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बच्ची ने कोख से दी मां को आवाज, भावुक हो गए दर्शक

Sat, 26 Nov 2016 01:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 26 Nov 2016 01:39 AM IST
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Baby from the womb of the mother's voice, emotional audience
नाटक का मंचन - फोटो : अमर उजाला

मां मेरे इन नन्हें हाथों को देखो, बिल्कुल पापा पर गए हैं और ये नाक कान तो बिल्कुल तुम्हारे जैसे हैं। मां मैं इस दुनिया को खुली आंखों से देखना चाहती हूं। प्लीज मुझे जीने दो... प्लीज मुझे जीने दो मां...।’ 

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पंजाब कला भवन में शुक्रवार को मंचित नाटक ‘मां मुझे जीने दो में’ जब एक बच्ची ने अपनी मां की कोख में से ये वाक्य बोले, तो वहां मौजूद सभी दर्शकों की आंखें भावुक हो गई। इस नाटक को मुंबई की संस्कार भारती संस्था के 27 कलाकारों ने पेश किया। वहीं नाटक के  लेखक और निर्देशक अंजनी कुमार सिंह हैं।
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नाटक में पुरुषों के साथ-साथ एक औरत को भी कन्या भ्रुण हत्या के लिए जिम्मेदार बताया गया, और यह संदेश दिया गया कि औरत अपने खिलाफ हो रहे इस अत्याचार का विरोध कर सकती है। डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस नाटक को भावानात्मक वास्तविक रूप देने के लिए इसमें लाइव म्यूजिक का इस्तेमाल किया गया।

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मुंबई से आए संस्कार भारती के कलाकारों ने दी प्रस्तुति

Baby from the womb of the mother's voice, emotional audience
नाटक का मंचन - फोटो : अमर उजाला

नाटक की कहानी की बात करें तो एक ऐसे परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जिसमें एक पोते की मांग की जाती है, लेकिन टेस्ट करवाने पर लड़की के होने का पता चलता है। उसका पति गर्भपात करवाने के लिए महिला को अस्पताल में भर्ती करवा देता है।

जब महिला को गर्भपात के लिए अंदर ले जाया जाता है तो मां की ममता के साथ-साथ उसके भीतर की औरत जाग उठती है और गर्भपात करवाने के लिए मना कर देती है। इस तरह अपने साहस और निडरता से अपने साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ वो आवाज उठाती है और एक नन्ही सी बिटिया को दुनिया में लेकर आती है।

इन कलाकारों ने लिया भाग : 
इस नाटक में मोना, सुमन, अभि, विवेक, आनंद शर्मा, मोहन आनंद, विनोद यादव और प्राची ने भाग लिया। वहीं म्यूजिक डायरेक्टर अवदेश, गीतकार अनीता अग्रवाल और ढोलक पर प्रदीप मिश्रा थे। लाइटिंग में फिल, बैक लाइट और स्पॉट लाइट के साथ-साथ फोलो लाइट का भी इस्तेमाल किया गया। नाटक का मंचन रियलिस्टिक ड्रामा शैली में हुआ।

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