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Hindi News ›   Chandigarh ›   Ayodhya Ram Mandir Bhoomi Pujan on 5 August with Chandi Mandir Soil and Bheem Bawari Water

Ayodhya Ram Manadir: चंडी मंदिर की मिट्टी और भीम की बावड़ी के जल से होगा शिलान्यास

Thu, 30 Jul 2020 12:13 PM IST
खुशबू गोयल नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 30 Jul 2020 12:13 PM IST
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Ayodhya Ram Mandir Bhoomi Pujan on 5 August with Chandi Mandir Soil and Bheem Bawari Water
राम मंदिर भूमि पूजन के लिए मिट्टी और जल ले जाते हुए अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
पवित्र चंडी मंदिर की मिट्टी और पिंजौर स्थित भीम की बावड़ी के जल का प्रयोग अयोध्या में बनने जा रहे भव्य राम मंदिर के शिलान्यास में किया जाएगा। विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने मिट्टी और जल का मंत्रोच्चार के साथ विधि विधान से पूजन किया। उसके बाद मिट्टी और जल को कलश में सुरक्षित कर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पंजाब प्रांत के लुधियाना स्थित कार्यालय भेजा। जहां से पूरे प्रांत की पवित्र नदियों का जल व पवित्र स्थलों की मिट्टी को इकट्ठा कर अयोध्या रवाना किया जाएगा।
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विहिप चंडीगढ़ के मंत्री सुरेश राणा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आह्वान किया है कि देशभर की पवित्र नदियों का जल व तीर्थ स्थलों की मिट्टी इस्तेमाल अयोध्या में बनने जा रहे भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के शिलान्यास में किया जाएगा। बता दें कि चंडी मंदिर को सिद्ध शक्तिपीठ में भी गिना जाता है और चंडीगढ़ का नाम भी चंडी देवी के नाम पर ही रखा गया है। वहीं, पिंजौर के प्रसिद्ध भीमा देवी मंदिर में स्थित भीम की बावड़ी का भी पंजाब में अपना महत्व है। इसके जल को लोग पंजाब के गंगाजल के नाम से जानते हैं इसलिए इस पवित्र जल को भी अयोध्या भेजा जा रहा है।
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बीते रविवार को दोनों मंदिरों से मिट्टी व जल लाकर इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 स्थित मानस मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ पूरे विधि विधान से पूजन किया गया फिर उसे कलश में रखकरलुधियाना स्थित विश्व हिंदू परिषद के पंजाब प्रांत के कार्यालय में भेज दिया गया। इस मौके पर अखिल भारतीय गोशाला संपर्क प्रमुख दयाशंकर पांडेय, विहिप के उपाध्यक्ष देवेंद्र सिद्धू व कोषाध्यक्ष अनुज सहगल, बजरंग दल के विभाग संयोजक सुशील पांडेय, मीडिया प्रभारी अंकुश गुप्ता व दीपक शर्मा मौजूद रहे।
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सर्वार्थ सिद्धि योग में भेजा पवित्र मिट्टी व जल

कोषाध्यक्ष अनुज सहगल ने बताया कि राम मंदिर के लिए भेजी जाने वाली पवित्र मिट्टी व जल के लिए विशेष मुहूर्त का इंतजार था। बीते शनिवार को सावन मास के नाग पंचमी के शुभ अवसर पर चंडी मंदिर के पुजारियों की देखरेख में मिट्टी ली गई। वहीं भीम की बावड़ी से जल लिया गया। अगले दिन सर्वार्थ सिद्धि योग देखकर मिट्टी व जल का विधि विधान से पूजन कर लुधियाना रवाना कर दिया।

महाभारत काल से जुड़ा है चंडी मंदिर का इतिहास  
मान्यता है कि एक साधु जंगल में तप किया करते थे। यहां उनको एक मूर्ति मिली जो मां दुर्गा की थी, वह महिषासुर का वध करके उसके ऊपर खड़ी थीं। मूर्ति देखकर साधु ने मां भगवती की पूजा-अर्चना शुरू कर दी। उन्होंने घास, मिट्टी और पत्थर से यहां चंडी माता का एक छोटा सा मंदिर बना दिया। इसके बाद आसपास के लोग मंदिर में माथा टेकने लगे और उनकी मनोकामना पूरी होने लगी।

कहा जाता है कि 12 वर्ष के वनवास के दौरान पांडव घूमते हुए यहां पर आए थे और चंडी माता का मंदिर देखा तो अर्जुन ने पेड़ की शाखा पर बैठकर मां की तपस्या की। उनकी तपस्या से खुश होकर माता चंडी ने उनको तेजस्वी तलवार व जीत का वरदान दिया था। यहीं से पांडव कुरुक्षेत्र गए और महाभारत के युद्ध में उनकी जीत हुई।

पंजाब का गंगाजल है भीम की बावड़ी का पानी
मान्यता है कि महाभारत काल में पांडव अज्ञातवास के अंतिम वर्ष में भीमादेवी मंदिर में रुके थे। किसी अनहोनी से बचने के लिए भीम रोज अपने बल से नई बावड़ी बना देते थे। लोग बताते हैं कि इस बावड़ी में जल सीधे हिमालय से आता है। गंगाजल की तरह यह जल भी कभी खराब नहीं होता, इसलिए इस जल को पवित्र माना गया है।
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