेगा।
राहुल की प्लानिंग को समझौतों ने दिया झटका
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बार जल्द टिकटों के ऐलान की योजना बनाई थी।
कांग्रेस जिन पार्टियों से हाथ मिला रही है, उन्होंने ही राहुल की प्लानिंग को झटका दे दिया है। पहले पीपीपी के सहयोगी दलों की वजह से ऐलान लटका रहा।
अब सीपीआई के फैसले के इंतजार में फरीदकोट सीट लटकी है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व बसपा के साथ दो सीटों की बात तय कर चुका है।
पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने अभी तक फैसला नहीं किया है। जिस कारण कांग्रेस कई सीटों पर असमंजस की स्थिति में है।
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पार्टी ने पीपीपी प्रधान मनप्रीत बादल को बठिंडा सीट से समर्थन देने का फैसला कर लिया है। मंगलवार को दोनों पार्टियों के प्रमुख नेता सांझे तौर पर इसका ऐलान करेंगे। इस मौके राष्ट्रीय महासचिव शकील अहमद के भी मौजूद रहने की संभावना है।
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बठिंडा सीट पर अकाली दल की मजबूत उम्मीदवार हरसिमरत कौर बादल के मुकाबले कांग्रेस के पास कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं था।
ऐसे में पार्टी ने मनप्रीत बादल से हाथ मिलाने का फैसला किया था। मकसद यह था कि मनप्रीत के चुनाव लड़ने से बादल परिवार इसी सीट पर बंध कर रह जाएगा।
वहीं, बाकी सीटों पर पीपीपी का वोट बैंक कांग्रेस के पक्ष में जाएगा। पर इसमें सबसे बड़ी अड़चन सांझा मोर्चा बन रही थी।
सांझा मोर्चा में पीपीपी के साझीदार सीपीआई, सीपीएम और अकाली दल लोंगोवाल, कांग्रेस के साथ आने को तैयार नहीं थे।
मनप्रीत को लड़ाने का फैसला कई दिन पहले होने के बाद भी इसका ऐलान नहीं हो पा रहा था। क्योंकि पीपीपी की सहयोगी पार्टियां अपना रुख स्पष्ट नहीं कर रही थी।
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उधर, मनप्रीत भी यह सस्पेंस जल्द खत्म करना चाहते थे। जिसके बाद सोमवार को कांग्रेस हाईकमान ने फैसला किया कि सीपीआई का इंतजार अब और नहीं किया जाए।
मनप्रीत को बिना देर किया चुनाव मैदान में उतारा जाए। सीपीआई अपना फैसला बाद में भी बता सकती है। उससे समझौते की उम्मीद में फिलहाल फरीदकोट सीट पर कोई फैसला नहीं किया जाएगा।
सीपीआई की गुटबाजी बनी अड़चन
कांग्रेस द्वारा सीटों के ऐलान में सीपीआई की गुटबाजी ही अड़चन बन गई है। कांग्रेस और सीपीआई के बीच फरीदकोट सीट पर समझौते की बात काफी आगे तक बढ़ चुकी थी।
यह भी तय हो गया था कि सीपीआई जीती तो सांसद यूपीए नहीं, तीसरे फ्रंट में होगा। पर सीपीआई प्रदेश नेतृत्व के दो गुट इसे लेकर आमने-सामने आ गए हैं।
दोनों ही गुट अपने अलग-अलग प्रत्याशी लड़ाना चाहते हैं। एक गुट का कहना है कि कांग्रेस के समर्थन से फरीदकोट सीट पर चुनाव लड़ना चाहिए।
दूसरे गुट का मानना है कि कांग्रेस के साथ समझौता घातक हो सकता है। पार्टी को अकेले ही तीन सीटों फरीदकोट, फिरोजपुर और अमृतसर पर चुनाव लड़ना चाहिए।
अब बात सीपीआई के राष्ट्रीय नेतृत्व के पाले में हैं, जो बारह मार्च को बैठक कर इस पर फैसला लेगा।
राहुल की प्लानिंग को समझौतों ने दिया झटका
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बार जल्द टिकटों के ऐलान की योजना बनाई थी।
कांग्रेस जिन पार्टियों से हाथ मिला रही है, उन्होंने ही राहुल की प्लानिंग को झटका दे दिया है। पहले पीपीपी के सहयोगी दलों की वजह से ऐलान लटका रहा।
अब सीपीआई के फैसले के इंतजार में फरीदकोट सीट लटकी है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व बसपा के साथ दो सीटों की बात तय कर चुका है।
पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने अभी तक फैसला नहीं किया है। जिस कारण कांग्रेस कई सीटों पर असमंजस की स्थिति में है।