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कोई नहीं लेना चाहता इस शख्स का शव, पत्नी और बेटी भी नहीं, गुनाह ही ऐसा किया
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला(पंजाब)
Updated Sun, 17 Jun 2018 09:53 AM IST
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बेबी किलर दरबारा सिंह
देखिए इस शख्स की जेल में मौत हो गई, लेकिन कोई इसका शव नहीं लेना चाहता। पत्नी और बेटी ने भी इंकार कर दिया, क्योंकि गुनाह ही ऐसा किया था। ये शख्स कोई और नहीं, बल्कि 17 मासूम बच्चियों का हत्यारा बेबी किलर दरबारा सिंह है। शनिवार को पटियाला की सेंट्रल जेल में इसकी मौत हो गई। मौत की वजह गुप्त रोग बताया जा रहा है।
जेल सुपरिंटेंडेंट राजन कपूर ने जब शव को लेके लिए दरबारा सिंह की पत्नी से संपर्क किया, तो उन्होंने उसका शव लेने से मना कर दिया। जेल प्रशासन ही अब उसका संस्कार करवाएगा। 76 साल का दरबारा सिंह पिछले दस सालों से पटियाला के सेंट्रल जेल में बंद था। जेल में उसकी तबीयत बिगड़ने पर राजिंदरा अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। यहां इलाज के दौरान उसकी 6 जून को मौत हो गई।
दरबारा की पत्नी ने 14 साल पहले ही कहा था कि वह उसका पति कहलाने के लायक नहीं। वह कभी करवाचौथ का व्रत नहीं रखेगी। अगर जेल में दरबारा की मौत भी हो गई तो वह उसकी लाश नहीं लेगी, आज भी वह उस पर कायम रही। दरबारा सिंह तीन बच्चों का पिता है, लेकिन उसकी पत्नी ने उसकी घिनौनी हरकतों से तंग आकर उसे घर से निकाल दिया था।
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बता दें कि दरबारा सिंह ने साल 2004 में 17 बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया और उनकी हत्या कर दी थी। इनमें से अधिकतर बच्चियां 10 साल से कम उम्र की थीं। इसके लिए उसे 7 जनवरी 2008 को फांसी की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया था।
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जेल सुपरिंटेंडेंट राजन कपूर ने जब शव को लेके लिए दरबारा सिंह की पत्नी से संपर्क किया, तो उन्होंने उसका शव लेने से मना कर दिया। जेल प्रशासन ही अब उसका संस्कार करवाएगा। 76 साल का दरबारा सिंह पिछले दस सालों से पटियाला के सेंट्रल जेल में बंद था। जेल में उसकी तबीयत बिगड़ने पर राजिंदरा अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। यहां इलाज के दौरान उसकी 6 जून को मौत हो गई।
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दरबारा की पत्नी ने 14 साल पहले ही कहा था कि वह उसका पति कहलाने के लायक नहीं। वह कभी करवाचौथ का व्रत नहीं रखेगी। अगर जेल में दरबारा की मौत भी हो गई तो वह उसकी लाश नहीं लेगी, आज भी वह उस पर कायम रही। दरबारा सिंह तीन बच्चों का पिता है, लेकिन उसकी पत्नी ने उसकी घिनौनी हरकतों से तंग आकर उसे घर से निकाल दिया था।
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बता दें कि दरबारा सिंह ने साल 2004 में 17 बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया और उनकी हत्या कर दी थी। इनमें से अधिकतर बच्चियां 10 साल से कम उम्र की थीं। इसके लिए उसे 7 जनवरी 2008 को फांसी की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया था।
बच्चों को टॉफियों का लालच दे फंसाता था
बेबी किलर दरबारा सिंह
अमृतसर के गांव जल्लोवाल खेड़ा में पैदा हुआ दरबारा 2004 में चर्चा में आया, जब पुलिस ने 17 बच्चों के मर्डर केस में उसे पकड़ लिया। उसने जालंधर के तत्कालीन एसएसपी के सामने दिए गए बयान में कहा कि अगर उसे पुलिस ने इतनी जल्दी गिरफ्तार न किया होता तो वह और भी बच्चों को अपना शिकार बनाता।
दरबारा सिंह हमेशा साइकिल पर घूमता था और उसके बैग में टॉफियां होती थीं। टॉफी का लालच देकर ही वह मासूम बच्चों को अपने जाल में फंसाता था। उन्हें सुनसान जगह ले जाकर उनके साथ दरिंदगी करके मार देता था। दरबारा ने कबूल किया था कि उसने 15 लड़कियां और दो लड़कों को मौत के घाट उतारा है।
सबूतों के अभाव में दरबारा कुछ केसों में बरी हो गया था, मगर मोहम्मद वकील के बेटे खुर्शीद (5) और मोहम्मद रज्जाक की बेटी रोकू (6) की हत्या में 7 नवंबर 2008 को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज आईएस बाजवा ने फांसी की सजा सुना दी। बाद में फांसी उम्रकैद में तब्दील कर उसे पटियाला जेल भेज दिया गया।
सुबह 10 से 12.30 बजे के बीच बनाता था शिकार
दरबारा सुबह 10 से 12.30 बजे के बीच ही बच्चों को दबोचता था, क्योंकि इस वक्त मजदूर काम पर चले जाते थे और उनके बच्चे अकेले होते थे। तब कपूरथला में 7 महीने में करीब 23 बच्चे गायब हुए थे, जिनमें से 6 को पुलिस ने बरामद कर लिया था। सभी की उम्र 10 साल से कम थी।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने 17 बच्चों की हत्या की बात कबूली थी। इनमें से 15 लड़कियां और दो लड़के थे। लाशें रैया-खडूर साहिब रोड पर पुल के पास दफना दी थीं। पुलिस को यह भी शक रहा कि उसने कई पीड़ितों के नाम नहीं बताए। दरबारा टॉफी, मिठाई आदि का लालच देकर बच्चों को फंसाता था। 3 बच्चों के पिता दरबारा सिंह को पत्नी ने घर से निकाल दिया था।
दरबारा सिंह हमेशा साइकिल पर घूमता था और उसके बैग में टॉफियां होती थीं। टॉफी का लालच देकर ही वह मासूम बच्चों को अपने जाल में फंसाता था। उन्हें सुनसान जगह ले जाकर उनके साथ दरिंदगी करके मार देता था। दरबारा ने कबूल किया था कि उसने 15 लड़कियां और दो लड़कों को मौत के घाट उतारा है।
सबूतों के अभाव में दरबारा कुछ केसों में बरी हो गया था, मगर मोहम्मद वकील के बेटे खुर्शीद (5) और मोहम्मद रज्जाक की बेटी रोकू (6) की हत्या में 7 नवंबर 2008 को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज आईएस बाजवा ने फांसी की सजा सुना दी। बाद में फांसी उम्रकैद में तब्दील कर उसे पटियाला जेल भेज दिया गया।
सुबह 10 से 12.30 बजे के बीच बनाता था शिकार
दरबारा सुबह 10 से 12.30 बजे के बीच ही बच्चों को दबोचता था, क्योंकि इस वक्त मजदूर काम पर चले जाते थे और उनके बच्चे अकेले होते थे। तब कपूरथला में 7 महीने में करीब 23 बच्चे गायब हुए थे, जिनमें से 6 को पुलिस ने बरामद कर लिया था। सभी की उम्र 10 साल से कम थी।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने 17 बच्चों की हत्या की बात कबूली थी। इनमें से 15 लड़कियां और दो लड़के थे। लाशें रैया-खडूर साहिब रोड पर पुल के पास दफना दी थीं। पुलिस को यह भी शक रहा कि उसने कई पीड़ितों के नाम नहीं बताए। दरबारा टॉफी, मिठाई आदि का लालच देकर बच्चों को फंसाता था। 3 बच्चों के पिता दरबारा सिंह को पत्नी ने घर से निकाल दिया था।
एयरफोर्स स्टेशन में करता था नौकरी
बेबी किलर दरबारा सिंह
दरबारा 1975 में एयरफोर्स स्टेशन पर जॉब करता था। उस पर आरोप लगा था कि उसने एक मेजर की फैमिली पर हैंड ग्रेनेड फेंक दिया था। फैमिली बच गई थी। केस में दरबारा बरी हो गया, पर उसे जॉब नहीं मिली। फिर कपूरथला की फैक्ट्री में बच्ची की हत्या दोष में 30 साल की कैद हुई पर अच्छे आचरण को लेकर 10 साल बाद सजा माफ हो गई। उसने दावा किया था कि उसे गलत सजा हुई। केस में एक बच्ची ने झूठ बोला था। तब से उसे मजदूरों के बच्चों से नफरत हो गई थी। इसलिए वह बेबी किलर बन गया।
1994 में किया था मकान मालिक पर अटैक
दरबारा सिंह 1993 में मॉडल हाउस के केपी नगर में राज कुमार के घर में किराये पर रहता था। दरबारा सनकी था और रोज शराब के नशे में घर आकर हंगामा करता था। इसलिए राज कुमार ने उसे 22 जनवरी 1994 को घर खाली करने के लिए कहा था तो उसने दातर से हमला करके उसे जख्मी कर दिया था। इस केस में 5 नवंबर 2016 को कोर्ट ने दरबारा सिंह को तीन साल की कैद सुनाई थी।
1994 में किया था मकान मालिक पर अटैक
दरबारा सिंह 1993 में मॉडल हाउस के केपी नगर में राज कुमार के घर में किराये पर रहता था। दरबारा सनकी था और रोज शराब के नशे में घर आकर हंगामा करता था। इसलिए राज कुमार ने उसे 22 जनवरी 1994 को घर खाली करने के लिए कहा था तो उसने दातर से हमला करके उसे जख्मी कर दिया था। इस केस में 5 नवंबर 2016 को कोर्ट ने दरबारा सिंह को तीन साल की कैद सुनाई थी।