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Chandigarh News: पूरे चंडीगढ़ में अपार्टमेंटलाइजेशन पर रोक बरकरार

Sun, 26 Jul 2026 02:01 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 02:01 AM IST
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Ban on apartmentalization remains in force across Chandigarh.
चंडीगढ़। चंडीगढ़ में मकानों के फ्लोर-वाइज बंटवारे और परिवार से बाहर हिस्सेदारी बेचने पर लगी रोक को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन की नीति पर अंतिम मुहर लगा दी है। शीर्ष अदालत ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए साफ किया कि 10 फरवरी 2023 की प्रशासनिक अधिसूचना पूरी तरह कानूनी है और इसमें किसी तरह के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही अब पूरे शहर में आवासीय संपत्तियों के अपार्टमेंटलाइजेशन को लेकर वर्षों से चली आ रही कानूनी अनिश्चितता भी खत्म हो गई है।
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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब केवल हेरिटेज सेक्टर (सेक्टर-1 से 30) ही नहीं बल्कि दक्षिणी सेक्टरों में भी सह-स्वामित्व वाली आवासीय संपत्तियों को फ्लोर-वाइज बांटकर परिवार से बाहर बेचना संभव नहीं होगा। यदि किसी मकान के कई सह-मालिक हैं तो भवन योजना या संशोधित भवन योजना तभी मंजूर होगी जब सभी सह-स्वामी एक ही परिवार के सदस्य हों। संपत्ति का पूरा हिस्सा एक खरीदार को या एक ही परिवार के कई खरीदारों को बेचा जा सकेगा लेकिन अलग-अलग परिवारों को फ्लोर या हिस्से बेचने की अनुमति नहीं होगी।
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यह मामला जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हेरिटेज सेक्टरों में अपार्टमेंटलाइजेशन पर रोक लगाने के फैसले के बाद शुरू हुआ था। उसी फैसले के आधार पर चंडीगढ़ प्रशासन ने 9/10 फरवरी 2023 को सार्वजनिक अधिसूचना जारी कर पूरे शहर में समान नियम लागू कर दिए थे। इस नीति को कई याचिकाओं के माध्यम से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि दक्षिणी सेक्टरों में अपार्टमेंटलाइजेशन की अनुमति दी जानी चाहिए और प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर पूरे शहर में रोक लगा दी है।
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मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि हाईकोर्ट का फैसला पूरी तरह सही है और प्रशासन का कदम कानून के अनुरूप है। अदालत ने माना कि शहर की विशिष्ट हेरिटेज पहचान, नियोजित शहरी विकास और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसी नीति आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि परिवार के भीतर बिक्री, उपहार (गिफ्ट डीड), वसीयत या उत्तराधिकार के माध्यम से संपत्ति का हस्तांतरण जारी रहेगा। हालांकि, इन नियमों से बाहर के मामलों में ट्रांसफर या म्यूटेशन तब तक नहीं होंगे, जब तक हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी अंतिम निर्णय नहीं लेती। अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में यदि नीति में किसी बदलाव की जरूरत महसूस होती है तो चंडीगढ़ हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी और प्रशासन इस पर विचार कर सकते हैं लेकिन किसी भी संशोधन के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी अनिवार्य होगी।
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