पंजाब के सभी अस्पतालों में जल्द बनेंगे आईसीयू, कोरोना संदिग्धों की रिपोर्ट भी आएगी जल्द
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पंजाब के सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने बताया कि सभी जिला अस्पतालों में आधुनिक तकनीक के उपकरणों से लैस आईसीयू जल्द स्थापित किए जाएंगे। सेहत मंत्री ने सभी निजी अस्पतालों को हिदायत दी कि इस वायरस के पीड़ित मरीजों के बारे में रोजाना संबंधित सिविल सर्जन को रिपोर्ट दें। शनिवार को बलबीर सिद्धू ने नवांशहर और होशियारपुर में स्थिति का जायजा लेने के बाद कहा कि जिला अस्पतालों की मांग को पूरा करने के लिए सूबे को 50 नए वेंटिलेटर मिलेंगे।
इसके अलावा इन आईसीयू और वेंटिलेटरों को संभालने के लिए डॉक्टरों को आधुनिक सेहत संस्था द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवांशहर के अस्पताल को पहले ही दो वेंटिलेटर मिल चुके हैं। फिलहाल स्थिति को कंट्रोल करने के लिए नजदीकी जिलों की सहायता से प्रभावशाली प्रबंध किए गए है।
जिला प्रशासन और सेहत विभाग द्वारा विशेष तौर पर नवांशहर और होशियारपुर में कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर संतोष जाहिर करते हुए सेहत मंत्री ने कहा कि अभी कई ओर कदम उठाए जाने की जरूरत है ताकि इस वायरस के फैलाव को रोका जा सके। सेहत मंत्री ने दोनों जिलों के अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता का जायजा लिया
पंजाब में जल्द मिल सकेगी कोरोना के संदिग्धों की जांच रिपोर्ट
पंजाब सरकार ने कोरोना के संदिग्ध मरीजों के टेस्ट करने के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज पटियाला और अमृतसर में उपलब्ध क्षमता को दोगुना कर दिया है। यह जानकारी शनिवार को मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान संबंधी विभाग के प्रमुख सचिव डीके तिवारी ने दी।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी के मुकाबले के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी की गई है, जिसके अंतर्गत सरकारी मेडिकल कॉलेज पटियाला और अमृतसर में बहुत कम समय में टेस्ट करने वाली एक-एक अतिरिक्त पीसीआर मशीन लगा दी गई है।
इस तरह उक्त दोनों स्थानों पर इस बीमारी के टेस्ट करने की क्षमता दोगुनी हो गई है। इसके अलावा टेस्ट करने वाले स्टाफ की शिफ्टें भी बढ़ा दी गई हैं ताकि संदिग्ध मरीजों की जांच रिपोर्ट जल्द आ सके और बीमारी की पुष्टि होने पर मरीज का इलाज तुरंत शुरू किया जा सके।
उन्होंने बताया कि आईआईटी रोपड़ से भी एक बायो सेफ्टी उपकरण मेडिकल कॉलेज पटियाला में शिफ्ट करवा दिया गया है ताकि टेस्ट करने की क्षमता में और इजाफा हो सके। तिवारी ने बताया कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग हफ्ते के सात दिन 24 घंटे काम कर रहा है और रोजाना स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए तीनों ही मेडिकल कॉलेजों से रिपोर्ट ली जा रही है।