{"_id":"a28a467f8a88453db1e96a7335a8ba91","slug":"bad-news-of-temprory-employes","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्थाई कर्मचारियों के लिए बुरी हो सकती है ये खबर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्थाई कर्मचारियों के लिए बुरी हो सकती है ये खबर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 13 Feb 2014 01:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा सरकार के कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने का लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है। अलबत्ता, जो कर्मचारी काफी पुराने हैं, उन्हें आंशिक लाभ मिल सकता है।
विज्ञापन
कर्मचारियों की हड़ताल के बाद मुख्य सचिव एससी चौधरी के साथ कर्मचारी तालमेल समिति के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में तीन कमेटियां गठित की गई थी।
एक मुख्य मांग कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने से संबंधित थी। बिजली वितरण निगमों के अध्यक्ष अनुराग अग्रवाल की अध्यक्षता में रेगुलराइजेशन पालिसी से संबंधित कमेटी गठित की गई थी।
विज्ञापन
कमेटी ने कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी तो उन्होंने हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और पंजाब की नीतियों की प्रतियां दी थी। साथ में मांग की थी कि वर्ष 2011 में सरकार ने जो रेगुलराइजेशन पालिसी जारी की थी, उसमें एक शर्त थी जिसके कारण काफी कर्मचारी पक्के नहीं हो सके थे।
विज्ञापन
वह शर्त थी कि स्वीकृत पदों पर की गई भर्ती रोजगार कार्यालयों या विभागीय चयन समिति के जरिए चुने गए कर्मचारी होने चाहिए थे। नेताओं की मांग की थी यह शर्त हटाई जाए। अनुराग अग्रवाल ने उन्हें भरोसा दिया था कि इस पर गौर किया जा सकता है।
उसके बाद अनुराग अग्रवाल ने दो बार अंदरूनी बैठक कर ली है। सूत्र बता रहे हैं कि 2011 की नीति में ही कुछ संशोधन करने वाली रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
अग्रवाल कमेटी यह रिपोर्ट जल्द ही मुख्य सचिव को सौंपेगी। इसके अलावा कर्मचारी नेताओं सुभाष लांबा, जीवन सिंह और अन्य ने मांग की थी कि पांच साल या इससे कम अवधि वालेकच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के लिए रेगुलराइजेशन पालिसी बनाई जाए। सूत्रों के अनुसार प्रदेश सरकार फिलहाल इस मांग पर गौर नहीं कर रही है।