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लॉटरी खरीदकर फेंक दी थी, उसमें निकले डेढ़ करोड़

Mon, 25 Jan 2016 03:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डबवाली (सिरसा)।
ब्यूरो/अमर उजाला, डबवाली (सिरसा)। Updated Mon, 25 Jan 2016 03:32 PM IST
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bahadur singh win lohri bumber lottary price one and half crore

देने वाला जब भी देता, देता छप्पर फाड़ के। यह कहावत वाटर सप्लाई एंड सेनिटेशन विभाग पंजाब में बतौर जूनियर टेक्निशियन (जेटी) के पदपर कार्यरत बहादर सिंह पर बिल्कुल सटीक बैठती है।

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जिस लॉटरी की टिकट खरीदने के बाद उसने उसे घर में फेंक दिया। उसी में बहादर के डेढ़ करोड़ रुपये निकल आए। जब लॉटरी लग गई तो टिकट ढूंढने में घंटों लग गए।

स्टूडेंट लाइफ में जेब खर्च से लॉटरी की टिकट खरीदने वाले इस शख्स को पंजाब स्टेट लोहड़ी बंपर ने करोड़पति बना दिया। वहीं दूसरी ओर फतेहाबाद निवासी का भी एक जैसा डिजिट आया, लेकिन वह सीरिज में गच्चा खा गया।
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दोस्त ने कहा था, खरीद लो लोहड़ी की लाटरी  

पंजाब के गांव घुमियारा (श्री मुक्तसर साहिब) स्थित जलघर में कार्यरत बहादुर सिंह अप्रैल 1982 से लॉटरी की टिकट खरीदते आ रहे हैं। एक बार पांच हजार तथा दूसरी दफा अलमारी निकलने के बाद उन्हें कोई पुरस्कार नहीं निकला। आखिरकार दो साल पहले पैसे की बर्बादी मानते हुए उसने टिकट खरीदना बंद कर दिया। 20 जनवरी 2016 को साथी कर्मचारी हजारी लाल निवासी डबवाली के पास सिरसा से एक मित्र की कॉल आई कि वह लोहड़ी बंपर की टिकट खरीद ले। मित्र के साथ वह भी शहर से सटी मंडी किलियांवाली में मदन लॉटरी सेंटर पर आ गया। सेंटर मालिक मदन लाल के उकसाने पर उसने भी टिकट खरीद ली। घर जाकर टिकट को कागजों में फेंक दिया।
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21 जनवरी 2016 को आया परिणाम जानने के लिए वह नहीं गया। सेंटर संचालक ने कॉल करके उसे बताया कि लोहड़ी बंपर का पहला ईनाम डेढ़ करोड़ रुपये उसे मिला है। वह अपनी टिकट संभाल ले। जैसे ही बहादुर सिंह को यह खबर मिली, वह अवाक रह गया। फिर उसकी बीवी कुलविंद्र कौर, बेटियां संदीप कौर, अर्शदीप कौर तथा बेटा अनमोल टिकट ढूंढने में जुट गए, क्योंकि उन्होंने टिकट फेंक दिया था। पूरा घर खंगाल मारा। टिकट नहीं मिली।

करीब दो घंटे बाद कागजों में लॉटरी की टिकट मिली। टिकट संभालने के बाद गांव लौहारा में किसी भी ग्रामीण को खबर तक नहीं लगने दी। आखिरकार रविवार को सेंटर संचालक ढोल-नगाड़ों के साथ गांव पहुंचा, तब जाकर ग्रामीणों को बहादुर सिंह के करोड़पति बनने का पता चला।

चार दिन बाद सामने आया
करोड़पति बनने के बाद बहादर सिंह चार दिन बाद सामने आया। उसके अनुसार रिश्तेदारी में शादी समारोह था। उसका भाग लेना जरूरी था। वरना रिश्तेदार कहते अहंकार आ गया है। इसीलिए दूरी बनाए रखी। आज जैसे ही वह अपने घर पहुंचा तो ग्रामीण उसे बधाइयां देने लगे।

बेटी की शादी धूमधाम से करूंगा
बहादर सिंह ने बताया कि उसके पास महज नौ कनाल जमीन है। उसकी बड़ी बेटी संदीप कौर ने बीएससी के बाद एमसीए की हुई है। पिछले दो सालों से वह उसके लिए लड़का तलाश कर रहा था। शायद, उसकी किस्मत है कि शादी से पहले वह धन खींच लाई। वह अपनी बेटी की शादी धूमधाम से करेगा। बहादर सिंह के अनुसार वह 53 वर्ष का है। उसकी सर्विस में कुछ साल शेष हैं। ऐसे में लॉटरी निकलना उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वह पैसे को खराब नहीं करेगा। अपनी बेटियों तथा बेटे का भविष्य सुधारने में लगाएगा। भविष्य के लिए योजनात्मक ढंग से कार्य करेगा।


फतेहाबाद निवासी चूका
फतेहाबाद के गांव हजरावां खुर्द के रहने वाले मंगत राम की टिकट का डिजिट भी 979820 था। लेकिन सीरिज ए थी। डेढ़ करोड़ बी-979820 को निकला है। जबकि मंगत राम को एक लाख रुपये निकला है।

मंगत राम के अनुसार वह अक्सर डबवाली में आता-जाता है। उसने उधार में पैसे लेकर लॉटरी की टिकट खरीदी थी। किस्मत से सीरिज बदल गई।

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