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बैंक ने पति के अकाउंट की जानकारी पत्नी को दी, 'देना' पड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Mon, 09 May 2016 11:51 AM IST
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पति के अकाउंट की जानकारी पत्नी को देना बैंक को महंगा पड़ गया। उपभोक्ता फोरम ने बैंक को सेवा में कोताही का दोषी करार दिया। जिला उपभोक्ता फोरम ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की जीरकपुर शाखा पर पैंतीस हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जिसमें दस हजार रुपये कानूनी खर्च के शामिल है।
इस संबंधी फोरम में जीरकपुर निवासी दीपक गर्ग ने केस दायर किया था। फोरम में दायर की गई याचिका में शिकायकर्ता ने बताया कि उन्होंने एक एसबीआई बैंक जीकरपुर में दस साल पहले खुलवाया था। वह उक्त एकाउंट से अपना सारा लेन देन करते थे। इसी बीच उसकी पत्नी व पति में दोनों में विवाद हो गया। नवंबर 2013 से वह दोनों अलग रहने लग पड़े।
इसी बीच शिकायकर्ता को 2015 को जानकारी मिली कि बैंक ने जनवरी 2013 से दिसंबर व जून-2014 से दिसंबर 2014 की एकाउंट की सारी डिटेल उसकी पत्नी को मुहैया करवा दी। वह भी उनके बिना पूछे कार्रवाई की गई। जो कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित नियमों का उलंघन था। वहीं, उक्त बैंक स्टेटमेंट उसकी पत्नी ने एक कोर्ट मामले में उनके खिलाफ प्रयोग की।
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इसके बाद शिकायकर्ता बैंक के पास पहुंचा। लेकिन बैंक के अधिकारियों ने उसे कोई भी संतुष्ट जवाब नहीं दिया। इसके बाद उसने बैंक के खिलाफ ईमेल से डीजीएम, कस्टर सर्विस एसबीआई को शिकायत भेजी। लेकिन इसके बाद भी बैंक के आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद उन्होंने इस संबंधी कोर्ट में केस दायर किया था।
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इस संबंधी फोरम में जीरकपुर निवासी दीपक गर्ग ने केस दायर किया था। फोरम में दायर की गई याचिका में शिकायकर्ता ने बताया कि उन्होंने एक एसबीआई बैंक जीकरपुर में दस साल पहले खुलवाया था। वह उक्त एकाउंट से अपना सारा लेन देन करते थे। इसी बीच उसकी पत्नी व पति में दोनों में विवाद हो गया। नवंबर 2013 से वह दोनों अलग रहने लग पड़े।
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इसी बीच शिकायकर्ता को 2015 को जानकारी मिली कि बैंक ने जनवरी 2013 से दिसंबर व जून-2014 से दिसंबर 2014 की एकाउंट की सारी डिटेल उसकी पत्नी को मुहैया करवा दी। वह भी उनके बिना पूछे कार्रवाई की गई। जो कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित नियमों का उलंघन था। वहीं, उक्त बैंक स्टेटमेंट उसकी पत्नी ने एक कोर्ट मामले में उनके खिलाफ प्रयोग की।
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इसके बाद शिकायकर्ता बैंक के पास पहुंचा। लेकिन बैंक के अधिकारियों ने उसे कोई भी संतुष्ट जवाब नहीं दिया। इसके बाद उसने बैंक के खिलाफ ईमेल से डीजीएम, कस्टर सर्विस एसबीआई को शिकायत भेजी। लेकिन इसके बाद भी बैंक के आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद उन्होंने इस संबंधी कोर्ट में केस दायर किया था।