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अब निगेटिव रोल में दिखेंगे 'बालिका वधू' के बसंत
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 18 Jan 2014 02:16 PM IST
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बालिका वधू में बसंत की भूमिका निभाने वाले सत्यजीत शर्मा आपको निगेटिव रोल में दिखेंगे। शर्मा को फिल्म एक्स्ट्राआर्डिनारी में निगेटिव रोल में देखा जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि जब निर्देशक सुनंदा मित्रा ने उनको इस किरदार के बारे में बताया तो उनको रोल पसंद आया, इसीलिए उन्होंने इसके लिए हां भी कर दी।
एक्स्ट्राआर्डिनारी नारी सशक्तिकरण पर बनाई जा रही फिल्म है। सत्यजीत शर्मा ने कहा कि उनको एक्टिंग से लगाव है। चाहे वह थिएटर में हो या फिर फिल्मों में, उनको काम करने में आनंद आता है।
कितनी मोहब्बत है में डीके पुंज के रोल में भी उन्होंने जान फूंक दी। उन्होंने कहा कि उनको जिंदगी जरा सुकून से बिताने की चाहत रहती है। यही कारण है कि न तो वह ज्यादा फिल्मों की ओर भागते हैं न ही टीवी की ओर।
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जब बालिका वधू साइन किया तो उनको इस सीरियल की थीम बेहतरीन लगी थी। बसंत का किरदार चैलेंजिंग था। सत्यजीत शर्मा ने कहा कि अब लोगों का रुख क्लासिकल फिल्मों पर है।
यही कारण है कि पान सिंह तोमर, चमेली और थीम बेस्ड फिल्मों को आडियंस मिलती है। उन्होंने बताया कि नाटक मित्रो मरजानी में उन्होंने बेटियों के लिए काम किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1986 से शुरू किया गया थिएटर का सफर अब फिल्मों तक बेशक पहुंच गया है पर उनको थिएटर से हमेशा लगाव रहेगा।
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उन्होंने बताया कि जब निर्देशक सुनंदा मित्रा ने उनको इस किरदार के बारे में बताया तो उनको रोल पसंद आया, इसीलिए उन्होंने इसके लिए हां भी कर दी।
एक्स्ट्राआर्डिनारी नारी सशक्तिकरण पर बनाई जा रही फिल्म है। सत्यजीत शर्मा ने कहा कि उनको एक्टिंग से लगाव है। चाहे वह थिएटर में हो या फिर फिल्मों में, उनको काम करने में आनंद आता है।
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कितनी मोहब्बत है में डीके पुंज के रोल में भी उन्होंने जान फूंक दी। उन्होंने कहा कि उनको जिंदगी जरा सुकून से बिताने की चाहत रहती है। यही कारण है कि न तो वह ज्यादा फिल्मों की ओर भागते हैं न ही टीवी की ओर।
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जब बालिका वधू साइन किया तो उनको इस सीरियल की थीम बेहतरीन लगी थी। बसंत का किरदार चैलेंजिंग था। सत्यजीत शर्मा ने कहा कि अब लोगों का रुख क्लासिकल फिल्मों पर है।
यही कारण है कि पान सिंह तोमर, चमेली और थीम बेस्ड फिल्मों को आडियंस मिलती है। उन्होंने बताया कि नाटक मित्रो मरजानी में उन्होंने बेटियों के लिए काम किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1986 से शुरू किया गया थिएटर का सफर अब फिल्मों तक बेशक पहुंच गया है पर उनको थिएटर से हमेशा लगाव रहेगा।