घाटे में लुधियाना के होजरी कारोबारी, कोरोना और किसान आंदोलन से 3000 करोड़ का नुकसान
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उत्तर भारत में होजरी उत्पादों का हब माने जाने वाले लुधियाना के कारोबारी लगातार घाटे में हैं। पहले कोरोना और फिर किसान आंदोलन के कारण मालगाड़ियों का संचालन ठप होने से होजरी कारोबारियों को सिर्फ सर्दी के सीजन में ही तीन हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है।
कोरोना के कारण पिछले साल के मुकाबले इस बार सिर्फ 50 फीसदी ही होजरी उत्पाद तैयार हुआ है लेकिन मालगाड़ियां न चलने से वह भी डंप हो गया। फिलहाल कोई राहत दिखाई नहीं दे रही है क्योंकि कोरोना संक्रमण के कारण संकट अभी टला नहीं है। दूसरी तरफ किसान आंदोलन के कारण मालगाड़ियां चलने के भी आसार नहीं हैं।
अब होजरी कारोबारी गर्मी के सीजन की तैयारी में जुट गए हैं। लुधियाना में होजरी का कारोबार सर्दी में सिर्फ दो माह के लिए चलता है, जबकि गर्मी का सीजन दस माह तक चलता है। सर्दी के सीजन की तैयारी होजरी कारोबारी मार्च से शुरू कर देते हैं।
लॉकडाउन लगने के कारण सर्दी के उत्पादों को तैयार करने का काम शुरू नहीं हो सका। लॉकडाउन के साथ-साथ सरकार ने इंडस्ट्री को खोलना शुरू तो किया, लेकिन इसमें भी पहले उस इंडस्ट्री को इजाजत दी गई, जो इंडस्ट्री एरिया में लगी थी। लुधियाना में 80 फीसदी होजरी मिक्स लैंड एरिया में है। ऐसे में सरकार ने उसे काफी समय बाद खोलने की इजाजत दी।
इसके बाद होजरी कारोबारियों ने सर्दी के उत्पादों को तेजी से तैयार करना शुरू किया लेकिन जब उत्पादों को भेजने का समय आया तो किसान आंदोलन शुरू हो गया। बीते डेढ़ माह से प्रदेश में मालगाड़ियों के पहिए थमे हुए हैं। कारोबारियों का ज्यादातर माल डंप हो चुका है। किसी तरह सड़क मार्ग से माल भेजा जा रहा है लेकिन यह काफी महंगा पड़ रहा है। वहीं गर्मी के उत्पादों को तैयार करने का भी संकट है क्योंकि कच्चा माल न मिलने के कारण धागे के दाम 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं।
गर्मी के सीजन को लेकर असमंजस की स्थिति
निटवियर अपैरल एक्सपोर्टर्स आर्गनाइजेशन के अध्यक्ष हरीश दुआ का कहना है कि सर्दी के सीजन में इस बार 50 फीसदी उत्पादन ही हो पाया है, अब गर्मी के सीजन की तैयारी शुरू हो चुकी है। फिलहाल तो असमंजस की स्थिति ही बनी हुई है। हम ऑर्डर पर माल तैयार करते हैं। फ्रांस और यूके में दोबारा लॉकडाउन की स्थिति बन गई है। वहां से ऑर्डर कम हो चुके हैं। स्थानीय स्तर पर भी यही हाल है। मालगाड़ियां न चलने से तैयार उत्पादों का निर्यात कैसे किया जाएगा, यह अभी सबसे बड़ा सवाल है।
किसान आंदोलन को पंजाब सरकार ने सीधे तौर पर अपना समर्थन देकर खुद अपने पांव पर कुल्हाड़ी पर मारी है। इससे राज्य सरकार के राजस्व के साथ-साथ कारोबारियों को सीधा नुकसान हुआ है। अगर मालगाड़ियां शुरू भी हो जाए तो इसका असर अगले सीजन पर पड़ना तय है। अगर किसी व्यक्ति का माल समय पर इस बार नहीं पहुंचा तो वह किसी अन्य जगह से माल खरीद लेगा। अगले साल वह हमारे पास माल खरीदने क्यों आएगा। -राहुल वर्मा, होजरी कारोबारी, लुधियाना