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होली के ये भी रंग: बाबा बकाला की एसडीएम सुमित मुंध बच्चियों की जिंदगी में ला रहीं सफलता की उमंग
Sat, 19 Mar 2022 02:04 AM IST
ajay kumar
रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 19 Mar 2022 02:04 AM IST
सार
डॉ. मुंध ने बताया कि अब वह अपने घर में काम करने वाले या आसपास के रहने वाले परिवारों की बेटियों को पढ़ाई के लिए उत्साहित करती हैं।
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डॉ. सुमित मुंध
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
बाबा बकाला की एसडीएम व भारतीय सेना की पूर्व अधिकारी डॉ. सुमित मुंध बच्चियों की जिंदगी में सफलता के रंग भर रही हैं। एक साधारण से परिवार में जन्मीं व पली बढ़ीं डॉ. मुंध गांव की लड़कियों को आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए जहां प्रेरित करती हैं, वहीं उनका मार्गदर्शन भी करती हैं। वे कहती हैं कि जब एक सामान्य से परिवार की लड़की इतने बड़े पद पर पहुंच सकती है तो बाकी लड़कियां ऐसा क्यों नहीं कर सकतीं।
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डॉ. सुमित मुंध के पिता सर्वण सिंह सिविल सप्लाई विभाग में इंस्पेक्टर थे। उन्होंने अपनी बेटी सुमित को पढ़ाने में अपने रिश्तेदारों का विरोध भी सहा। मगर उन्होंने किसी के सामने हार नहीं मानी और आज उनकी बेटी बाबा बकाला में सब डिवीजन मजिस्ट्रेट के तौर पर सेवाएं दे रही है। इस दौरान ही वे अलग-अलग समय में बच्चियों को इकट्ठा करके पढ़ाती हैं और उन्हें उनके अधिकारों बाबत जागरूक करती हैं।
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डॉ. सुमित मुंध ने बताया कि उनकी सफलता में उनके पिता के साथ-साथ मां का भी भरपूर योगदान रहा। शुरू से ही उन्हें पढ़ने का शौक था। उनके शौक को पंख उनके पिता ने लगाए। उन्होंने 2006 में सरकारी मेडिकल कॉलेज (अमृतसर) से एमबीबीएस की शिक्षा पूरी करने के बाद वर्ष 2007 में वे पहले प्रयास में ही आर्मी मेडिकल कोर में बतौर कैप्टन चुनी गईं लेकिन मेजर पद पाने के बाद उन्होंने स्थानीय लड़कियों की मदद कर उन्हें उनकी जिंदगी की मंजिल तक पहुंचाने के लिए वर्ष 2014 में भारतीय सेना की नौकरी छोड़ दी।
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उन्होंने बताया कि पति सामान्य जॉब में थे और वे संयुक्त परिवार में रहती थीं। तब वर्ष 2014 में उन्होंने सेना की सेवा छोड़कर पीसीएस में जाने का मन बनाया। उन्होंने बताया कि उस वक्त उनका बेटा छोटा था और ऐसे में परीक्षा की तैयारी करना मुश्किल काम था, क्योंकि सेना में ड्यूटी दिन और रात की रहती है लेकिन उन्होंने पीसीएस परीक्षा के लिए तैयारी की और पहली ही बार में चयन हो गया।
डॉ. मुंध ने बताया कि अब वह अपने घर में काम करने वाले या आसपास के रहने वाले परिवारों की बेटियों को पढ़ाई के लिए उत्साहित करती हैं। जरूरतमंद लड़कियों की शिक्षा के लिए जहां खुद आगे बढ़कर मदद करती हैं, वहीं उनका मार्गदर्शन भी करती हैं ताकि उनकी तरह अन्य लड़कियां भी अपनी जिंदगी में सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच सकें।